फिल्म 'हाय जिंदगी' में महिला-पुरुष दोनों के लिए समान रूप से बलात्कार संबंधित प्रावधानों की आवश्यकता पर उठे मुद्दे ने न्यायिक और कानूनी स्तर पर हलचल मचा दी है। इस संदर्भ में, दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।

बता दे कि याचिका के अनुसार, वर्तमान में बलात्कार से संबंधित धारा 63 केवल महिलाओं को ही पीड़ित मानती है, जबकि पुरुष भी यौन शोषण का शिकार हो सकते हैं। फिल्म 'हाय जिंदगी' में इसी मुद्दे को उजागर करते हुए दिखाया गया है कि पुरुष भी बलात्कार का शिकार हो सकते हैं, लेकिन मौजूदा कानून उन्हें संरक्षण नहीं प्रदान करता है। फिल्म के निर्माता सुनील कुमार अग्रवाल ने कहा कि समाज में यह धारणा प्रचलित है कि केवल महिलाएं ही पीड़ित हो सकती हैं, जबकि समाज का बदलता स्वरूप और समय की मांग है कि कानून भी जेंडर न्यूट्रल हो जाए।
यह याचिका 29 अक्टूबर, 2025 को सूचीबद्ध की गई थी, और मुख्य न्यायाधीश ने इसे पहले से लंबित मामले (डब्ल्यू.पी. (सीआरएल) 3274/2025) के साथ जोड़ने का निर्देश दिया है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री यू यू ललित जी ने भी इसी मुद्दे को अपने भाषण में उठाया था।
फिल्म 'हाय जिंदगी', जो 14 नवंबर, 2025 को पूरे भारत में रिलीज़ होने वाली है, समाज में लैंगिक समानता और न्याय के प्रति जागरूकता फैलाने का उद्देश्य रखती है। इस फिल्म का निर्देशन अजय राम ने किया है। फिल्म में दिखाया गया है कि पुरुष भी बलात्कार का शिकार हो सकते हैं और उन्हें भी कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।