पुण्यतिथि : कम लोग जानते हैं 'दलित वीरांगना' ऊदा देवी की कहानी!
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 01:21 AM
विनय संकोची
ये कहानी है उस महान दलित वीरांगना ऊदा देवी की जिन्होंने 1857 की क्रांति में अंग्रेजी सेना के छक्के छुड़ा दिए थे और अंग्रेजों से लोहा लेते हुए आज ही के दिन शहीद हो गई थीं। महारानी लक्ष्मी बाई, बेगम हज़रत महल जैसी वीरांगनाओं के नाम से तमाम लोग परिचित हैं। लेकिन शायद ही कोई इस ‘दलित वीरांगना’ ऊदा देवी के बारे में जानता हो जिसने लखनऊ के सिकंदर बाग में ब्रिटिश सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया था और अकेले ही 30 अंग्रेज सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।
ऊदा देवी ‘पासी’ जाति से सम्बन्ध रखती थीं और लखनऊ में जन्मी थीं। उनके पति का नाम मक्का पासी था और शादी के बाद ससुराल में ऊदा का नाम ‘जगरानी’ रख दिया गया था।
लखनऊ के छठे नवाब वाजिद अली शाह ने बड़ी मात्रा में अपनी सेना में सैनिकों की भर्ती की, जिसमें लखनऊ के निम्न वर्गों के लोगों को भी नौकरी पाने का अच्छा अवसर मिला। ऊदादेवी के पति मक्का पासी जो साहसी व पराक्रमी थे, इनकी सेना में भर्ती हो गए। पति को शाह के दस्ते में शामिल होता देख ऊदा देवी को भी प्रेरणा मिली और वह वाजिद अली शाह के महिला दस्ते में भर्ती हो गईं।
16 नवम्बर 1857 को सार्जेंट काल्विन कैम्बेल की अगुवाई में ब्रिटिश सेना ने लखनऊ के सिकंदर बाग में ठहरे हुए भारतीय सैनिकों पर हमला बोल दिया। ऐसे में पुरुषों की वेश-भूषा धारण किये हुए ऊदा देवी और उनकी महिला बटालियन ने ब्रिटिश सेना को सिकन्दर बाग के द्वार पर ही रोक दिया।
लड़ाई के समय ऊदा देवी अपने साथ एक बंदूक और कुछ गोला-बारूद लेकर एक पीपल के पेड़ पर चढ़ गयी थीं। उन्होंने दो दर्जन से भी ज्यादा ब्रिटिश सैनिकों को मार गिराया। इसे देख अंग्रेजी अधिकारी तैश में आ गये। उन्हें समझ नहीं आया कि उनके सैनिकों को कौन मार रहा है। तभी एक अंग्रेजी सैनिक ने पीपल के पेड़ के पत्तों के झुरमुट में छिपे एक बाग़ी को देखा जो ताबड़तोड़ गोली बरसा रहा था।
ब्रिटिश सैनिकों ने भी उसी पेड़ पर निशाना साधा और गलियाँ चलायी। गोली लगते ही ऊदा देवी पेड़ से नीचे गिर पड़ीं। उसके बाद जब ब्रिटिश अफसरों ने जब बाग़ में प्रवेश किया, तो उन्हें पता चला कि पुरुष की वेश-भूषा में वह भारतीय सैनिक कोई और नहीं बल्कि एक महिला थी। ऊदा देवी की वीरता से अभिभूत होकर काल्विन कैम्बेल ने हैट उतारकर शहीद ऊदा देवी को श्रद्धांजलि दी थी।
महान दलित वीरांगना ऊदा देवी की एक मूर्ति सिकन्दर बाग़ परिसर में स्थापित की गयी है, जहां आज भी हर साल ऊदा देवी की पुण्यतिथि पर ‘पासी’ जाति के लोग एकत्रित होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।