सलमान खान ने ‘काला हिरण: बैटल फॉर लिगेसी’ की रिलीज पर रोक की मांग की है। दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रोड्यूसर अमित जानी ने फिल्म की रिलीज को लेकर अहम बात कही।

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की अपकमिंग फिल्म ‘काला हिरण: बैटल फॉर लिगेसी’ को लेकर विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। सलमान खान ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अभिनेता की ओर से कहा गया है कि फिल्म में उन्हें कई गंभीर अपराधों से जोड़कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई है। इस मामले में गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां फिल्म के निर्माता अमित जानी की ओर से भी अहम बात कही गई।
सलमान खान के वकील रवि प्रकाश ने हाईकोर्ट में दलील दी कि ‘काला हिरण: बैटल फॉर लिगेसी’ अभिनेता के जीवन से जुड़ी अक्टूबर 1998 की ब्लैकबक घटना और उससे जुड़ी कानूनी कार्यवाही पर आधारित है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म के निर्माता ने कई बार सार्वजनिक रूप से यह बात कही है कि फिल्म सलमान खान और इस मामले से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है। याचिका के मुताबिक, फिल्म के प्रमोशन के लिए इस्तेमाल किए गए मटेरियल में भी सलमान खान का नाम, उनकी शक्ल-सूरत, तौर-तरीके, निजी खूबियां, मशहूर फिल्मों और उनसे जुड़ी चर्चित घटनाओं का इस्तेमाल किया गया है। सलमान खान की ओर से दावा किया गया है कि फिल्म में उन्हें ऐसे अपराधों से भी जोड़कर दिखाया गया है, जिनके लिए उन पर कभी कोई केस नहीं चला।
सलमान खान की याचिका में फिल्म के कोर्ट से जुड़े दृश्यों पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म में नाटकीय तरीके से ट्रायल दिखाया गया है और कथित तौर पर मनगढ़ंत गवाही तथा फोरेंसिक नतीजों को दर्शकों के सामने रखा गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि सलमान खान जैसे दिखने वाले किरदार को दोषी के तौर पर पेश किया गया है। अभिनेता की ओर से इसे उनके खिलाफ चल रहे मामलों का मीडिया ट्रायल बताया गया है। याचिका के अनुसार, इस तरह की प्रस्तुति संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और न्याय प्रक्रिया में दखल डाल सकती है।
याचिका में दावा किया गया है कि फिल्म में सलमान खान को कई ऐसे गंभीर मामलों में भी शामिल बताया गया है, जिनके लिए उन पर कभी आरोप नहीं लगा। इनमें गवाहों को डराने-धमकाने, झूठी गवाही के लिए उकसाने, मेडिकल एक्सपर्ट्स को रिश्वत देने और जांच एजेंसियों तथा न्यायिक प्रक्रिया पर बाहरी दबाव डालने जैसे आरोप शामिल हैं। सलमान खान की ओर से यह भी कहा गया है कि फिल्म में उन्हें अंडरवर्ल्ड और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से जोड़ने की कोशिश की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि इस तरह के चित्रण से अभिनेता को नफरत, तिरस्कार और मजाक का पात्र बनाया जा सकता है। साथ ही इससे उनकी निजी सुरक्षा को गंभीर खतरा और उनकी प्रतिष्ठा को ऐसा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई मुश्किल हो।
याचिका में यह भी कहा गया है कि ब्लैकबक घटना से जुड़े चार मामलों में से तीन में सलमान खान बरी हो चुके हैं। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील और स्पेशल लीव पिटीशन लंबित होने का भी उल्लेख किया गया है। सलमान खान की ओर से दलील दी गई कि ऐसे समय में फिल्म के जरिए एक नाटकीय ट्रायल दिखाना उनके निष्पक्ष सुनवाई के मौलिक अधिकार को प्रभावित कर सकता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म के टीजर और प्रमोशनल मटेरियल में इशारों के जरिए सलमान खान को उन अपराधों का दोषी दिखाया गया है, जिनसे जुड़े मामले अभी कानूनी प्रक्रिया में हैं।
सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्माता अमित जानी ने हाईकोर्ट को बताया कि ‘काला हिरण: बैटल फॉर लिगेसी’ फिलहाल रिलीज के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि फिल्म को अभी तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC से प्रमाणपत्र नहीं मिला है। प्रोड्यूसर की ओर से यह भी कहा गया कि मौजूदा स्थिति में फिल्म किसी OTT प्लेटफॉर्म पर भी रिलीज नहीं हो सकती। यानी अभी फिल्म को रिलीज करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और उसे प्रमाणन की प्रक्रिया से गुजरना बाकी है।
सलमान खान की याचिका और फिल्म के निर्माता की दलीलों के बाद इस मामले में अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी। फिलहाल विवाद का केंद्र फिल्म में सलमान खान के कथित चित्रण, उनके लंबित कानूनी मामलों और फिल्म की रिलीज को लेकर अभिनेता की आपत्ति है। आने वाली सुनवाई में इस मामले पर हाईकोर्ट का रुख महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल फिल्म को CBFC से प्रमाणपत्र नहीं मिला है, इसलिए इसकी रिलीज को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सलमान खान की ओर से फिल्म की रिलीज पर रोक की मांग की गई है और मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होनी है।
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