Tribute : उम्मीद की दरिया में बहता हुआ पानी थे गुलशन कुमार
भारत
चेतना मंच
12 Aug 2022 07:10 PM
{संगीत के बेताज बादशाह की पुण्यतिथि पर विशेष}
Mumbai/Noida : मुंबई/नोएडा। छोटे कस्बों, नगरों और गली-मोहल्लों के गायकों को संगीत की दुनिया के फलक पर स्थापित करने वाला शख्स बेशक आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी यादें हमारे जेहन में अब भी जिंदा हैं। उस शख्स का नाम है गुलशन कुमार। गुलशन कुमार किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। दिल्ली के दरियागंज में फल और जूस की दुकान से संगीत इंडस्ट्रीज की दुनिया के बेताज बादशाह बनने तक का गुलशन कुमार का सफर सच में रोमांचित करने वाला है। वे उम्मीद के दरिया में बहता हुआ पानी थे, जिसमें डुबकी लगाकर देश के हजारों गायकों ने अपने लिए नया मुकाम बनाने में कामयाबी हासिल की। आज उनकी पुण्यतिथि पर चेतना मंच परिवार की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
भारत के संगीत जगत ने बीते 100 वर्षों में बहुत से परिवर्तन देखे हैं, जिन्हें कुछ नियत कालों में भी बांटा जा सकता है, जिनमें से एक समय टी-सीरीज के उदय और उसके कारण संगीत उद्योग में आए सकारात्मक परिवर्तन का समय भी है। टी-सीरीज को उस समय मार्केट में कम दरों पर ऑडियो कैसेट बेचने के लिए जाना जाता है, जब बड़ी कम्पनियों की कैसेट बेहद महंगी थीं। वास्तव में टी-सीरीज की स्थापना के साथ ही इसके संस्थापक गुलशन कुमार ने संगीत के कारोबार का एक बहुत बड़ा एम्पायर खड़ा कर दिया। गुलशन कुमार ने अनेक फिल्में भी बनाईं। यद्यपि गुलशन कुमार अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और टी-सीरीज का सफर अब भी जारी है।
गुलशन कुमार की सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी संगीत कम्पनी है। इसकी भारतीय संगीत व्यापार में 35 फीसदी की हिस्सेदारी है। टी-सीरीज यूट्यूब पर 209 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर और 183 बिलियन व्यूज के साथ, मार्च 2022 तक सबसे अधिक देखे जाने वाले और सबसे अधिक सब्सक्राइब किए गए चैनल का मालिक है।
गुलशन कुमार के पिता चन्द्रभान की नई दिल्ली के दरियागंज मार्केट में फल और जूस की दुकान थी। गुलशन कुमार के जीवन का प्रारम्भिक समय यहीं बीता था। उन्होंने 23 वर्ष की उम्र में ही अपने परिवार को आर्थिक सहयोग देने के लिए रिकॉर्ड और आडियो कैसेट का व्यापार शुरू किया था। गुलशन कुमार ने हालांकि अपने कॅरियर की शुरुआत छोटे स्तर पर रिकार्ड्स और कैसेट के व्यापार से की थी, लेकिन कालांतर में इसी क्षेत्र में उन्होंने सफलता के नए आयाम स्थापित किए। समय के साथ उन्होंने कैसेट बनाना भी शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे उन्होंने “सुपर कैसेट इंडस्ट्रीज” के नाम से बिजनेस स्थापित कर लिया। वास्तव में उस समय प्रतिष्ठित कम्पनियों द्वारा खराब गुणवत्ता की ऑडियो टेप मार्केट में प्रचलित थी। गुलशन कुमार ने इस समस्या को कम करते हुए वर्ष-1970 में कम और सस्ती दर पर अच्छी क्वालिटी की कैसेट बेचना शुरू कर दिया।
