LNG, CNG और LPG… जानिए किसका इस्तेमाल कहां और कैसे होता है?
यह कच्चे तेल की रिफाइनरी या प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का बाय-प्रोडक्ट होती है। इसे दबाव में तरल बनाकर सिलेंडरों में भरा जाता है इसलिए छोटे सिलेंडरों में भी काफी गैस स्टोर हो सकती है।

हम अक्सर सुनते हैं, “एलपीजी, सीएनजी, पीएनजी और एलएनजी।” सब गैसें ही हैं लेकिन इनका इस्तेमाल जगह और जरूरत के हिसाब से अलग होता है। घरों में खाना पकाने से लेकर वाहनों और बड़े उद्योगों तक हर गैस का अपना महत्व और तरीका है। आइए समझते हैं कि ये गैसें क्या हैं, कैसे बनती हैं और कहां इस्तेमाल होती हैं।
एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas)
एलपीजी यानी Liquefied Petroleum Gas मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है। यह कच्चे तेल की रिफाइनरी या प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का बाय-प्रोडक्ट होती है। इसे दबाव में तरल बनाकर सिलेंडरों में भरा जाता है इसलिए छोटे सिलेंडरों में भी काफी गैस स्टोर हो सकती है। एलपीजी सबसे ज्यादा घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होती है क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध, सस्ती और जल्दी जलने वाली गैस है। हालांकि यह हवा से भारी होती है इसलिए लीक होने पर जमीन पर जमा हो सकती है और सावधानी बरतना जरूरी होता है।
सीएनजी (Compressed Natural Gas)
सीएनजी यानी Compressed Natural Gas मुख्य रूप से मीथेन (CH4) गैस होती है। इसे बहुत ज्यादा दबाव में सिलेंडरों में भरा जाता है और यह तरल नहीं होती बल्कि गैस ही रहती है। सीएनजी का इस्तेमाल ज्यादातर वाहनों में होता है जैसे-ऑटो, टैक्सी, बस और कारें। यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है क्योंकि यह कम धुआं छोड़ती है और इंजन को कम नुकसान पहुंचाती है। हालांकि, सीएनजी टैंक भारी होते हैं इसलिए लंबी दूरी की गाड़ियों में इसका इस्तेमाल कम होता है।
पीएनजी (Piped Natural Gas)
पीएनजी यानी Piped Natural Gas भी मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है। सीएनजी की तरह यह गैस ही रहती है लेकिन इसे घरों और रेस्तरां तक सीधे पाइपलाइन के जरिए पहुंचाया जाता है। पीएनजी के लिए सिलेंडर की जरूरत नहीं होती बस मीटर और बिल आते हैं। यह हवा से हल्की होने के कारण लीक होने पर ऊपर उड़ जाती है इसलिए ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है। बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में पीएनजी काफी आम है और घरेलू कुकिंग के लिए यह सबसे सुविधाजनक विकल्प है।
एलएनजी (Liquefied Natural Gas)
एलएनजी यानी Liquefied Natural Gas भी मीथेन गैस होती है लेकिन इसे बहुत कम तापमान (-162°C) पर ठंडा करके तरल बनाया जाता है। इस प्रक्रिया से इसका आयतन 600 गुना कम हो जाता है जिससे इसे बड़े क्रायोजेनिक टैंकरों में जहाजों से भेजा जा सकता है। भारत में एलएनजी को बंदरगाहों पर गैस में बदलकर पाइपलाइन या ट्रकों से बड़े उद्योगों, बिजली प्लांट्स और लंबी दूरी के ट्रक तक पहुंचाया जाता है। घरों या छोटी गाड़ियों में इसका इस्तेमाल मुश्किल और महंगा है।
गैसों के मुख्य अंतर
इन गैसों में सबसे बड़ा फर्क उनके संरचना, स्टोरेज और इस्तेमाल में है। एलपीजी प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है जबकि सीएनजी, पीएनजी और एलएनजी मुख्य रूप से मीथेन होती हैं। एलपीजी और एलएनजी तरल रूप में स्टोर होती हैं सीएनजी गैस के रूप में दबाव से और पीएनजी पाइप से सीधे घरों तक आती है। घरों में खाना पकाने के लिए एलपीजी और पीएनजी इस्तेमाल होती हैं, वाहनों में सीएनजी और बड़े उद्योगों में एलएनजी। मीथेन गैस वाली सीएनजी, पीएनजी और एलएनजी पर्यावरण के लिए बेहतर हैं क्योंकि यह कम प्रदूषण करती हैं।
