Sanskrit : ते न इन्द्रः पृथिवी क्षाम वर्धन्पूषा भगो अदितिः पञ्च जनाः।
सुशर्माणः स्ववसः सुनीथा भवन्तु नः सुत्रात्रासः सुगोपाः॥ ऋग्वेद ६-५१-११॥
Hindi : प्रभु, पृथ्वी, अग्नि, वायु, माता, पोषण करने वाला और पांच प्राणवायु हमारे रक्षण और वर्धन करने वाले हो। (ऋग्वेद ६-५१-११)
English : May God, the earth, Agni, air, mother, nurturer, and five vital airs protect and develop us. (Rig Veda 6-51-11)