चाणक्य की इन बातों को घोलकर पी लें, आपके कदमों में झुकेगा जमाना

Chanakya Niti: यह लेख चाणक्य की नीतियों पर आधारित है जिसमें बताया गया है कि जीवन में सच्चा सम्मान कैसे कमाया जा सकता है। पैसा और पद पाना आसान हो सकता है लेकिन समाज में इज्जत पाने के लिए मजबूत चरित्र, सही व्यवहार और स्पष्ट सोच की जरूरत होती है।

Chanakya Niti
जीवन में सम्मान कैसे पाएं?
locationभारत
userअसमीना
calendar26 Feb 2026 02:57 AM
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आज के समय में हर कोई पैसा, पद और शोहरत पाना चाहता है लेकिन एक चीज है जो इन सब से ऊपर है और वो है आपका सम्मान। पैसा मेहनत से मिल सकता है, सफलता भी हासिल की जा सकती है लेकिन सच्ची इज्जत कमानी पड़ती है। यह किसी दुकान में नहीं मिलती और न ही किसी की सिफारिश से मिलती है। आचार्य चाणक्य का मानना था कि इंसान की असली पहचान उसके चरित्र और व्यवहार से होती है। अगर व्यक्ति के पास सब कुछ हो लेकिन लोग उसे दिल से सम्मान न दें तो उसकी सफलता अधूरी है। इज्जत बाहर से नहीं आती यह हमारे सोचने के तरीके, बोलचाल और कर्मों से बनती है। आइए जानते हैं ऐसी 5 आदतें जिन्हें सुधारकर कोई भी व्यक्ति समाज में अपनी एक अलग पहचान बना सकता है।

खुद की इज्जत करना सीखें

अगर आप खुद को ही कम समझते रहेंगे तो दुनिया भी आपको उसी नजर से देखेगी। जो व्यक्ति हर समय खुद पर शक करता है या अपनी कीमत नहीं समझता उसे लोग गंभीरता से नहीं लेते। अपने समय की कद्र कीजिए, अपनी मेहनत को महत्व दीजिए और अपने फैसलों पर भरोसा रखिए। जब आप खुद को सम्मान देंगे तभी लोग भी आपको महत्व देंगे।

अपनी बात से न फिरें

इंसान की असली पहचान उसके शब्दों से होती है। जो लोग बार-बार वादा करके मुकर जाते हैं उनकी साख धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। जहां भरोसा नहीं होता वहां सम्मान भी नहीं टिकता। इसलिए उतना ही वादा करें जितना निभा सकें। कम बोलिए लेकिन जो बोलिए उसे पूरा कीजिए। आपकी विश्वसनीयता ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।

जरूरत से ज्यादा अच्छा बनना छोड़ दें

हर बात पर हां कहना और सिर्फ लोगों को खुश करने के लिए अपनी राय दबा देना समझदारी नहीं है। इससे लोग आपको हल्के में लेने लगते हैं। विनम्र रहना अच्छी बात है लेकिन आत्मसम्मान उससे भी ज्यादा जरूरी है। अपनी बात साफ और शांति से रखें। जो व्यक्ति अपनी सीमाएं तय करना जानता है वही लंबे समय तक सम्मान पाता है।

सही और गलत के बीच का फर्क समझें

गलत रास्ते से मिली सफलता ज्यादा दिन नहीं टिकती। झूठ और चालाकी से कुछ समय के लिए फायदा हो सकता है, लेकिन सच्चाई देर-सवेर सामने आ ही जाती है। ईमानदारी और साफ नीयत ही इंसान को असली सम्मान दिलाती है। जो व्यक्ति सही रास्ता चुनता है भले ही देर से आगे बढ़े लेकिन उसका सम्मान हमेशा बना रहता है।

गुस्से पर काबू रखना सबसे जरूरी

एक पल का गुस्सा सालों की कमाई इज्जत को खत्म कर सकता है। गुस्से में कही गई बातें अक्सर रिश्तों को कमजोर कर देती हैं। धैर्य और संयम ही व्यक्ति की असली ताकत है। जो इंसान मुश्किल समय में भी खुद को संभाल लेता है वही सच में सम्मान के लायक होता है। शांत स्वभाव और संतुलित व्यवहार लोगों के दिल में जगह बनाते हैं।

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साल में दो बार कब आएगा माह-ए-रमज़ान? हर मुसलमान को होना चाहिए मालूम

रमज़ान मुस्लिम समुदाय के लिए आत्मसंयम और इबादत का महीना माना जाता है। आमतौर पर रमज़ान हर साल एक बार आता है लेकिन एक साल ऐसा भी होगा जब रमज़ान का पाक महीना दो बार आएगा। चलिए जानते हैं वो कौन सा साल होगा जब रमज़ान दो बार आएगा।

Ramadan 2030
रमजान दो बार कब आएगा
locationभारत
userअसमीना
calendar23 Feb 2026 03:14 PM
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रमज़ान मुस्लिम समुदाय के लिए आत्मसंयम, इबादत और दया का महीना माना जाता है। इस दौरान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखा जाता है और लोग अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने का प्रयास करते हैं। आम तौर पर रमज़ान हर साल एक बार आता है लेकिन कुछ खास सालों में ऐसा संयोग बनता है कि रमज़ान का पाक महीना एक ही साल में दो बार आता है।

रमज़ान क्यों हर साल पहले आता है?

