दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर और खतरनाक भारतीय वायुसेना आज अपना 89 वां स्थापना दिवस मना रही है। नीला, आसमानी नीला और सफेद रंगों को अपनाने वाली भारतीय वायु सेना का ध्येय वाक्य है - 'नभ: स्पृशं दीपतम'।श्रीमदभगवद्गीता के ग्यारहवें अध्याय के श्लोक के इस अंश-वाक्य का अर्थ है- 'गर्व के साथ आकाश छूना'। भारतीय वायुसेना ने अपनी स्थापना से आज तक हमेशा अपने ध्येय वाक्य के अनुरूप स्वयं को सिद्ध किया है।
इंडियन एयर फोर्स की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स के सहायक के तौर पर हुई थी। अप्रैल 1933 को भारतीय वायुसेना की पहली स्क्वाड्रन तैयार हुई। इसकी नफरी में छह प्रशिक्षित अफसर और 19 वायु सैनिक थे। वर्ष 1945 में इंडियन एयर फोर्स के आगे रॉयल शब्द जोड़ा गया। 1950 में रॉयल शब्द हटा भी लिया गया। यहीं से रॉयल एयरफोर्स भारतीय वायु सेना हुई और इसे नई पहचान मिली।
आज भारतीय वायु सेना विश्व की सबसे दुर्जेय वायुसेना में से एक है। इंडियन एयर फोर्स अमेरिका, रूस और चीन के बाद विश्व की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना है। विभिन्न युद्धकालीन और शांति कालीन अभियानों में भारतीय वायु सेना ने अपना कौशल, अपनी क्षमता और अपनी शक्ति को साबित किया है। कभी केवल 5 लोगों के साथ शुरू हुई भारतीय वायुसेना का सफर आज लाखों अफसरों और जवानों तक पहुंच चुका है। 2020 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारतीय वायुसेना की ताकत में 1,41,606 थी जिसमें लगभग 12,159 अधिकारी और 1,29,447 एयरमैन शामिल हैं।
भारतीय वायु सेना अभी तक कई ऑपरेशनों को अंजाम दे चुकी है। वायुसेना चार युद्धों में कार्यवाई कर चुकी है। जिसमें तीन पाकिस्तान एवं एक चीन के खिलाफ लड़े गए हैं और इसमें भारतीय वायुसेना को सफलता मिली है। इसके साथ ही वायुसेना ऑपरेशन विजय- द एनेक्शेसन ऑफ गोवा, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन पूमलाई, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक समेत कई ऑपरेशनों को अंजाम दे चुकी है। वहीं संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कार्यों में भी भारतीय वायुसेना सहयोग दे चुकी है।
भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुके राफेल के कारण भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा हुआ है और इसके लेकर भारत के दुश्मन देश पाकिस्तान और चीन डरे हुए हैं। क्योंकि राफेल 4.5वीं पीढ़ी का विमान है, जो रडार से भी बच निकलने की क्षमता रखता है। अभी तक भारतीय वायुसेना के पास मिराज-2000 और सुखोई-30 एमकेआई विमान ही थे, जो तीसरी या चौथी पीढ़ी के विमान हैं। वहीं राफेल को आज दुनिया का सबसे ताकतवर विमान माना जाता है और इसकी अधिकतम स्पीड 2,130 किमी प्रति घंटा है। वहीं राफेल की मारक क्षमता 3700 किमी है और ये 24,500 किलो उठाकर ले जाने में सक्षम है।
नारी शक्ति भी वायुसेना की शक्ति बनकर उभरी है। भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों की संख्या गत वर्ष तक 1875 हो गई थी, इनमें से 10 महिला अधिकारी फाइटर पायलट हैं, जबकि 18 महिला अधिकारी नेविगेटर हैं। जून 2016 में पहली बार 3 महिला लड़ाकू विमान चालकों भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े में शामिल किया गया था। उत्तर प्रदेश के वाराणसी की रहने वाली शिवांगी सिंह राफेल विमान की पहली महिला पायलट बनी हैं।