Pradeep Rawat: इस दौरान परिवार, करीबी दोस्त और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकार उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। आमिर खान, यशपाल शर्मा और अखिलेंद्र मिश्रा समेत कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पिता को मुखाग्नि देने के बाद उनके बेटे मीडिया से बात करते हुए बेहद भावुक नजर आए।

हिंदी और साउथ सिनेमा के दमदार अभिनेता प्रदीप रावत अब हमारे बीच नहीं रहे। 4 अगस्त को उन्होंने आखिरी सांस ली और 5 अगस्त को मुंबई के ओशिवारा श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिवार, करीबी दोस्त और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकार उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। आमिर खान, यशपाल शर्मा और अखिलेंद्र मिश्रा समेत कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पिता को मुखाग्नि देने के बाद उनके बेटे विक्रमादित्य रावत मीडिया से बात करते हुए बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने अपने पिता के आखिरी दिनों और अस्पताल में बिताए गए मुश्किल पलों को साझा किया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विक्रमादित्य रावत ने बताया कि कुछ समय पहले तक किसी को अंदाजा भी नहीं था कि परिवार पर इतनी बड़ी मुश्किल आने वाली है। उनके मुताबिक, करीब दो महीने पहले तक प्रदीप रावत बिल्कुल सामान्य जीवन जी रहे थे। अचानक डेढ़ महीने पहले उन्हें लगातार हिचकी आने लगी। शुरुआत में परिवार को लगा कि यह कोई सामान्य परेशानी होगी इसलिए दवाइयां भी दी गईं लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। समय बीतने के साथ उनकी तबीयत और बिगड़ती चली गई।
विक्रम ने बताया कि जब घर पर डॉक्टर को बुलाया गया तो शुरुआती जांच में पेट में संक्रमण होने की आशंका जताई गई। इलाज शुरू हुआ, लेकिन तबीयत में कोई खास फर्क नहीं पड़ा। बाद में जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया और ब्लड टेस्ट कराया गया तो रिपोर्ट में व्हाइट ब्लड सेल (WBC) की संख्या काफी ज्यादा निकली। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत कोकिलाबेन अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
कोकिलाबेन अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने शुरुआती जांच के आधार पर बताया कि ब्लड कैंसर यानी ल्यूकेमिया होने की संभावना बहुत अधिक है। अगले दिन हुई जांच में यह बीमारी पूरी तरह से पुष्टि हो गई। विक्रम ने बताया कि यह बात पूरे परिवार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी क्योंकि कुछ ही समय पहले कराए गए फुल बॉडी चेकअप में ऐसी कोई समस्या सामने नहीं आई थी।
इलाज शुरू होने के बाद परिवार को लगने लगा था कि स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। विक्रम के मुताबिक, डॉक्टरों ने बताया था कि रिपोर्ट्स में सुधार दिखाई दे रहा है और प्लेटलेट्स भी बढ़ने लगे थे। इसी वजह से बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी भी की जा रही थी। लेकिन अचानक तेज बुखार आने के बाद उनकी तबीयत फिर से बिगड़ गई। प्लेटलेट्स तेजी से गिरकर केवल 3 हजार रह गए जबकि सामान्य स्थिति में यह संख्या कई लाख होती है।
अपने पिता के आखिरी पलों को याद करते हुए विक्रमादित्य भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि जब अस्पताल से हालत गंभीर होने की सूचना मिली तो पूरा परिवार ICU की तरफ भागा। वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि डॉक्टर प्रदीप रावत को बचाने के लिए CPR दे रहे थे। विक्रम ने कहा कि उसी पल उन्हें समझ आ गया था कि स्थिति बेहद गंभीर है। यह दृश्य देखकर उनकी मां भी खुद को संभाल नहीं सकीं और रोने लगीं।
5 अगस्त को मुंबई के ओशिवारा श्मशान घाट में प्रदीप रावत का अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के साथ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकार भी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। सभी ने उन्हें एक शानदार कलाकार और बेहतरीन इंसान बताते हुए नम आंखों से विदाई दी। प्रदीप रावत अपने अभिनय और दमदार किरदारों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उनके निधन से फिल्म जगत के साथ-साथ उनके चाहने वालों के बीच भी गहरा शोक है।
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