हम अक्सर सुनते हैं, “एलपीजी, सीएनजी, पीएनजी और एलएनजी।” सब गैसें ही हैं लेकिन इनका इस्तेमाल जगह और जरूरत के हिसाब से अलग होता है। घरों में खाना पकाने से लेकर वाहनों और बड़े उद्योगों तक हर गैस का अपना महत्व और तरीका है। आइए समझते हैं कि ये गैसें क्या हैं, कैसे बनती हैं और कहां इस्तेमाल होती हैं।
एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas)
एलपीजी यानी Liquefied Petroleum Gas मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है। यह कच्चे तेल की रिफाइनरी या प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का बाय-प्रोडक्ट होती है। इसे दबाव में तरल बनाकर सिलेंडरों में भरा जाता है इसलिए छोटे सिलेंडरों में भी काफी गैस स्टोर हो सकती है। एलपीजी सबसे ज्यादा घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होती है क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध, सस्ती और जल्दी जलने वाली गैस है। हालांकि यह हवा से भारी होती है इसलिए लीक होने पर जमीन पर जमा हो सकती है और सावधानी बरतना जरूरी होता है।
सीएनजी (Compressed Natural Gas)
सीएनजी यानी Compressed Natural Gas मुख्य रूप से मीथेन (CH4) गैस होती है। इसे बहुत ज्यादा दबाव में सिलेंडरों में भरा जाता है और यह तरल नहीं होती बल्कि गैस ही रहती है। सीएनजी का इस्तेमाल ज्यादातर वाहनों में होता है जैसे-ऑटो, टैक्सी, बस और कारें। यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है क्योंकि यह कम धुआं छोड़ती है और इंजन को कम नुकसान पहुंचाती है। हालांकि, सीएनजी टैंक भारी होते हैं इसलिए लंबी दूरी की गाड़ियों में इसका इस्तेमाल कम होता है।
पीएनजी (Piped Natural Gas)
पीएनजी यानी Piped Natural Gas भी मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है। सीएनजी की तरह यह गैस ही रहती है लेकिन इसे घरों और रेस्तरां तक सीधे पाइपलाइन के जरिए पहुंचाया जाता है। पीएनजी के लिए सिलेंडर की जरूरत नहीं होती बस मीटर और बिल आते हैं। यह हवा से हल्की होने के कारण लीक होने पर ऊपर उड़ जाती है इसलिए ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है। बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में पीएनजी काफी आम है और घरेलू कुकिंग के लिए यह सबसे सुविधाजनक विकल्प है।
एलएनजी (Liquefied Natural Gas)
एलएनजी यानी Liquefied Natural Gas भी मीथेन गैस होती है लेकिन इसे बहुत कम तापमान (-162°C) पर ठंडा करके तरल बनाया जाता है। इस प्रक्रिया से इसका आयतन 600 गुना कम हो जाता है जिससे इसे बड़े क्रायोजेनिक टैंकरों में जहाजों से भेजा जा सकता है। भारत में एलएनजी को बंदरगाहों पर गैस में बदलकर पाइपलाइन या ट्रकों से बड़े उद्योगों, बिजली प्लांट्स और लंबी दूरी के ट्रक तक पहुंचाया जाता है। घरों या छोटी गाड़ियों में इसका इस्तेमाल मुश्किल और महंगा है।
गैसों के मुख्य अंतर
इन गैसों में सबसे बड़ा फर्क उनके संरचना, स्टोरेज और इस्तेमाल में है। एलपीजी प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है जबकि सीएनजी, पीएनजी और एलएनजी मुख्य रूप से मीथेन होती हैं। एलपीजी और एलएनजी तरल रूप में स्टोर होती हैं सीएनजी गैस के रूप में दबाव से और पीएनजी पाइप से सीधे घरों तक आती है। घरों में खाना पकाने के लिए एलपीजी और पीएनजी इस्तेमाल होती हैं, वाहनों में सीएनजी और बड़े उद्योगों में एलएनजी। मीथेन गैस वाली सीएनजी, पीएनजी और एलएनजी पर्यावरण के लिए बेहतर हैं क्योंकि यह कम प्रदूषण करती हैं।

































