Sanskrit : पृष्टो दिवि धाय्यग्निः पृथिव्यां नेता सिन्धूनां वृषभ स्तियानाम्।
स मानुषीरभि विशो वि भाति वैश्वानरो वावृधानो वरेण॥ ऋग्वेद ७-५-२प्प॥
Hindi : दिव्य अग्नि पृथ्वी और आकाश दोनों में व्याप्त है। यह ही वर्षा कराती है और जल से भरी नदियों को चलाती है। यह हम सभी में व्याप्त है और हमें उत्तम कर्म करने के लिए प्रेरित करती है। (ऋग्वेद ७-५-२)
English : Divine fire pervades both the earth and the sky. It is that which brings rain and runs rivers full of water. It pervades all of us and inspires us to do good deeds. (Rig Veda 7-5-2)