'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत भारत कितना साफ हुआ, यह जानने की जिज्ञासा प्रत्येक जागरूक और सफाई पसंद भारतीय को रहती है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत बहुत काम हुआ है, लेकिन अभी बहुत कम होना बाकी है। ...और बाकी सब कामों से ज्यादा जरूरी है नागरिकों में जागरूकता लाना। होर्डिंग, पोस्टर, अखबारी विज्ञापनों से लोगों में जागरूकता का भाव तो आता है, लेकिन यह भाव जब तक आदत में शामिल ना हो जाए तब तक सुधार की संभावना कम ही रहती है।
स्वच्छ भारत अभियान में काम भी हुआ, काम का प्रचार भी हुआ और इसी के साथ भ्रष्टाचार भी हुआ। उदाहरण के तौर पर पूरे देश से इस तरह की लाखों शिकायतें आईं कि गांव-गांव शौचालय बनवाने में खूब भ्रष्टाचार हुआ। खाली गड्ढे खोदकर उन्हें पूर्ण शौचालय के खाते में चढ़ा दिया गया। कुछ झूठ सरकारी स्तर पर भी परोसा गया, जिन ग्रामों को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया, उनमें से या तो हर घर में शौचालय बने ही नहीं थे या फिर शौचालय बने थे तो तमाम ग्रामीण उनका इस्तेमाल ही नहीं कर रहे थे।
आम आदमी जब अपने आसपास बजबजाते सीवर, सड़कों पर उतरा भरे हुए नालों के बदबूदार पानी, यहां वहां सड़कों के किनारे गलियों और सर्विस लेन में पड़ा कूड़ा करकट, पान और गुटखा थूकते लोग देखता है तो उसे लगता नहीं है कि स्वच्छता अभियान चल भी रहा है या नहीं। सार्वजनिक शौचालयों में आदमी नाक बंद करके भी भयंकर बदबू महसूस करता है और जब सरकार बताती है कि शौचालयों की रोजाना सफाई होती है तो कोई मुक्तभोगी यकीन कैसे कर सकता है।
इस अभियान में कोई कमी नहीं है। सरकार की अभियान के प्रति गंभीरता को लेकर भी कोई प्रश्न नहीं है। फिर कमी कहां है, यह खोज और जांच का विषय है। अभियान जारी है और अधिकारी काम करने के साथ आंकड़ों से भी सफाई का काम कर रहे हैं। लोग सफाई के बारे में बातें करते हैं और सभी को साफ सुथरी जगह पर रहना पसंद होता है। लोगों को उन कुछ देशों के बारे में बताकर जागरूकता लाई जा सकती है जो दुनिया में सबसे ज्यादा साफ माने जाते हैं।
आइसलैंड दुनिया का सबसे ज्यादा साफ देश है यहां वायु प्रदूषण न के बराबर है। आइसलैंड के बाद स्वीडन का नंबर आता है। जहां हरियाली बढ़ाकर पर्यावरण को साफ किया गया है। स्विट्जरलैंड सबसे साफ सुथरे देशों में तीसरे नंबर पर है। नार्वे इस लिस्ट में चौथे नंबर पर जरूर है लेकिन यह दुनिया का इकलौता देश है जिसमें वनों की कटाई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है और जिसने 2025 तक पेट्रोल डीजल कारों पर पूरी तरह पाबंदी का लक्ष्य बनाया हुआ है। इसके बाद मॉरिशस आता है, यह पर्यावरण की रक्षा को लेकर बेहद समर्पित है। छठे पायदान पर कोस्टारिका है। सातवें नंबर पर फ्रांस का नाम आता है। यहां के लोग साफ सफाई के प्रति बेहद जागरूक हैं और पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। इस लिस्ट में ऑस्ट्रिया आठवें स्थान पर है। क्यूबा का नाम नौवें नंबर पर होना यह जाहिर करता है कि सफाई और पर्यावरण के संरक्षण के लिए विकसित अर्थव्यवस्था कतई अनिवार्य नहीं है।
सरकारी तंत्र की भ्रष्टाचार मुक्त इच्छाशक्ति और हर भारतीय की सफाई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता व गंभीरता भारत को दुनिया के स्वच्छतम देशों की लिस्ट में ला सकती है, इसमें संदेह का कोई कारण नहीं है।