
Assembly Election 2022 : सहारनपुर। राजनीति में समय कभी भी एक समान नहीं रहता है। (Assembly Election 2022) कभी पश्चिम उत्तर उत्तर प्रदेश की राजनीति की धुरी रहा काजी रसीद मसूद (Qazi Rashid Masood) का परिवार का सियासी भविष्य संशय के बादलों से घिरा हुआ है। एक बार तो मुलायम सिंह (Mulayam Singh) की डूबती नैया काजी परिवार ने ही किनारे लगाई थी।
बताया जाता है कि सपा के संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंंत्री मुलायम सिंह यादव पर जब राजनीतिक संकट आया था तो काजी परिवार ने ही सिफारिश करके उन्हें एमएलसी बनवाया था। काजी रशीद मसूद और मुलायम सिंह यादव ने करीब करीब एक समय में ही राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। दोनों ने लंबे समय तक एक साथ ही लोकदल में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के साथ काम किया। उस समय चौधरी चरण सिंह के सबसे करीबी नेता काजी रशीद मसूद ही थे और उनकी सलाह से ही चौधरी साहब फैसले लेते थे। लंबे समय तक काजी रशीद मसूद के साथ रहे और राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाले ईश्वर गोयल बताते हैं कि वर्ष 1980 के दौर में मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक सफर मझधार में फंस गया था। लगातार तीन बार विधायक रहने के बावजूद मुलायम सिंह 1980 के विधानसभा चुनाव में इटावा से हार गए थे। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य चर्चाएं होने लगीं थीं। लेकिन, उस समय काजी रशीद मसूद ने मुलायम सिंह के पक्ष में पैरवी की थी। जिसके बाद चौधरी चरण सिंह ने 1982 में मुलायम सिंह को एमएलसी बनाकर विधान परिषद में भेजा था, जिसके बाद वह नेता विधान परिषद में नेता विपक्ष भी बनाए थे।
काजी रशीद मसूद और मुलायम सिंह के बीच संबंध काफी गहरे थे। कई बार राहें जुदा हुई, परंतु दोनों नेताओं के व्यक्तिगत रिश्तें हमेशा मधुर बने रहे। अगस्त 2007 में जब उप राष्ट्रपति का चुनाव हुआ तो संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की तरफ से मुलायम सिंह ने काजी रशीद मसूद को उप राष्ट्रपति का चुनाव लड़ाया था, हालांकि 75 वोट मिलने के कारण काजी रशीद मसूद तीसरे स्थान पर रहे थे और उप राष्ट्रपति नहीं बन सके थे।
बदलते समय में आज मुलायम सिंह यादव और काजी रशीद मसूद परिवार के बीच पहले की तरह सबकुछ ठीक चल रहा है। हाल ही में कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुए काजी रशीद मसूद के भतीजे और पूर्व विधायक इमरान मसूद को टिकट मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन इमरान मसूद को सपा से टिकट नहीं मिल सका। जिससे अभी भी काजी परिवार मझधार में फंसा हुआ है। राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि अखिलेश यादव ने इमरान मसूद को भरोसा दिलाया है कि उनके लिए सपा में कुछ अधिक बेहतर सोचा गया है।