गुलशन कुमार ने नोएडा में म्यूजिक प्रोडक्शन कम्पनी भी शुरू की और कुछ ही समय में उन्होंने कामयाबी की जो इबारत गढ़ी, उसकी मिसाल अन्यत्र दुर्लभ है। औद्योगिक नगरी नोएडा के कई सेक्टरों में उनकी कंपनियां स्थापित हो गईं। व्यापार के बढ़ने के साथ ही उन्होंने विदेशों में भी अच्छी क्वालिटी की कैसेट बेचना शुरू कर दिया। जल्द ही वो इससे मिलेनियर बन गए और म्यूजिक इंडस्ट्री के बिजनेस में बड़े कारोबारी के रूप में पहचाने जाने लगे। गुलशन कुमार एक अच्छे गायक भी थे। उन्होंने सैंकड़ों भक्ति गीत गाए हैं। उनमें कुछ भोजपुरी गीत भी शामिल हैं। सोनू निगम के अलावा अनुराधा पोडवाल, वन्दना बाजपेयी और कुमार शानू जैसे गायक गायिकाओं को भी गुलशन कुमार ने ही मौका दिया था।
गुलशन कुमार फिल्म मीडिया की बड़ी हस्ती होने के बावजूद काफी सामाजिक, मिलनसार और जमीन से जुड़े व्यक्ति थे। वह माता वैष्णो देवी में भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन करते रहते थे। वर्ष-1992-93 में वह सबसे ज्यादा टैक्स भरने वाले व्यक्ति थे। गुलशन कुमार की लोकप्रियता के कारण उनके तमाम दुश्मन भी पैदा हो गए। कहा जाता है कि उन्होंने अंडरवर्ल्ड की मांगों को मानने से इंकार कर दिया था, इसलिए उनकी हत्या हो गई। उन्हें 5 अगस्त 1997 से ही डॉन अबू सलेम से धमकियां मिलने लगी थीं, लेकिन इसे वो नजरअंदाज करते रहे। आखिर, 12 अगस्त 1997 की वो मनहूस घड़ी भी आई, जिस दिन वो जब मुंबई के अंधेरी स्थित शिव मन्दिर गए तो मन्दिर के पास छुपे दो राक्षसों ने उन पर गोली चला दी। उन्हें तीन गोलियां लगीं। वो पास ही एक झोपडी में मदद मांगने के लिए गए, लेकिन वहां खड़ी महिला कुछ समझ पाती, उससे पहले ही हत्यारों ने उन 15 गोलियां और चला दीं, जिससे अस्पताल ले जाते हुए उनकी मृत्यु हो गई। और आज की तारीख को एक महान शख्सियत को हमसे छीन लिया।
गुलशन कुमार से फिल्म जगत के साथ ही समाज को भी बहुत उम्मीदें थीं, क्योंकि वह बिजनेसमैन के तौर पर एक आदर्श स्थापित कर रहे थे। उस समय जब हर कोई अंडरवर्ल्ड के खौफ में किसी भी सही-गलत काम के लिए तैयार था, तब गुलशन कुमार ने बिना डरे अपना काम किया, जिसके कारण उन्हें अपनी जान तक गंवानी पड़ी। लेकिन, वो अपने पीछे टी-सीरीज के रूप में अमूल्य धरोहर छोड़ गए, जो आज तक बिजनेस के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। स्वर्गीय गुलशन कुमार के होनहार सुपुत्र भूषण कुमार आज देश ही नहीं, दुनियाभर में म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज कर रहे हैं। भूषण ने अपने पिता के सपनों को न केवल जीया है, बल्कि उन सपनों में नित नए रंग भरने का काम भी यह युवा फिल्मकार कर रहा है। गुलशन कुमार की बेटी तुलसी कुमार और खुशहाली कुमार अपने भाई भूषण कुमार के कंधे से कंधा मिलाकर अपने स्वर्गीय पिता के सपनों को साकार करने में लगी हुई हैं। तीनों ही बच्चों का मत है कि वे जो भी कर पा रहे हैं, वह सब कुछ उनके पिता की प्रेरणा से ही हो रहा है। गुलशन कुमार के दामाद हितेश रल्हन भी इस अभियान में परिवार के सहयोग में लगे रहते हैं। एक ओर बहुत महत्वपूर्ण नाम यहां लेना आवश्यक है। किसी समय बैंक के बड़े अधिकारी वेद चानना टी-सीरीज की तमाम गतिविधियों का संचालन करने का जिम्मा संभाले हुए हैं। श्री चानना साफ कहते हैं कि गुलशन जी शारीरिक रूप से आज हमारे साथ हों या न हों, किन्तु आलोकिक रूप से वे हर समय साथ रहते हैं।