रामायण मूवी रिव्यू में जानें रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश की एक्टिंग कैसी है। शानदार विजुअल्स, कमजोर वीएफएक्स, संगीत और फिल्म की खूबियों व कमियों की पूरी जानकारी।

इंतजार की घड़ी खत्म हो गई है। बॉलीवुड की सबसे चर्चित और भव्य फिल्मों में शामिल 'रामायण' का पहला पार्ट सिनेमाघरों में दस्तक दे चुका है। रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे बड़े सितारों से सजी इस फिल्म को लेकर दर्शकों में लंबे समय से उत्सुकता बनी हुई थी। करीब 4000 करोड़ रुपये के कुल बजट में बन रही इस फिल्म के पहले पार्ट पर लगभग 2000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। फिल्म से शानदार विजुअल्स और भव्य सिनेमाई अनुभव की उम्मीद थी। ऑस्कर विजेता विजुअल इफेक्ट्स कंपनी डीएनईजी ने भी इसके दृश्यों को खास बनाने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन क्या नितेश तिवारी की यह रामायण दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है? क्या रणबीर कपूर राम के किरदार में प्रभाव छोड़ पाए और यश ने रावण बनकर बाजी मार ली? आइए जानते हैं फिल्म का पूरा रिव्यू।
आमतौर पर रामायण की कहानी भगवान राम के जन्म और उनके जीवन से शुरू होती है, लेकिन निर्देशक नितेश तिवारी ने इस बार कहानी को एक अलग अंदाज में पेश किया है। फिल्म की शुरुआत रावण के जीवन और उसके परिवार से होती है। इसमें दिखाया गया है कि रावण किस तरह अपनी तपस्या और भक्ति से ब्रह्मा जी और भगवान शिव को प्रसन्न करता है। इसके बाद वह लंका का राजा बनता है और धीरे-धीरे अपनी शक्ति के दम पर कई राज्यों पर विजय हासिल करता है। रावण की बढ़ती शक्ति और उसके अधर्म से परेशान होकर देवराज इंद्र भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु धरती पर भगवान राम के रूप में अपना सातवां अवतार लेते हैं। फिल्म में राजा दशरथ और उनके चारों पुत्रों के बीच प्रेम को भी दिखाया गया है। हालांकि, राजा दशरथ को राम सबसे अधिक प्रिय हैं।
राम और लक्ष्मण बड़े होकर गुरु विश्वामित्र से शिक्षा और युद्ध कौशल सीखते हैं। इसके बाद ताड़का और सुबाहु के वध से कहानी आगे बढ़ती है और राम के सीता स्वयंवर तक पहुंचती है। अयोध्या में राम के राज्याभिषेक की तैयारियां शुरू होती हैं, लेकिन तभी माता कैकेयी अपने दो वचनों की मांग कर लेती हैं। इसके चलते राम को 14 वर्ष का वनवास मिलता है। माता सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने का फैसला करते हैं।
वनवास के दौरान राम, सीता और लक्ष्मण जंगल में अपना जीवन बिताते हैं। इसी बीच रावण की बहन शूर्पणखा उनसे मिलने पहुंचती है। वह राम से विवाह करना चाहती है, लेकिन राम उसे मना कर देते हैं। इसके बाद लक्ष्मण शूर्पणखा की नाक काट देते हैं। अपमानित शूर्पणखा अपने भाइयों खर और दूषण के पास पहुंचती है और फिर रावण को पूरी घटना बताती है। इसके बाद राम का सामना खर-दूषण और उनकी विशाल राक्षस सेना से होता है। फिल्म में इस युद्ध को भी बड़े स्तर पर दिखाया गया है। कहानी आगे बढ़ते हुए सीता हरण और जटायु तथा रावण के बीच हुए भीषण युद्ध तक पहुंचती है। इस तरह फिल्म का पहला पार्ट रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को समेटता है।
निर्देशक नितेश तिवारी की पिछली फिल्मों को देखें तो उनकी सबसे बड़ी खासियत भावनात्मक कहानियां रही हैं। 'दंगल' और 'छिछोरे' जैसी फिल्मों में उन्होंने दर्शकों के दिलों को छूने वाले पल दिखाए थे। रामायण में भी उनका यही अंदाज देखने को मिलता है। यह फिल्म सिर्फ भव्य दृश्यों और युद्ध के लिए नहीं, बल्कि भगवान राम के जीवन में आने वाले भावनात्मक उतार-चढ़ाव के लिए भी याद रखी जाएगी। अपने पिता और परिवार को छोड़कर वनवास जाना, पिता के अंतिम समय में उनके पास मौजूद नहीं रह पाना और पत्नी सीता का हरण हो जाना जैसे प्रसंगों को निर्देशक ने भावनात्मक तरीके से दिखाने की कोशिश की है। खास बात यह है कि फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं, जो दर्शकों को भावुक कर सकते हैं। जटायु की मृत्यु का प्रसंग भी इनमें शामिल है। इन दृश्यों में निर्देशक ने कहानी की भावनाओं को बनाए रखने पर ध्यान दिया है।
