गरीब कौन है? इस प्रश्न का उत्तर ज्यादातर लोगों की दृष्टि में यह है कि जिसके पास धन न हो वह गरीब होता है। लेकिन जिसके पास धन नहीं होता वह तो निर्धन होता है और निर्धन होने का अर्थ गरीब होना बिल्कुल नहीं है। गरीबी एक सोच है, जो दिमाग में पलती है और यह किसी धनवान के दिमाग में भी पल-बढ़ सकती है। बल्कि यों कहना चाहिए कि गरीबी ज्यादा धन वालों के दिमाग में ही पलती है। एक संपन्न महिला साड़ी के एक शोरूम पर गई, उसके बेटे की शादी थी। उसमें बढ़िया-बढ़िया महंगी साड़ियां पसंद करने के बाद, दुकानदार से कहा 'एक सस्ती सी साड़ी दे दो मेड (घर की नौकरानी) को देने के लिए शादी है, उसे देनी ही पड़ेगी नहीं तो मुंह बनाएगी।' दुकानदार ने संपन्न महिला को उसकी पसंद की साड़ियां पैक कीं और वह लंबी कार में बैठकर अपनी आलीशान कोठी पर आ गई।
दो दिन बाद उसी शोरूम पर उसी महिला की मेड आई और दुकानदार से बोली - 'भैया कोई अच्छी सी साड़ी दिखाओ, मालकिन के बेटे की शादी है, उसमें देना है। मेड ने एक अच्छी और अपनी हैसियत से काफी महंगी साड़ी ली और पैदल चलकर अपनी कोठरी में पहुंच गई।
गरीब कौन हुआ, फैसला आपका है।
एक कपल एक बड़े होटल में ठहरा। महिला की गोद में छोटा सा बच्चा था। वह भूखा था। महिला ने इंटरकॉम पर मैनेजर से बच्चे के लिए दूध की व्यवस्था करने को कहा, तो मैनेजर बोला - 'इसके लिए आपको अतिरिक्त पैसा देना होगा।' महिला ने 'ओके' कहा, तो बच्चे के लिए दूध आ गया। कपल होटल छोड़कर अपनी कार से घर के लिए निकले। हाईवे पर बच्चे को भूख लगी। वह रोने रोने लगा। मिस्टर ने एक ढाबा देखकर गाड़ी रोकी। मैडम ने ढाबे वाले से पूछा बच्चे के लिए दूध मिलेगा। ढाबे वाले ने 'हां' कहा और बोतल भर कर दूध दे दिया। मिस्टर ने पूछा - 'कितने पैसे?' ढाबे वाले ने कहा - 'हम गोद के बच्चों के दूध का पैसा नहीं लेते हैं, भगवान बुरा मानेगा।' ढाबे वाले ने ज़िद करके रास्ते के लिए भी दूध दे दिया - 'रास्ते में बबुआ को भूख लगी तो कहां ढूंढते फिरियेगा।'
गरीब कौन हुआ बड़े होटल वाला या रोड साइड ढाबे वाला। फैसला आप पर छोड़ा इन दोनों घटनाओं की तरह की असंख्य घटनाएं रोजाना हमारे इर्द गिर्द घटित होती हैं। अमीरों की गरीबी और निर्धनों की अमीरी ऐसी घटनाओं से साफ झलकती है।