Ashadha Gupt Navratri 2026: धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में सच्चे मन से मां की आराधना करने से जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं और साधक को मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ आज से हो गया है। सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है लेकिन गुप्त नवरात्रि का महत्व सामान्य नवरात्रि से थोड़ा अलग होता है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं वहीं आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से शक्ति साधना, तंत्र-मंत्र और मां आदिशक्ति की विशेष उपासना के लिए जानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में सच्चे मन से मां की आराधना करने से जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं और साधक को मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
द्रिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर शुरू हुई थी और इसका समापन 15 जुलाई की सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर आज (15 जुलाई) से गुप्त नवरात्रि का पहला व्रत रखा जा रहा है। इसी दिन से नौ दिनों तक मां दुर्गा की विशेष पूजा और साधना का क्रम शुरू हो जाता है।
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार पूरे वर्ष में चार बार नवरात्रि आती है। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं जबकि माघ और आषाढ़ की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इन दिनों में मां आदिशक्ति की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि में किए गए जप, तप और पूजा का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दौरान श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। कई साधक इन नौ दिनों में दस महाविद्याओं की उपासना भी करते हैं, जिसे शक्ति साधना का महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान मां आदिशक्ति के कई दिव्य स्वरूपों की आराधना की जाती है। विशेष रूप से दस महाविद्याओं की साधना का महत्व बताया गया है। श्रद्धालु और साधक मां काली, मां तारा, मां त्रिपुरसुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां भैरवी, मां छिन्नमस्ता, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इन देवी स्वरूपों की उपासना से साधक को विशेष आध्यात्मिक शक्ति और सफलता प्राप्त होती है।
गुप्त नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। जिस प्रकार शारदीय और चैत्र नवरात्रि में विधि-विधान से कलश स्थापना की जाती है उसी तरह आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में भी घटस्थापना का विशेष महत्व माना गया है। द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 33 मिनट से सुबह 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में ही कलश स्थापना करनी चाहिए। अमावस्या तिथि और रात्रि के समय घटस्थापना करना शुभ नहीं माना जाता।
धार्मिक मान्यता के अनुसार घटस्थापना केवल एक पूजा की शुरुआत नहीं बल्कि मां आदिशक्ति का आह्वान माना जाता है। कलश को सुख-समृद्धि, शक्ति और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए शास्त्रों में बताया गया है कि घटस्थापना हमेशा शुभ समय में और पूरे विधि-विधान के साथ करनी चाहिए ताकि देवी की कृपा प्राप्त हो सके।
घटस्थापना के समय पूजा की सभी सामग्री पहले से तैयार रखना शुभ माना जाता है। इसके लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है-
गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा करते समय मन, वचन और कर्म की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुबह स्नान के बाद मां दुर्गा की पूजा करें, दीपक जलाएं, दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करें और पूरे नौ दिनों तक सात्विक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करें। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ की गई पूजा से मां आदिशक्ति अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
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