वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मानें तो कुछ प्रजातियों का शरीर मरने के बाद भी घंटों तक रिफ्लेक्स एक्शन (स्वचालित प्रतिक्रिया) करता है। इसका मतलब है कि यदि आप मरे हुए सांप को छूते हैं या उसके मुंह के पास हाथ रखते हैं तो वह अचानक जबड़े बंद कर सकता है और जहर छोड़ सकता है।

सांपों को लेकर लोगों के मन में डर और भ्रांतियां हमेशा से रही हैं। अक्सर लोग किसी सांप को देखते ही मारने की कोशिश करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ सांप मरने के बाद भी इंसानों को डस सकते हैं? वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मानें तो कुछ प्रजातियों का शरीर मरने के बाद भी घंटों तक रिफ्लेक्स एक्शन (स्वचालित प्रतिक्रिया) करता है। इसका मतलब है कि यदि आप मरे हुए सांप को छूते हैं या उसके मुंह के पास हाथ रखते हैं तो वह अचानक जबड़े बंद कर सकता है और जहर छोड़ सकता है।
सांप का तंत्रिका तंत्र इंसानों से अलग होता है। मरने के तुरंत बाद भी उसके शरीर के अंग पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होते। कुछ तंत्रिकाएं सक्रिय रहती हैं और बाहरी उत्तेजना पर प्रतिक्रिया देती हैं। यही कारण है कि मर चुके सांप का भी जबड़ा अचानक बंद हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी स्थिति में चाहे सांप मरा हो या जीवित उसे नग्न हाथों से न छुआ जाए।
भारत में सबसे प्रसिद्ध जहरीला सांप। खतरा महसूस होने पर यह फन फैलाता है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार असम में मरे हुए नाग के काटने से व्यक्ति को छह दिन अस्पताल में रहना पड़ा।
महाराष्ट्र और ग्रामीण इलाकों में बहुतायत में पाया जाने वाला जहरीला सांप। इसका जहर खून को जमाने की क्षमता रखता है इसलिए डसने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया में पाई जाने वाली यह प्रजाति दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में शामिल है। मरने के बाद भी इसके शरीर में प्रतिक्रिया करने की क्षमता होती है।
महाराष्ट्र में चार प्रमुख जहरीले सांप पाए जाते हैं जिन्हें बिग फोर कहा जाता है। इनमें नाग (Cobra), घोंस (Russell’s Viper), मन्यार (Common Krait), फुर्से (Saw-scaled Viper) शामिल हैं। ये सभी सांप मरने के बाद भी कुछ घंटों तक प्रतिक्रिया कर सकते हैं इसलिए इनके संपर्क में आने से बचना बहुत जरूरी है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। चाहे सांप जहरीला हो या सामान्य, तुरंत स्थानीय सर्प मित्र (Snake Catcher) या वन विभाग को सूचित करें। यदि सांप मरा हुआ भी हो तो उसे नग्न हाथों से न छुएं। भारत में पाए जाने वाले अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते। ये पर्यावरण का हिस्सा हैं और चूहों जैसी कीटों की आबादी नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि सांप सिर्फ खतरे का प्रतीक नहीं बल्कि प्रकृति के संतुलन के लिए भी आवश्यक हैं।