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भारत के ज्यादातर घरों में तुलसी की पूजा की जाती है। भारतीय नागरिकों की पक्की मान्यता है कि तुलसी के पौधे में धन की देवी माँ लक्ष्मी का निवास है। इसी कारण तुलसी के पौधे की पूजा तथा अर्चना माँ लक्ष्मी की तरह से ही की जाती है।

Tulsi Plant : भारत के ज्यादातर घरों में तुलसी की पूजा की जाती है। भारतीय नागरिकों की पक्की मान्यता है कि तुलसी के पौधे में धन की देवी माँ लक्ष्मी का निवास है। इसी कारण तुलसी के पौधे की पूजा तथा अर्चना माँ लक्ष्मी की तरह से ही की जाती है। भारत के ज्यादातर घरों के आँगन में तुलसी का पौधा जरूर लगाया जाता है। आमतौर पर देखा जाता है कि तुलसी का पौधा पर्याप्त गति से नहीं बढ़ता है। अनेक बार तुलसी का पौधा बीमार भी हो जाता है। Tulsi Plant
भारतीय घरों के आंगन में लगी तुलसी केवल एक पौधा नहीं बल्कि आस्था, आयुर्वेद और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि उनकी तुलसी सूखने लगती है, पत्तियां पीली पड़ जाती हैं या फिर पौधे की ग्रोथ रुक जाती है। ऐसे में एक आसान घरेलू उपाय इन दिनों तेजी से चर्चा में है, जिसमें सिर्फ दही या छाछ से तैयार किया गया "सफेद घोल" तुलसी के पौधे को तेजी से बढ़ाने में मददगार बताया जा रहा है। गार्डनिंग एक्सपर्ट्स के अनुसार इस घोल को बनाने के लिए किसी महंगे खाद या केमिकल की जरूरत नहीं पड़ती। इसके लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच खट्टा दही या छाछ मिलाई जाती है। इस मिश्रण को अच्छी तरह घोलकर तुलसी के पौधे की मिट्टी में चारों ओर डाल दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि दही में मौजूद लैक्टिक एसिड और गुड बैक्टीरिया मिट्टी की गुणवत्ता सुधारते हैं। इससे मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है और पौधे की जड़ों को पोषण मिलता है, जिससे तुलसी की ग्रोथ तेजी से बढ़ सकती है। Tulsi Plant
माली बताते हैं कि केवल घोल डालने से ही काम नहीं चलता, बल्कि तुलसी की सही देखभाल भी जरूरी है। तुलसी में जब फूलों की मंजरी निकलने लगे तो उसे समय-समय पर काट देना चाहिए। ऐसा करने से पौधा बीज तैयार करने में ऊर्जा खर्च नहीं करता और नई पत्तियों व शाखाओं की वृद्धि तेजी से होती है। गार्डनिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि तुलसी की मिट्टी को समय-समय पर हल्का ढीला करते रहना चाहिए ताकि जड़ों तक ऑक्सीजन पहुंच सके। इसके साथ ही थोड़ी मात्रा में हल्दी पाउडर मिलाने से मिट्टी में फंगस और हानिकारक कीटाणुओं का खतरा कम हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक दही वाला घोल महीने में केवल एक या दो बार ही इस्तेमाल करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा उपयोग करने पर मिट्टी में नमी और एसिडिटी बढ़ सकती है, जिससे पौधे को नुकसान भी हो सकता है। Tulsi Plant
तुलसी के अच्छे विकास के लिए रोजाना 4 से 6 घंटे धूप बेहद जरूरी मानी जाती है। अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और संतुलित सिंचाई भी पौधे की सेहत के लिए आवश्यक है। अधिक पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं। तुलसी को भारत में धार्मिक और औषधीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आयुर्वेद में इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला पौधा बताया गया है। यही वजह है कि लगभग हर भारतीय घर में तुलसी का पौधा लगाया जाता है। गार्डनिंग विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक खाद की बजाय घरेलू और ऑर्गेनिक उपाय लंबे समय तक पौधों के लिए बेहतर साबित होते हैं। दही, चायपत्ती, दालचीनी, हल्दी और लकड़ी की राख जैसी चीजें पौधों की सेहत सुधारने में उपयोगी मानी जाती हैं। Tulsi Plant
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