मृत्यु के बाद आत्मा की पहली रात को लेकर गरुड़ पुराण में कई धार्मिक मान्यताएं मिलती हैं। जानिए आत्मा की यात्रा और इससे जुड़ी जीवन की अनमोल सीख।

Garuda Purana : मृत्यु... यह शब्द सुनते ही मन के भीतर एक अजीब-सी खामोशी उतर आती है। किसी अपने की मृत्यु का दुख ऐसा होता है, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त कर पाना शायद संभव नहीं। जिस व्यक्ति के साथ हमने वर्षों बिताए हों, जिसकी आवाज घर की पहचान बन गई हो, जिसके साथ सुख-दुख साझा किए हों, उसके अचानक चले जाने के बाद घर में केवल एक व्यक्ति कम नहीं होता, बल्कि मानो पूरा संसार ही बदल जाता है। माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बहन, बेटा-बेटी या कोई बेहद करीबी अपना जब इस दुनिया से विदा होता है तो पीछे रह जाने वाले लोगों के लिए उस खालीपन को स्वीकार करना बेहद कठिन होता है। घर में वही कमरे होते हैं, वही सामान होता है, वही तस्वीरें होती हैं, लेकिन वह इंसान नहीं होता जिसकी मौजूदगी से सब कुछ जीवंत लगता था। गरुड़ पुराण की धार्मिक मान्यताओं में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसी संदर्भ में आत्मा की मृत्यु के बाद की स्थिति को लेकर कई ऐसी बातें कही गई हैं, जो इंसान को जीवन और रिश्तों के बारे में गहराई से सोचने के लिए मजबूर करती हैं। Garuda Purana
गरुड़ पुराण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा शरीर से अलग हो जाती है। जिस शरीर को इंसान पूरी जिंदगी अपना समझता रहा, मृत्यु के बाद वही शरीर उससे अलग हो जाता है। कल्पना कीजिए उस दृश्य की... एक व्यक्ति ने अभी-अभी आखिरी सांस ली है। परिवार को समझ नहीं आ रहा कि वह चला गया है। कोई उसके पैरों से लिपटकर रो रहा है, कोई उसके चेहरे को आखिरी बार छू रहा है, कोई उसे पुकार रहा है और कोई यह मानने को तैयार ही नहीं कि अब वह कभी जवाब नहीं देगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार आत्मा इस पूरी स्थिति को देखती है, लेकिन वह चाहकर भी अपने प्रियजनों को जवाब नहीं दे पाती।
यही विचार इस पूरे प्रसंग को बेहद भावुक बना देता है।
मृत्यु का सबसे मार्मिक पक्ष यही है कि इंसान के जाने के बाद उसके अपने लोग उसके बेहद करीब होते हैं, लेकिन वह व्यक्ति उनके बीच होकर भी उनके साथ नहीं होता। जिस हाथ को जिंदगी भर पकड़कर चलाया, वही हाथ अब सामने है, लेकिन पकड़ने वाला नहीं है। जिस आवाज को सुनने के लिए कभी इंतजार किया, वह आवाज हमेशा के लिए शांत हो चुकी है। जिस चेहरे को देखकर घर में खुशी आती थी, वह चेहरा सामने है, लेकिन उसमें जीवन की हलचल नहीं है। गरुड़ पुराण की मान्यताओं से जुड़े वर्णनों में मृत्यु के बाद आत्मा के अपने शरीर और परिवार को देखने की बात कही जाती है। हालांकि यह धार्मिक आस्था का विषय है और इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। लेकिन इस मान्यता में छिपी जीवन की सीख बेहद महत्वपूर्ण है।
मृत्यु इंसान को यह याद दिलाती है कि इस संसार में कुछ भी हमेशा के लिए नहीं है। धन रहेगा या नहीं, संपत्ति किसके पास जाएगी, कौन कितना सफल होगा— न सबका अंतिम निर्णय समय करता है। लेकिन जीवन के अंतिम पड़ाव पर इंसान को अक्सर अपने रिश्ते और अपने लोग ही सबसे अधिक याद आते हैं। इसलिए जब अपने लोग हमारे पास हैं, तब उनकी कद्र करना ही सबसे बड़ी समझदारी है। किसी पिता को अपने बेटे से बात करने के लिए कल का इंतजार नहीं करना चाहिए। किसी मां को अपने बच्चे से प्रेम जताने के लिए किसी खास दिन की जरूरत नहीं होनी चाहिए। पति-पत्नी को छोटी-छोटी बातों पर वर्षों तक नाराज रहने के बजाय एक-दूसरे की मौजूदगी की कीमत समझनी चाहिए। भाई-बहनों को संपत्ति और विवादों से ऊपर अपने रिश्ते को रखना चाहिए। क्योंकि समय बीत जाने के बाद सबसे बड़ा पछतावा अक्सर यही होता है कि काश उस दिन थोड़ा और बात कर ली होती... काश आखिरी बार गले लगा लिया होता... काश नाराजगी खत्म कर दी होती।
