Aniruddha Vinayaka Chaturthi 2026: आज अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी पर रवि योग का संयोग बन रहा है। जानें गणपति पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और वर्जित चंद्र दर्शन का समय।

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का देवता माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। आज आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन भगवान गणेश के अनिरुद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणपति के इस स्वरूप की आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। इस बार अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी पर रवि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है जिसके कारण इस दिन गणेश पूजा का महत्व और बढ़ गया है
विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा दोपहर यानी मध्याह्न काल में करना विशेष शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी समय भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था इसलिए इस दौरान पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। पंचांग के अनुसार, आज अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा का शुभ समय सुबह 11 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। भक्तों को पूजा के लिए कुल 2 घंटे 45 मिनट का शुभ समय मिलेगा। इस शुभ समय में भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।
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ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार रवि योग को शुभ योगों में शामिल किया जाता है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है। अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी के दिन रवि योग बनने से गणपति आराधना का महत्व और अधिक बढ़ गया है। मान्यता है कि भगवान गणेश के अनिरुद्ध स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं और नए कार्यों में सफलता मिलने के रास्ते खुलते हैं।
अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। गणपति जी को दूर्वा घास, लाल फूल, सिंदूर, अक्षत, चंदन और मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश का ध्यान करें और "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान गणेश चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। अंत में भगवान गणेश की आरती कर उनसे जीवन की परेशानियों को दूर करने और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगें।
विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को लेकर विशेष मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा को देखने से बचना चाहिए। पंचांग के अनुसार, आज अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी पर चंद्र दर्शन का वर्जित समय सुबह 8 बजकर 37 मिनट से रात 9 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भक्तों को इस समय चंद्रमा देखने से बचने की सलाह दी जाती है।
अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी के मौके पर देशभर में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जा रही है। भक्त उपवास रखकर गणपति की आराधना कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख-शांति, सफलता और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश सभी विघ्नों को दूर करने वाले देवता हैं। ऐसे में शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा करने से विशेष लाभ मिलने की मान्यता है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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