FSSAI: आज के समय में कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट को बेहतर दिखाने के लिए तरह-तरह के दावे करती हैं। ऐसे में FSSAI की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि कंपनियों के ये दावे सही हैं या नहीं और कहीं उपभोक्ताओं को गुमराह तो नहीं किया जा रहा।

खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश में एक बड़ी संस्था काम करती है जिसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) कहा जाता है। यह भारत का फूड रेगुलेटर है जो यह तय करता है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य उत्पाद तय मानकों के अनुसार हों और कंपनियां ग्राहकों को गलत जानकारी देकर अपने उत्पाद न बेच सकें। आज के समय में कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट को बेहतर दिखाने के लिए तरह-तरह के दावे करती हैं। ऐसे में FSSAI की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि कंपनियों के ये दावे सही हैं या नहीं और कहीं उपभोक्ताओं को गुमराह तो नहीं किया जा रहा।
FSSAI का सबसे बड़ा काम देश में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और गुणवत्ता को बनाए रखना है। यह संस्था खाद्य उत्पादों के लिए नियम और मानक तय करती है जिनका पालन सभी फूड बिजनेस करने वालों के लिए जरूरी होता है। इसके अलावा FSSAI कंपनियों की ओर से किए जाने वाले विज्ञापनों और प्रोडक्ट लेबल पर लिखे दावों की भी निगरानी करता है। अगर कोई कंपनी अपने उत्पाद को लेकर ऐसा दावा करती है जो वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हो सकता या ग्राहकों को भ्रमित करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
FSSAI के नियमों के अनुसार कोई भी कंपनी अपने खाद्य उत्पाद की बिक्री बढ़ाने के लिए ऐसे दावे नहीं कर सकती जो गलत या भ्रामक हों। कंपनी को अपने हर दावे के लिए उचित और वैज्ञानिक प्रमाण देना जरूरी होता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई कंपनी किसी प्रोडक्ट को स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बताती है या उसमें किसी खास गुण का दावा करती है तो उसके पास इसे साबित करने के लिए वैज्ञानिक आधार होना चाहिए। बिना प्रमाण के किए गए दावे ग्राहकों को गलत जानकारी दे सकते हैं और ऐसे मामलों में FSSAI कार्रवाई कर सकता है।
फूड कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में सही जानकारी देनी होती है। किसी भी तरह का दावा ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे ग्राहक भ्रमित हो जाए। कंपनियां बिना ठोस प्रमाण के अपने उत्पाद को 100 प्रतिशत शुद्ध, 100 प्रतिशत प्राकृतिक या 100 प्रतिशत सुरक्षित जैसे शब्दों से प्रचारित नहीं कर सकतीं। इसी तरह किसी भी खाद्य पदार्थ को लेकर ऐसा दावा नहीं किया जा सकता जो वास्तविकता से अलग हो। इसके अलावा FSSAI की मंजूरी के बिना किसी उत्पाद पर 'जैविक भारत' (Jaivik Bharat) लोगो का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता।
FSSAI के नियमों के अनुसार कंपनियां अपने उत्पादों को लेकर वही जानकारी दे सकती हैं जिसे जांच के आधार पर साबित किया जा सके। उत्पाद की गुणवत्ता, पोषण या स्वास्थ्य संबंधी फायदे को लेकर किए गए दावे स्पष्ट और सही होने चाहिए। किसी भी कंपनी का दावा ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे ग्राहक को उत्पाद के बारे में गलत धारणा बने। अगर कोई दावा वैज्ञानिक जांच में सही साबित नहीं होता है तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
अगर कोई कंपनी खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करती है या ग्राहकों को गुमराह करने वाले दावे करती है तो FSSAI उसके खिलाफ कई स्तर पर कार्रवाई कर सकता है। ऐसे मामलों में सबसे पहले कंपनी को नोटिस जारी किया जा सकता है। इसके बाद गलत दावों को हटाने या उनमें बदलाव करने का निर्देश दिया जा सकता है। गंभीर मामलों में किसी उत्पाद की बिक्री पर रोक भी लगाई जा सकती है। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर मामला गंभीर हो तो कंपनी का फूड लाइसेंस निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है।
FSSAI के नियमों का सबसे बड़ा फायदा आम ग्राहकों को मिलता है। इन नियमों की वजह से कंपनियों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने और सही जानकारी देने के लिए मजबूर होना पड़ता है। जब कोई ग्राहक बाजार से कोई खाद्य उत्पाद खरीदता है तो वह उम्मीद करता है कि पैकेट पर लिखी जानकारी सही होगी और उत्पाद सुरक्षित होगा। इसी भरोसे को बनाए रखने के लिए FSSAI लगातार फूड कंपनियों पर नजर रखता है और नियमों का पालन सुनिश्चित करता है।
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