जब किसी परिवार में किसी अपने की मृत्यु होती है तो बाहर से देखने वाला व्यक्ति केवल अंतिम संस्कार देखता है। लेकिन परिवार के लोग उसके बाद शुरू होने वाली एक लंबी भावनात्मक यात्रा से गुजरते हैं। पहले घर में लोगों की भीड़ होती है। फिर धीरे-धीरे लोग वापस चले जाते हैं। कुछ दिनों बाद घर फिर शांत हो जाता है। लेकिन उस परिवार के लिए वह व्यक्ति हर जगह मौजूद रहता है। उसकी कुर्सी देखकर याद आती है। उसका कमरा देखकर याद आती है। उसकी पसंद का खाना देखकर याद आती है। फोन में उसका नंबर देखकर आंखें भर आती हैं। किसी पुराने संदेश, तस्वीर या आवाज की रिकॉर्डिंग से अचानक पूरा अतीत सामने आ जाता है। यही कारण है कि किसी प्रियजन की मृत्यु का दुख केवल अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं होता। कई बार असली खालीपन तब महसूस होता है जब दुनिया सामान्य हो जाती है, लेकिन परिवार के भीतर सब कुछ बदल चुका होता है।
मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं में अलग-अलग वर्णन मिलते हैं। गरुड़ पुराण भी मृत्यु, कर्म, आत्मा और उसके आगे की यात्रा को लेकर विस्तृत धार्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इन बातों को आस्था और आध्यात्मिक चिंतन के रूप में समझना चाहिए। लेकिन इन मान्यताओं का सबसे सुंदर संदेश यह है कि जीवन रहते हुए रिश्तों की कद्र की जाए। क्योंकि मृत्यु के बाद न कोई बहस बचती है, न नाराजगी का अर्थ रह जाता है और न ही अहंकार का। बचती हैं तो सिर्फ यादें।
हम अक्सर सोचते हैं कि अभी बहुत समय है। मां-बाप से बाद में बात कर लेंगे। भाई से बाद में मिल लेंगे। दोस्त से फिर कभी मिलेंगे। किसी नाराज व्यक्ति को बाद में मना लेंगे। लेकिन जिंदगी किसी को यह गारंटी नहीं देती कि वह "बाद में" जरूर आएगा। इसलिए अगर कोई अपना आपके पास है तो उसकी मौजूदगी को सामान्य मत समझिए। उससे बात कीजिए। उसका हाल पूछिए। गलती हुई है तो माफी मांगिए। किसी से नाराज हैं तो बातचीत कीजिए। और सबसे जरूरी—अपने लोगों से प्रेम जताइए। क्योंकि कई बार जिंदगी में सबसे भारी शब्द होते हैं— "काश..." काश एक बार और बात कर ली होती। काश आखिरी बार गले लगा लिया होता। काश नाराजगी खत्म कर दी होती। काश कह दिया होता—"मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।"
मृत्यु जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। इससे कोई बच नहीं सकता। लेकिन मृत्यु की चर्चा का उद्देश्य केवल भय पैदा करना नहीं होना चाहिए। बल्कि मृत्यु हमें यह याद दिलाती है कि हमारे पास जो समय है, वह बेहद मूल्यवान है। आज हमारे माता-पिता हमारे साथ हैं तो यह सौभाग्य है। आज हमारे बच्चे हमारे पास हैं तो यह सौभाग्य है। आज जीवनसाथी हमारे साथ है तो यह सौभाग्य है। आज भाई-बहन, दोस्त और परिवार हमारे साथ हैं तो यह भी किसी वरदान से कम नहीं। गरुड़ पुराण की आत्मा और मृत्यु से जुड़ी मान्यताओं को चाहे कोई आस्था के रूप में देखे या आध्यात्मिक संदेश के रूप में, उनसे निकलने वाली एक बात बेहद मानवीय है—जब तक सांस है, तब तक प्रेम कीजिए; जब तक अपने साथ हैं, तब तक उनकी कद्र कीजिए। क्योंकि मृत्यु के बाद हम चाहे आत्मा की यात्रा को जिस भी रूप में समझें, एक बात निश्चित है—बीता हुआ समय वापस नहीं आता। इसलिए आज ही अपनों से कह दीजिए—
"तुम मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हो।" शायद यही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। Garuda Purana
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