इस्लामी कैलेंडर चंद्र कैलेंडर पर आधारित होता है। इसमें महीनों की अवधि 29 या 30 दिन होती है जिससे इस्लामिक साल कुल 354 दिनों का होता है। वहीं ग्रेगोरियन कैलेंडर, जिसका इस्तेमाल सामान्यत: होता है, सौर कैलेंडर पर आधारित है और इसमें 365 दिन होते हैं। इस अंतर के कारण रमज़ान हर साल लगभग 10-12 दिन पहले शुरू होता है। यही वजह है कि कुछ सालों में रमज़ान साल में दो बार पड़ सकता है।

साल 2030 में दो बार आएगा रमज़ान

साल 2030 में पहला रमज़ान 05 जनवरी से शुरू होगा। इसके बाद चंद्र कैलेंडर के हिसाब से दूसरा रमज़ान 26 दिसंबर 2030 से शुरू होगा। इस तरह 2030 में रमज़ान का पाक महीना दो बार मनाया जाएगा। यह घटना बहुत ही खास है और इसे इस्लामी कैलेंडर की विशेषता माना जाता है।

पहले भी दो बार आ चुका है रमज़ान

इस साल से पहले 1997 में भी रमज़ान दो बार आया था। उस साल पहला रमज़ान 10 जनवरी से शुरू हुआ और दूसरा 31 दिसंबर से। इससे पहले साल 1965 में भी ऐसा हुआ था। ये घटनाएं इस्लामी कैलेंडर की लचीली और चंद्र आधारित प्रकृति की वजह से संभव हुई हैं।रमज़ान केवल रोज़ा रखने का महीना नहीं है। यह महीने लोगों को अपने अंदर संयम, दया और आध्यात्मिक शुद्धि का अनुभव कराता है। मुस्लिम समुदाय इस समय पैगंबर मुहम्मद पर अवतरित कुरान की पहली आयतों को याद करता है। दो बार रमज़ान आने से भी लोगों के लिए यह महीना और भी खास बन जाता है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी इस्लामिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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Holashtak में क्या करें और क्या बिल्कुल न करें? यहां है सारी जानकारी

Holashtak: होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो रहा है और 03 मार्च तक रहेगा। यह आठ दिनों की अशुभ अवधि मानी जाती है जब मांगलिक कार्यों का शुभ फल नहीं मिलता। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे कार्य वर्जित हैं।

Holashtak
होलाष्टक 2026
locationभारत
userअसमीना
calendar23 Feb 2026 11:50 AM
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सनातन धर्म में होलाष्टक का अपना खास महत्व है। यह वह अवधि है जिसे अशुभ माना जाता है लेकिन इसके बावजूद धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इसे गंभीरता से देखा जाता है। होलाष्टक के आठ दिन उस समय को दर्शाते हैं जब असुर राज हिरण्यकश्यप अपने पुत्र और भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को कष्ट पहुंचा रहे थे। इस अवधि में मांगलिक कार्यों का शुभ फल नहीं मिलता इसलिए धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार इन दिनों सावधानी बरतनी चाहिए।

होलाष्टक की तिथि और अवधि

इस साल होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से हो रही है। यह अवधि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर होलिका दहन के दिन 03 मार्च, 2026 तक चलेगी। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय बुरी शक्तियां और ग्रह उग्र अवस्था में रहते हैं जिससे शुभ कार्यों का परिणाम प्रभावित हो सकता है।

होलाष्टक में क्या करें?

होलाष्टक के आठ दिनों में विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। इस दौरान किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण कार्य हैं-

दान-दक्षिणा: जरूरतमंदों को दान दें और द्रव्य या वस्तुएं दान करें।

पूजा-पाठ: भगवान विष्णु और शिव जी की नियमित पूजा करें।

मंत्र जप और पाठ: ऋण मोचन स्त्रोत, विष्णु सहस्त्रनाम, हनुमान चालीसा और श्रीसूक्त का नियमित पाठ करें।

पितरों की पूजा: पितरों का तर्पण और स्मरण करें।

ग्रह शांति: यज्ञ या विशेष पूजा करवाकर ग्रहों की शांति का उपाय करें।

धार्मिक यात्रा: यदि संभव हो तो मथुरा और वृंदावन की परिक्रमा करें।

इन कार्यों से मानसिक शांति मिलती है और इस अशुभ अवधि का आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त होता है।

होलाष्टक में क्या न करें?

होलाष्टक के दिनों में कुछ कार्यों से पूरी तरह बचना चाहिए ताकि नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके। इनमें प्रमुख हैं-

शादी-विवाह: इस अवधि में विवाह या अन्य मांगलिक संस्कार न करें।

भवन और संपत्ति खरीदना: भूमि, भवन या वाहन आदि की खरीदारी न करें।

नवविवाहित महिलाओं का ससुराल रहना: होलाष्टक में नवविवाहित महिलाएं ससुराल में न रहें।

संस्कार और धार्मिक अनुष्ठान: सनातन धर्म में बताए गए 16 मुख्य संस्कारों में से किसी भी संस्कार को इस समय न करें।

इन प्रतिबंधों का पालन करने से अशुभ प्रभाव से बचा जा सकता है और होलाष्टक का समय सुरक्षित और शांति पूर्ण बीतता है।

होलाष्टक का आध्यात्मिक महत्व

होलाष्टक केवल अशुभता का प्रतीक नहीं है। इसे ध्यान, पूजा और धर्म कर्म की ओर ध्यान केंद्रित करने का अवसर माना जाता है। इस समय की गंभीरता को समझकर धार्मिक कृत्य करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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