फिल्म का पहला हिस्सा काफी प्रभावशाली लगता है। रावण के जीवन से लेकर राम के वनवास तक की कहानी को अच्छे तरीके से आगे बढ़ाया गया है। हालांकि, दूसरे हिस्से में कहानी थोड़ी धीमी पड़ती है। ऐसा लगता है कि एक साथ बहुत सारे प्रसंग दिखाने की कोशिश में फिल्म कुछ लंबी हो गई है। इसके बावजूद अंत तक पहुंचते-पहुंचते कहानी फिर से अपनी पकड़ बनाने में सफल रहती है।
रामायण की सबसे बड़ी ताकत इसके विजुअल्स हैं। फिल्म में अयोध्या, मिथिला, लंका, वन, देवलोक और पाताल लोक जैसी जगहों को भव्य तरीके से दिखाया गया है। इन सभी जगहों को पर्दे पर उतारने के लिए बड़े स्तर पर काम किया गया है। कई दृश्यों को देखकर ऐसा लगता है कि भारतीय सिनेमा में इस तरह की भव्यता कम ही देखने को मिली है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी भी काफी शानदार है। हर दृश्य को बड़े पैमाने पर पेश करने की कोशिश की गई है। हालांकि, फिल्म की शूटिंग का बड़ा हिस्सा ग्रीन स्क्रीन और स्टूडियो में किया गया है। इस वजह से कुछ जगहों पर दृश्य थोड़े बनावटी लगने लगते हैं।
वहीं, फिल्म में दिखाए गए कुछ दानवों के वीएफएक्स उम्मीद के मुताबिक प्रभावशाली नहीं हैं। उनका लुक थोड़ा अधूरा महसूस होता है। ऐसा लगता है कि इन दृश्यों पर कुछ और काम किया जा सकता था। हालांकि, यह कमी पूरी फिल्म के अनुभव को खराब नहीं करती। बाकी ज्यादातर दृश्यों में विजुअल इफेक्ट्स का काम काफी अच्छा है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि रामायण का पहला पार्ट भव्यता के मामले में काफी आगे है। अगर कुछ दानवों के कमजोर वीएफएक्स को नजरअंदाज कर दिया जाए तो फिल्म के कई दृश्य लंबे समय तक याद रह सकते हैं।
रामायण के संगीत की जिम्मेदारी हॉलीवुड के मशहूर संगीतकार हांस जिमर और भारतीय संगीतकार एआर रहमान को दी गई है। दोनों ने मिलकर फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर को काफी प्रभावशाली बनाया है। फिल्म के कई दृश्यों में बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के भावों को और मजबूत करता है। खासतौर पर भगवान राम के वनवास जाने वाला प्रसंग काफी प्रभावशाली बन पड़ा है। इस दौरान संगीत दृश्य की गंभीरता और भावनाओं को बेहतर तरीके से सामने लाता है।
हांस जिमर और एआर रहमान का संगीत फिल्म की बड़ी खूबियों में शामिल है। कई मौकों पर बैकग्राउंड स्कोर की वजह से दृश्य का असर और गहरा हो जाता है। फिल्म देखते समय यह महसूस होता है कि संगीत पर भी उतनी ही मेहनत की गई है जितनी इसके विजुअल्स पर।
भगवान राम के किरदार में रणबीर कपूर ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है। उनके चेहरे पर शांति और किरदार में सादगी दिखाने का प्रयास नजर आता है। राम के रूप में उनका लुक भी काफी प्रभावशाली है। रणबीर ने इस किरदार को निभाने के लिए मेहनत की है और यह पर्दे पर दिखाई भी देती है। हालांकि, उनके अभिनय को देखते हुए लगता है कि वह कुछ दृश्यों में और बेहतर कर सकते थे। खासकर उनसे जिस स्तर के अभिनय की उम्मीद की जाती है, उस लिहाज से उनका प्रदर्शन कुछ जगहों पर सामान्य महसूस होता है।
अगर दर्शक उनकी तुलना रामानंद सागर की रामायण में भगवान राम बने अरुण गोविल से करते हैं तो रणबीर का अभिनय उन्हें थोड़ा अलग और कम प्रभावशाली लग सकता है। हालांकि, दोनों कलाकारों की प्रस्तुति और उनके दौर को अलग-अलग नजरिए से देखना जरूरी है। रणबीर ने भगवान राम के किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश की है। अब दूसरे पार्ट में उनके अभिनय को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई हैं।
