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अधिकमास को हिंदू पंचांग में भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मिलता है। ऐसे में अधिकमास में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि भक्तों के लिए एक दुर्लभ और शुभ अवसर लेकर आती है।

हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है लेकिन जब मासिक शिवरात्रि अधिकमास में आती है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास की मासिक शिवरात्रि तीन साल में केवल एक बार आती है इसलिए इस दिन की पूजा और व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है।
अधिकमास को हिंदू पंचांग में भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मिलता है। ऐसे में अधिकमास में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि भक्तों के लिए एक दुर्लभ और शुभ अवसर लेकर आती है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
मासिक शिवरात्रि पर निशिता काल में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। यह वह समय होता है जब भगवान शिव की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। इस वर्ष अधिकमास की मासिक शिवरात्रि पर निशिता काल रात 12 बजे से शुरू होकर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शिव भक्त भगवान भोलेनाथ का अभिषेक, मंत्र जाप और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
अधिकमास की मासिक शिवरात्रि पर सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिनभर भगवान शिव का ध्यान करते हुए शाम और रात्रि में विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के समय शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और पंचामृत अर्पित किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद फूल चढ़ाए जाते हैं। शिव जी को चंदन अर्पित कर दीपक जलाया जाता है और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप किया जाता है। भगवान शिव की पूजा के साथ माता पार्वती की आराधना करना भी शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि शिव और शक्ति दोनों की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास की मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं। भगवान शिव की कृपा से मानसिक शांति, आर्थिक उन्नति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो लोग विवाह, संतान, करियर या स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं उनके लिए भी यह दिन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन (14 जून) शुभ समय में व्रत का पारण कर सकते हैं। पारण से पहले भगवान शिव का स्मरण कर पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत पूर्ण किया जाता है। अधिकमास की यह दुर्लभ शिवरात्रि भगवान शिव की कृपा पाने का विशेष अवसर मानी जाती है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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