
यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की बहुचर्चित कड़ी ‘वॉर 2’ रिलीज हो चुकी है। लेकिन शुरुआती रिस्पॉन्स देखकर साफ है कि दर्शकों को इसमें कुछ अधूरा सा लग रहा है। पहली फिल्म ‘वॉर’ (2019) ने बॉक्स ऑफिस और दर्शकों—दोनों को हिला दिया था। मगर सीक्वल उस जोश और सरप्राइज़ फैक्टर को पकड़ पाने में नाकाम नजर आ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर टाइगर श्रॉफ जैसे स्टार, जो सुपरस्टारडम के चरम पर तो नहीं हैं, फिर भी ‘वॉर 2’ में उनकी कमी इतनी खल क्यों रही है ? War 2 Movie
टाइगर श्रॉफ की असली ताकत उनकी परफेक्ट एक्शन पर्सनालिटी है। मसल्स से तराशा शरीर, मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग, जिमनास्टिक की फुर्ती और स्टेज तोड़ डांस—ये कॉम्बिनेशन उन्हें भीड़ से अलग करता है। उनके पास एक "बेबी फेस" मासूमियत है, जो हार्डकोर एक्शन इमेज के साथ मिलकर यंग ऑडियंस को खासतौर पर अपील करता है। ‘हीरोपंती’ और ‘बागी’ ने उनकी इस पहचान को मजबूत किया, लेकिन ‘वॉर’ ने पहली बार उन्हें वो प्लेटफॉर्म दिया जहाँ उनकी स्किल्स ऋतिक रोशन जैसे स्टार के सामने बराबरी पर खड़ी हो गईं।
फिल्म में टाइगर (खालिद) और ऋतिक (कबीर) गुरु-शिष्य से दुश्मन बने थे। कहानी की डिमांड ही यही थी कि टाइगर को ऋतिक के सामने पूरी तरह टिकना होगा—और उन्होंने यह काम शानदार तरीके से किया। कई सीन्स में उनकी फुर्ती और कॉम्बैट स्किल्स ऋतिक पर भारी पड़ती दिखीं। यही कारण था कि ‘वॉर’ के क्लाइमेक्स तक दर्शक टाइगर के किरदार से इमोशनली जुड़ गए।
लेकिन फिल्म ने खालिद को खत्म कर दिया—और यही शायद यशराज की सबसे बड़ी चूक साबित हुई।
सीक्वल में ऋतिक के सामने जूनियर एनटीआर हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा के बड़े सितारे, जिनकी रॉ एनर्जी और मास इमेज ने ‘RRR’ जैसी फिल्मों में दर्शकों को बांधे रखा। लेकिन स्पाई-थ्रिलर जैसी स्टाइलिश फ्रेंचाइज़ी में उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस उतनी स्वाभाविक नहीं लगती। उनका व्यक्तित्व पावरफुल है, मगर इस जॉनर के "सूटेड-बूटेड एजेंट" स्टाइल से मेल नहीं खाता। समस्या ये भी है कि राइटिंग ने एनटीआर को वही काम करने पर मजबूर किया जो पहले टाइगर कर चुके थे—यानी ऋतिक के साथ ब्रोमांस, फिर मुकाबला, और हाई-ऑक्टेन एक्शन। नतीजा ये हुआ कि रघु का किरदार ‘खालिद पार्ट-2’ लगने लगा, जबकि दर्शकों के दिमाग में अब भी टाइगर का खालिद जिंदा है।
टाइगर की सबसे बड़ी खासियत ये रही कि उनके साथ असली लोकेशंस पर, कम से कम VFX के सहारे एक्शन फिल्माया जा सकता है। उनकी फुर्ती और मार्शल आर्ट स्किल्स स्क्रीन पर एक्शन को ऑर्गेनिक बना देती हैं। यही फर्क दर्शक पहचानते हैं। ‘वॉर 2’ में भले ही बड़े पैमाने पर विजुअल्स और VFX हों, लेकिन कॉम्बैट एक्शन में वही असली धार नहीं दिखती, जो टाइगर की मौजूदगी से अपने आप स्क्रीन पर आ जाती थी।
पहली ही फिल्म में टाइगर के किरदार को खत्म कर देना, स्पाई यूनिवर्स की रणनीतिक गलती साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर रिएक्शन्स बता रहे हैं कि दर्शक अब भी “खालिद की कमी” महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि ‘वॉर 2’ की शुरुआती कमाई भी पहली फिल्म की तुलना में कमजोर लग रही है। War 2 Movie