अंजना भागी
बिश्नोई मेरे पति, उनकी सब आदतें अच्छी थीं। पर हाथ छोड़ बहुत थे। हर चौथे दिन खाने के बाद थाली में हाथ धो थाली मेरे मुंह पर दे मारते, शक्ल गधी सी है, पर रोटी तो अच्छी खिला दिया कर। मेरे हर यत्न के बाद भी आएदिन दो चार चांटे मंुह पर छप ही जाते। मुझे भी आदत सी हो चली थी। दिल्ली एनसीआर यानि भागदौड़ वाला शहर है। बिश्नोई बिलकुल अनपढ़, मैं 10वीं फेल। रेहड़ी लगाते थे बिश्नोई, रेहड़ी अपनी थी, उनकी हर गलती के लिए मैं ही जिम्मेदार थी। मीनू मेरी बेटी छठी कक्षा में आ गई थी। बहुत दुखी होती मेरी पिटाई होने पर। एक दिन बिश्नोई रात जब घर आये तो मेरे पूरे खानदान को नालायक कह कोस रहे थे। क्या करती, बेटी का भला या तो बाप करता है या उनके न रहने पर भाई। पति को पत्नी की कीमत ज्यादातर बुढ़ापा आने पर ही समझ आती है। मेरी बस ये ही समझ में आया कि कल मुझे बिश्नोई कहीं ले जाना चाहते हैं, क्योंकि मैं तो जन्मजात गधी हूं, इसलिए वे दुखी हैं। अतः बेटी को साथ ले जाने की सोच रहे हैं। मैं जितनी खुश थी, उतनी ही सहमी हुई भी। चलने से पहले मेरे सारे पूर्वजों को जमकर कोसा, साथ ही ताकीद की, जिन जिन दुकानों पर ले जाऊं, हमें आएदिन वहीं जाना होगा, उन्हीं दुकानों पर सामान खरीदने। पैसे खोये या कुछ गलती हुई तो खाल छील दी जाएगी। दोनों सहमी मां-बेटियां कस के हाथ पकड़े तेज रफ्तार से बिश्नोई के पीछे चल रही थीं।
क्या बताऊं दिल का हाल, हम दिल्ली देख रहे थे या दुकानें, बिश्नोई ने पूरी दोपहर रेहड़ी के लिए सामान खरीदा। हमें ताकीदें की। शाम घर लौटे हमने रेहड़ी सजाई। बिश्नोई देर से रेहड़ी लेकर सामान बेचने गए, रात नशा कर आए, क्योंकि वे बहुत थक गये थे। तब उन्होंने बताया कि जिस एसी बस में हम सब बैठकर गये थे, उसमें महिलाएं फ्री थीं। यकीन मानिए मैं सारी रात ही तारों में उड़ती रही तथा एक एक गली, सड़क पक्की करती रही, क्योंकि मुझे सब समझ में आ गया था कि अब मैं भी अपने व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हूं। हम मां-बेटी मजे से मार्केट जाती हैं, अब खरीदारी में तीन लोगों की सलाह चलती है। रेहड़ी भी पहले से अच्छी चलती है। हम मार्केट में कभी कभी चाट-पकौड़ी का जुगाड़ भी जमा लेते हैं। मैं अब गधों के खानदान से भी नहीं हूं। बिश्नोई कभी कभी क्रोध तो करते हैं, पर अपने उठने वाले हाथ को जबरदस्ती कंट्रोल भी कर लेते हैं, क्योंकि अब मैं खाली खाने और खाद बनाने वाली गधइया नहीं हूं। उनके व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा हूं। अब आप ही बताइये, इससे आगे मैं क्या कहूं। अब हूं न मैं सशक्त या मैं कोई झूठ बोलया।