Good Health Tips : नीम :अगर चार नीम के पेड़ लगाओगे तो सीधे स्वर्ग जाओगे
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भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 01:53 PM
Good Health Tips : दिल्ली/नोएडा। मेरी दादी के समय में लड़कियों का विवाह 12 साल की उम्र तक हो ही जाता था। तब उनका पढ़ाई लिखाई से कोई वास्ता नहीं रहता था। दादी के पिताजी पूजा पाठी ज्ञानी पंडित थे। अपना मंदिर था। दादी की मां उनके जन्म के कुछ माह बाद ही गुजर गई थीं। जाते जाते पंडित पति से वादा भी ले गईं, पंडित जी मेरी बेटी को सौतली मां के हाथों नहीं रुलवाओगे। पंडित जी ने भी वादा निभाया। मेरी दादी को खुद पाला, अकेली बेटी को लाड़-प्यार से पालने का ये फल मिला कि दादी औसतन लड़कियों से बहुत ज्यादा लंबी हो गईं। अब वर कहां से पाते, तब बेटी को पढ़ना-लिखना सिखा दिया। इसी वजह से दादी दूर-दूर तक मशहूर हो गईं। चारों वेद पढ़ गईं, 14 उपनिषद। अब चर्चा ये होने लगा कि पंडित जी की बेटी जो कहती है, वो ही सत्यवचन। वर भी मिल गया। दादी का ये कहना था कि जो चार नीम के पेड़ लगाता है वो सीधा ही स्वर्ग को जाता है। गरीब देशों में तो लगभग 80 प्रतिशत लोग नीम को ही दवा के रुप में खाते हैं।
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मेरी अम्मा उनका बहुत सम्मान करती थीं। दादी ने ही घर के आंगन में नीम का एक पेड़ लगाया था। बाकी तीन पेड़ भी वो दायें बाएं लगा अपनी स्वर्ग की सीट पक्की कर आईं थीं। हमारा पूरा बचपन उसकी टहनियों पर खेलकर ही बीता। वे एक बहुत ही तर्कसंगत बात कहतीं, फिर स्वयं ही मुस्कुरातीं। हमारे देश में जो भी वस्तु सबसे अधिक कड़वी होती है, खासकर पेड़, वो ही सबसे ज्यादा लाभदायक होता है। जैसे नीम, करेला, गिलोय, ऐलोवेरा इत्यादि। मेरे बाऊजी ने तो मुझे नीम के सहारे ही पाला है।
इसका हर भाग गुणकारी है, इसलिए वो हमारे नीम के पेड़ का एक पत्ता भी व्यर्थ न गंवाती। आज मैं भी इस बात को दोहराती हूं कि वे बिल्कुल सही थीं। जब वो परलोक वासी हुईं तो 103 वर्ष की थीं। आंगन में झाड़ू तब भी वे ही लगातीं थीं। सुबह उठ पहला काम नीम की छोटी-छोटी टहनियां हम सबके हाथ में देतीं। हम सबको पता था कि ताजी कोपलें हमें खानी हैं। एक छोटी टहनी में पांच या सात ही होतीं। छोटी टहनी से हमें ब्रश करना है। बाकी बड़ी पत्तियां चूल्हे पर जो पानी चढ़ा होता, उसमें डालनी होतीं। साथ ही वे कहतीं, देखो ये पत्तियां तुम्हारा खून साफ कर देंगी। तुम बीमार तो अब पड़ोगी ही नहीं। ये सही भी था। आएदिन बच्चे स्कूल से बुखार इत्यादि के लिए छुट्टी करते, हम रोज साइकल चलाते पॉजिटीविटी से भरे स्कूल जाते। दिमाग में कूट-कूटकर भरा रहता, हमारा खून तो सुबह ही साफ हो गया। हमें तो अब कैंसर भी नहीं हो सकता। हरी पत्तियां यानि आयरन, कैल्सियम, मिनरल्स, वो भी खाली पेट एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर ये सभी चीजें इम्युनिटी बढ़ाती हैं। नीम की सॉफ्ट दातुन चबाते थे। बीच-बीच में थोड़ा रगड़ भी लेते, यानि दांत-मसूड़े सब मजबूत। आजकल यदि 2-3 साल का बच्चा भी ब्रश न करे तो उसके मुख से गंध आने लगती है। हमारे साथ ऐसी कोई भी दिक्कत नहीं थी। नीम की पत्तियां पेट की पाचन क्रिया को तो ठीक करती ही हैं, पेट में गैस, जलन, कब्ज कुछ भी नहीं। यानि अल्सर से भी बचाव। नीम पेट से टॉक्सिक चीजों को बाहर निकालकर पेट को भी पूरी तरह साफ कर देता है।