माता सीता के किरदार में साई पल्लवी नजर आई हैं। उनके चेहरे पर मासूमियत और किरदार में सादगी साफ दिखाई देती है। कुछ दृश्यों में उनका अंदाज काफी खूबसूरत लगता है। हालांकि, सीता के किरदार में उनके भावनात्मक दृश्यों का प्रभाव उतना गहरा नहीं बन पाता, जितनी उम्मीद थी। रणबीर कपूर और साई पल्लवी के बीच भी कुछ जगहों पर वह केमिस्ट्री नजर नहीं आती, जो राम और सीता के रिश्ते को और प्रभावशाली बना सकती थी। इसके बावजूद साई पल्लवी ने अपने किरदार को अच्छे तरीके से निभाने की कोशिश की है। उनके लुक और स्क्रीन पर मौजूदगी को दर्शकों का ध्यान जरूर मिलता है।
लक्ष्मण के किरदार में रवि दुबे ने अच्छा काम किया है। फिल्म में उनका अंदाज कई जगह हल्का-फुल्का नजर आता है, लेकिन जब कहानी में गुस्से और युद्ध की स्थिति आती है तो उनका अभिनय प्रभाव छोड़ता है। लक्ष्मण के किरदार में उनका प्रदर्शन फिल्म की अच्छी बातों में शामिल है। वहीं, शूर्पणखा के किरदार में रकुल प्रीत सिंह नजर आई हैं। उनका काम उम्मीद से बेहतर लगता है। उन्होंने इस किरदार को पर्दे पर अच्छे तरीके से पेश किया है।
राजा दशरथ के किरदार में अरुण गोविल को देखना भी दर्शकों के लिए खास अनुभव है। कभी टीवी पर भगवान राम बनकर लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले अरुण गोविल अब रामायण में राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं। उनकी मौजूदगी फिल्म को एक अलग भावनात्मक जुड़ाव देती है। फिल्म में लारा दत्ता, अजिंक्य देव, शिशिर शर्मा, आदिनाथ कोठारे, विवेक ओबेरॉय, सौरभ सचदेवा, कुणाल कपूर, मुकेश तिवारी, शीबा चड्ढा और शोभना जैसे कलाकार भी नजर आते हैं। सभी कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं के मुताबिक अच्छा काम किया है। कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का काम भी सराहना के योग्य है।
फिल्म में अगर किसी कलाकार ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है तो वह यश हैं। रावण के किरदार में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस काफी दमदार है। जब भी वह पर्दे पर आते हैं, उनका अंदाज और व्यक्तित्व दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खींच लेता है। यश ने रावण के किरदार में उसकी ताकत, घमंड और नकारात्मक पक्ष को प्रभावशाली तरीके से पेश किया है। उनका अभिनय कई दृश्यों में फिल्म को एक अलग स्तर पर ले जाता है। रावण का किरदार नकारात्मक होने के बावजूद यश अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों को प्रभावित करने में सफल रहते हैं। उनकी अभिनय क्षमता और संवाद अदायगी फिल्म के कई महत्वपूर्ण दृश्यों को खास बनाती है। पहले पार्ट में रावण के रूप में यश का प्रदर्शन काफी दमदार है। ऐसे में दूसरे पार्ट में भगवान राम और रावण के बीच होने वाले संघर्ष को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ जाती है।
कुल मिलाकर नितेश तिवारी की रामायण का पहला पार्ट भव्यता, भावनाओं, शानदार सिनेमैटोग्राफी और दमदार संगीत का अच्छा मेल है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके विजुअल्स और कुछ यादगार भावनात्मक दृश्य हैं। वहीं, हांस जिमर और एआर रहमान का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के प्रभाव को और बढ़ाता है। हालांकि, कुछ जगहों पर कमजोर वीएफएक्स, दूसरे हिस्से की धीमी रफ्तार और रणबीर कपूर तथा साई पल्लवी के बीच कम नजर आने वाली केमिस्ट्री फिल्म की कमजोरियां हैं। इसके बावजूद यश का दमदार अभिनय, जटिल प्रसंगों को पेश करने का तरीका और फिल्म की भव्यता इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं।
अगर आप रामायण की कहानी को बड़े पर्दे पर भव्य अंदाज में देखना चाहते हैं और शानदार विजुअल्स के साथ भावनात्मक दृश्यों का अनुभव लेना चाहते हैं तो यह फिल्म आपको पसंद आ सकती है।
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