रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर का निधन, पिता संग गढ़ा था ‘रामायण’ का स्वर्णिम इतिहास
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 03:26 PM
भारतीय टेलीविजन जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर निर्माता और निर्देशक प्रेम सागर का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह महान फिल्मकार रामानंद सागर के बेटे और निर्माता शिव सागर के पिता थे। लंबे समय से बीमार चल रहे प्रेम सागर का इलाज मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में चल रहा था। रविवार को डॉक्टरों ने उन्हें घर ले जाने की सलाह दी जहां सुबह 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
मुंबई में हुआ अंतिम संस्कार
परिवार और नज़दीकी रिश्तेदारों की मौजूदगी में प्रेम सागर का अंतिम संस्कार मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट पर किया गया। उनकी अंतिम यात्रा दोपहर 2:30 बजे निकाली गई और 3 बजे उनका दाह संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान सागर परिवार बेहद भावुक दिखाई दिया। सागर वर्ल्ड ने सोशल मीडिया पर इस दुखद समाचार को साझा करते हुए लिखा—"बहुत ही दुख के साथ बताया जा रहा है कि श्री प्रेम सागर जी अब हमारे बीच नहीं रहे। उनकी आत्मा को शांति मिले। ओम शांति।"
‘रामायण’ से ‘विक्रम-बेताल’ तक का सफर
प्रेम सागर ने भारतीय टेलीविजन को कई यादगार शो दिए। उन्होंने ‘विक्रम और बेताल’ का निर्देशन और निर्माण किया, जिसे हर उम्र के दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके अलावा उन्होंने ‘अलिफ लैला’, ‘काकभुशुंडी’, ‘रामायण’, ‘कामधेनु गौमाता’, ‘हम तेरे आशिक’ और ‘बसेरा’ जैसे शो और फिल्मों का भी निर्माण किया। उनके काम ने भारतीय टेलीविजन की दिशा और दशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई।
पिता संग ‘रामायण’ में दिया योगदान
प्रेम सागर ने अपने पिता रामानंद सागर के साथ मिलकर मशहूर धारावाहिक ‘रामायण’ के निर्माण में भी अहम योगदान दिया। 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित ‘रामायण’ ने टेलीविजन इतिहास रच दिया और आज भी इसे भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक माना जाता है। प्रेम सागर ने बतौर फोटोग्राफर और सिनेमैटोग्राफर इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को आकार देने में योगदान दिया।
फिल्मों से टेलीविजन तक का अनुभव
सिर्फ टेलीविजन ही नहीं, फिल्मों में भी प्रेम सागर ने अपना हुनर दिखाया। उन्होंने 1968 में आई फिल्म आंखे में इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट में काम किया और 1976 की फिल्म चरस में बतौर सिनेमैटोग्राफर अपनी पहचान बनाई। वह पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) के 1968 बैच के छात्र रहे थे, जहां से उन्होंने फोटोग्राफी और सिनेमैटोग्राफी की शिक्षा प्राप्त की।
सागर परिवार की विरासत को आगे बढ़ाया
रामानंद सागर ने जिस विरासत की नींव रखी, उसे प्रेम सागर ने आगे बढ़ाया। उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी सागर आर्ट्स के तहत कई प्रोजेक्ट्स बनाए, जिनसे भारतीय टेलीविजन पर नई पहचान बनी। निर्माता, निर्देशक और सिनेमैटोग्राफर के रूप में उनकी बहुमुखी प्रतिभा हमेशा याद की जाएगी।
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