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ये भी सच है कि ये डायबिटिक लोगों के लिए भी बहुत अच्छा है, क्योंकि डायबटीज में खून में जो शुगर का लेवल बढ़ जाता है। इसका हाइपोग्लाइसेमिक ब्लड में बढ़ी शुगर को कंट्रोल करता है। यदि आपको चोट लगी है और घाव ठीक नहीं हो रहे तो आप नीम की कोपलें खाएं या पातियां उबालकर पीयें तो जख्म जल्दी सूख जाते हैं। खाना नहीं चाहते तो पत्तियां या छाल पीसकर चोट पर लगाएं तो जख्म जल्दी सूख जाते हैं। इसका एंटीबायोटिक गुण बहुत ही लाजवाब है। मेरी दादी एक मिनट में खरल में ताजी पत्ती पीस लेप बनाती, सिर दर्द हो या चोट, इलाज नीम की पत्ती और पीसी छाल ही थी। कोरोना हो, मलेरिया, डेंगू हो या चिकनगुनिया, खेल तो सब स्ट्रांग या वीक इम्युनिटी का ही होता है न। जब ये सब ही नहीं तो गुर्दे, लिवर भी मजबूत।
नीम के वृक्ष का हर भाग हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत करता है। इस कड़वे वृक्ष के विभिन्न भागों के सेवन से पेट, दांत, यहां तक कि सिर में पड़ने वाली जुएं भी पनाह मांगती हैं। दादी एक काम और करतीं, नीम के पत्तों के साथ बेरी के पत्ते पीसकर हम सारी बहनों के और अपने सिर में हर दसवें दिन लगातीं। असर आज तक दिखाई देता है। हमारे घने लंबे बाल हमारी उम्र का पता ही नहीं चलने देते। बची पत्तियां जो चूल्हे पर उबालती थीं, दादी की सख्त आज्ञा थी सिर धोने के बाद आखिरी डब्बा पानी शरीर पर इस नीम की पत्तियां उबले पानी का ही होना चाहिए। दादी आंगन बुहारती, जो भी पत्तियां कूड़े में इकठ्ठी होतीं, नीम की डंडियां वे सब चूल्हे में। यकीन मानिए मक्खी, मच्छर तो हमारे घर का रास्ता भी भूल गए थे। दादी अनुभव से कहती थीं, पर हम अपनी पढ़ाई लिखाई से जान गए हैं कि नीम में लिनोलेइक एसिड, ओलिक एसिड, स्टीयरिक एसिड होता है, जिससे बाल घने होते हैं, रूखे नहीं रहते। सिर में रूसी इत्यादि की समस्या का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। नीम में एंटी फंगल गुण होते हैं, जिसकी वजह से सूजन, खुजली सोरायसिस, एग्जिमा और जलन से भी राहत मिलती है। यकीन मानिए नीम का पेड़ हम सबसे इतनी दूर भी नहीं होता, कहीं भी पार्कों में सड़क किनारे लगे होते हैं। यदि नहीं है तो आप भी लगायें। यदि आपके घर के आसपास कोई नाला इत्यादि बहता है तो आप उसके किनारे-किनारे ही अवश्य लगाएं। खाद पानी पेड़ नाले से लेगा, शुद्ध वायु तथा इतनी सारी गुणकारी चीजें बदले में आपको देगा।
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जैसा मैं हमेशा कहती हूं कि बहुतायत तो हर चीज की बुराई होती है, इसलिए बहुत अधिक नीम की पत्तियां खाने से कभी-कभी मुंह का स्वाद भी चला जाता है। यदि आप व्रत कर रहे हैं तो बिल्कुल भी न खायें, क्योंकि नीम ब्लड में शुगर के लेवेल को कम करता है। गर्भवती तथा बच्चे को दूध पिलाने वाली महिलाएं ना खाएं। जो गर्भ धारण की कोशिश कर रही हैं वे तो बिल्कुल भी ना खाएं। यदि सिर धोते आंखों में नीम वाला पानी चला जाये तो ना पूछें। इसलिए सही प्रकार से सदुपयोग करें। नीम के पेड़ लगाएं तथा बच्चों को इसके फायदे बता बचपन से ही अच्छी आदतों से जोड़ें न कि नीम की गोली खा लेना से।
मैं अपने से बड़ों के अनुभव सुनती हूं, खुद आजमाती हूं, तभी सांझा करती हूं। आप भी पढ़ें, आजमाएं, फिर शेयर करें।