नाना पाटेकर की जिंदगी से जुड़ी एक ऐसी बात भी है, जिसके बारे में शायद बहुत कम लोग जानते हैं। जिस नाम से दुनिया उन्हें दशकों से जानती रही, वह उनका असली नाम नहीं था। आखिर उनका असली नाम क्या था और ‘नाना’ नाम उन्हें कैसे मिला?

बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों के बीच शोक की लहर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 75 वर्षीय अभिनेता को गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर बेहोशी की हालत में पाया गया था। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। नाना पाटेकर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में दमदार अभिनय और यादगार संवादों से अलग पहचान बनाई। लेकिन उनकी जिंदगी से जुड़ी एक ऐसी बात भी है, जिसके बारे में शायद बहुत कम लोग जानते हैं। जिस नाम से दुनिया उन्हें दशकों से जानती रही, वह उनका असली नाम नहीं था। आखिर उनका असली नाम क्या था और ‘नाना’ नाम उन्हें कैसे मिला?
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ गजानन पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उनके पिता का नाम दिनकर पाटेकर और मां का नाम निर्मला पाटेकर था। उनका परिवार मराठी पृष्ठभूमि से था। उन्होंने मुंबई के बांद्रा स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की थी। फिल्मी दुनिया में आने के बाद उनकी पहचान नाना पाटेकर के नाम से बनी। यह नाम इतना मशहूर हुआ कि समय के साथ उनका मूल नाम पीछे छूट गया और ‘नाना’ ही उनकी पहचान बन गया।
नाना पाटेकर के ‘नाना’ नाम के पीछे कोई फिल्मी कहानी नहीं है। इसकी शुरुआत उनके बचपन से हुई थी। खुद नाना पाटेकर ने एक इंटरव्यू में इस नाम के पीछे की वजह बताई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी मां की एक सहेली थीं, जो उनके लिए बहन जैसी थीं। वह बचपन में उन्हें प्यार से ‘नाना’ कहकर बुलाया करती थीं। धीरे-धीरे यही नाम परिवार और आसपास के लोगों के बीच भी प्रचलित हो गया। इस तरह बचपन में प्यार से पुकारा जाने वाला एक साधारण नाम आगे चलकर उनकी पहचान बन गया। फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद भी यही नाम उनके साथ जुड़ा रहा और देखते ही देखते देशभर में मशहूर हो गया।
नाना पाटेकर ने इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मां की एक सहेली उन्हें बचपन से ‘नाना’ कहकर बुलाती थीं। वह उनके लिए बहन जैसी थीं। इसी वजह से यह नाम उन्हें बेहद अपना और अच्छा लगता था। उन्होंने यह भी बताया था कि पासपोर्ट, आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेजों पर भी नाना नाम ही दर्ज है। यानी बचपन में प्यार से मिला यह नाम बाद में उनकी आधिकारिक पहचान का भी हिस्सा बन गया।
हालांकि आज पूरी दुनिया उन्हें नाना पाटेकर के नाम से जानती है, लेकिन स्कूल के दिनों में उन्हें विश्वनाथ या ‘विशू’ कहकर बुलाया जाता था। नाना पाटेकर ने खुद बताया था कि अगर आज कोई उन्हें ‘विशू’ कहकर बुलाता है तो वह तुरंत समझ जाते हैं कि सामने वाला उनके स्कूल के दिनों का कोई पुराना परिचित है। समय के साथ ‘नाना’ नाम इतना लोकप्रिय हो गया कि ‘विशू’ और विश्वनाथ की जगह यही नाम उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया।
फिल्मी करियर में नाना पाटेकर ने कई यादगार किरदार निभाए और अपनी अलग अभिनय शैली से दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। उनकी दमदार आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और गंभीर किरदारों ने उन्हें अलग पहचान दी। लेकिन इन सबके बीच ‘नाना’ नाम उनकी पहचान का सबसे अहम हिस्सा बन गया। दर्शक उन्हें इसी नाम से जानने और पुकारने लगे। उनका असली नाम विश्वनाथ गजानन पाटेकर था, लेकिन फिल्मी दुनिया में नाना पाटेकर नाम ही उनकी पहचान बन गया।
नाना पाटेकर के नाम की कहानी इसलिए खास है क्योंकि इसकी शुरुआत किसी फिल्म या करियर से नहीं, बल्कि बचपन की एक आत्मीय याद से हुई थी। उनकी मां की सहेली ने उन्हें जिस नाम से प्यार से पुकारना शुरू किया, वही नाम आगे चलकर उनकी पूरी पहचान बन गया। आज नाना पाटेकर के निधन की खबर के बीच उनके प्रशंसक उनके फिल्मी सफर और यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। वहीं, उनके नाम से जुड़ी यह कहानी भी बताती है कि कभी-कभी बचपन में प्यार से दिया गया एक साधारण नाम जिंदगी भर की पहचान बन जाता है।
विज्ञापन