वही बारिश जो आसमान से आती है और बूंदों में गाती है। पहाड़ों से फिसलती है और नदियों में चलती है। नहरों में मचलती है, कुएं पोखर से मिलती है। पानी सिर्फ पानी नहीं है, पानी जिंदगानी है। जानिए नाना पाटेकर के अंदाज में पानी की पूरी कहानी

नाना पाटेकर की आवाज अब हमेशा की तरह सुनाई नहीं देगी, लेकिन उनके बोले हुए संवाद और शब्द लंबे समय तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे। आज भारत के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। नाना पाटेकर सिर्फ एक शानदार अभिनेता नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपनी दमदार आवाज और संवाद बोलने के खास अंदाज से भी लोगों के दिलों में जगह बनाई। जब वह कोई बात कहते थे तो साधारण शब्द भी गहरे अर्थ वाले लगने लगते थे। नाना पाटेकर के निधन की खबर के बीच उनका एक पुराना वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें वह पानी और बारिश का खूबसूरत वर्णन करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो जाने-माने न्यूज रिपोर्टर रजत शर्मा के पॉपुलर शो आपकी अदालत से जुड़ा हुआ है। इस वीडियो में नाना पाटेकर एक पुराने फिल्मी प्रसंग का जिक्र करते हुए जिस अंदाज में पानी का वर्णन करते हैं, उसमें बारिश की बूंदों से लेकर इंसान की भावनाओं तक की पूरी कहानी नजर आती है।
रजत शर्मा के शो आपकी अदालत में नाना पाटेकर ने अमोल पालेकर की फिल्म ‘थोड़ा सा रूमानी हो जाए’ का जिक्र किया था। इसी फिल्म के एक संवाद को उन्होंने अपने खास अंदाज में सुनाया था। संवाद में नाना पाटेकर ने अकाल के बीच बारिश की जरूरत और पानी की अहमियत को बेहद खूबसूरत तरीके से समझाया। दरअसल, अमोल पालेकर की फिल्म में एक व्यक्ति कहता है कि अकाल है और वह बारिश लाएगा। इसके बाद एक बच्चा सवाल करता है कि क्या सचमुच बारिश आएगी। फिल्म में बच्चे के सवाल का जो जवाब है, उसी जवाब के जरिए नाना पाटेकर ने बारिश की ऐसी तस्वीर खींची, जो सुनने वाले के मन में सीधे उतर जाती है और दिल को छू लेती है।
नाना पाटेकर कहते हैं कि, “वही बारिश जो आसमान से आती है और बूंदों में गाती है। पहाड़ों से फिसलती है और नदियों में चलती है। नहरों में मचलती है, कुएं पोखर से मिलती है। खपरैलों पर गिरती है, गलियों में फिरती है। मोड़ पर संभलती है, फिर आगे निकलती है। वही बारिश। यह बारिश अक्सर गीली होती है, इसे पानी भी कहते हैं। उर्दू में पानी को आब, मराठी में पाणी, तमिल में तन्नी, कन्नड़ में नीरू और बंगला में इसे जोल कहते हैं। संस्कृत में इसे वारि, नीर, जीवन, पय, अमृत, उदक, अंबु भी कहते हैं। ग्रीक में इसे एक्वापुरा, अंग्रेजी में वाटर, फ्रेंच में ओ और केमिस्ट्री में एचटूओ कहते हैं। यह पानी जब आंख से ढलता है तो आंसू कहलाता है, लेकिन चेहरे पर चढ़ जाए तो रूबाब बन जाता है। कोई शर्म से पानी-पानी हो जाता है और कभी-कभी यह पानी सरकारी फाइलों में अपने कुएं समेत चोरी हो जाता है। पानी तो पानी है, पानी जिंदगानी है। इसलिए जब रूह की नदी सूखी हो, मन का हिरण प्यासा हो, दिमाग में लगी हो आब और प्यार की गागर खाली हो, तब मैं हमेशा यह बारिश नाम का गीला पानी लेने की राय देता हूं।”
नाना पाटेकर ने जिस अंदाज में बारिश और पानी का वर्णन किया, वह सिर्फ पानी की कहानी नहीं है। उन्होंने बारिश की बूंदों के जरिए जिंदगी, भावनाओं और इंसान के भीतर के खालीपन को भी समझाया। आसमान से गिरने वाली बारिश से लेकर आंखों से निकलने वाले आंसू तक, उन्होंने पानी के अलग-अलग रूपों को अपनी बात में शामिल किया। यही वजह है कि उनका यह संवाद सुनने के बाद बारिश सिर्फ बारिश नहीं लगती, बल्कि जिंदगी का एक खूबसूरत एहसास बन जाती है। नाना पाटेकर की आवाज और संवाद बोलने का अंदाज इस पूरे वर्णन को और खास बना देता है। उन्होंने साधारण शब्दों में ऐसी गहरी बात कह दी, जो लंबे समय तक याद रहेगी। एक कलाकार की पहचान उसके काम के साथ-साथ उसके उन शब्दों से भी होती है, जिन्हें लोग लंबे समय तक याद रखते हैं। नाना पाटेकर का यह संवाद भी ऐसा ही है। आज उनका यह पुराना वीडियो लोगों को उनके उसी
खास अंदाज की याद दिला रहा है, जिसमें पानी सिर्फ पानी नहीं, बल्कि जिंदगानी बन जाता है।
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