साल में दो बार कब आएगा माह-ए-रमज़ान? हर मुसलमान को होना चाहिए मालूम
रमज़ान मुस्लिम समुदाय के लिए आत्मसंयम और इबादत का महीना माना जाता है। आमतौर पर रमज़ान हर साल एक बार आता है लेकिन एक साल ऐसा भी होगा जब रमज़ान का पाक महीना दो बार आएगा। चलिए जानते हैं वो कौन सा साल होगा जब रमज़ान दो बार आएगा।

रमज़ान मुस्लिम समुदाय के लिए आत्मसंयम, इबादत और दया का महीना माना जाता है। इस दौरान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखा जाता है और लोग अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने का प्रयास करते हैं। आम तौर पर रमज़ान हर साल एक बार आता है लेकिन कुछ खास सालों में ऐसा संयोग बनता है कि रमज़ान का पाक महीना एक ही साल में दो बार आता है।
रमज़ान क्यों हर साल पहले आता है?
इस्लामी कैलेंडर चंद्र कैलेंडर पर आधारित होता है। इसमें महीनों की अवधि 29 या 30 दिन होती है जिससे इस्लामिक साल कुल 354 दिनों का होता है। वहीं ग्रेगोरियन कैलेंडर, जिसका इस्तेमाल सामान्यत: होता है, सौर कैलेंडर पर आधारित है और इसमें 365 दिन होते हैं। इस अंतर के कारण रमज़ान हर साल लगभग 10-12 दिन पहले शुरू होता है। यही वजह है कि कुछ सालों में रमज़ान साल में दो बार पड़ सकता है।
साल 2030 में दो बार आएगा रमज़ान
साल 2030 में पहला रमज़ान 05 जनवरी से शुरू होगा। इसके बाद चंद्र कैलेंडर के हिसाब से दूसरा रमज़ान 26 दिसंबर 2030 से शुरू होगा। इस तरह 2030 में रमज़ान का पाक महीना दो बार मनाया जाएगा। यह घटना बहुत ही खास है और इसे इस्लामी कैलेंडर की विशेषता माना जाता है।
पहले भी दो बार आ चुका है रमज़ान
इस साल से पहले 1997 में भी रमज़ान दो बार आया था। उस साल पहला रमज़ान 10 जनवरी से शुरू हुआ और दूसरा 31 दिसंबर से। इससे पहले साल 1965 में भी ऐसा हुआ था। ये घटनाएं इस्लामी कैलेंडर की लचीली और चंद्र आधारित प्रकृति की वजह से संभव हुई हैं।रमज़ान केवल रोज़ा रखने का महीना नहीं है। यह महीने लोगों को अपने अंदर संयम, दया और आध्यात्मिक शुद्धि का अनुभव कराता है। मुस्लिम समुदाय इस समय पैगंबर मुहम्मद पर अवतरित कुरान की पहली आयतों को याद करता है। दो बार रमज़ान आने से भी लोगों के लिए यह महीना और भी खास बन जाता है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी इस्लामिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।
रमज़ान मुस्लिम समुदाय के लिए आत्मसंयम, इबादत और दया का महीना माना जाता है। इस दौरान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखा जाता है और लोग अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने का प्रयास करते हैं। आम तौर पर रमज़ान हर साल एक बार आता है लेकिन कुछ खास सालों में ऐसा संयोग बनता है कि रमज़ान का पाक महीना एक ही साल में दो बार आता है।
रमज़ान क्यों हर साल पहले आता है?
इस्लामी कैलेंडर चंद्र कैलेंडर पर आधारित होता है। इसमें महीनों की अवधि 29 या 30 दिन होती है जिससे इस्लामिक साल कुल 354 दिनों का होता है। वहीं ग्रेगोरियन कैलेंडर, जिसका इस्तेमाल सामान्यत: होता है, सौर कैलेंडर पर आधारित है और इसमें 365 दिन होते हैं। इस अंतर के कारण रमज़ान हर साल लगभग 10-12 दिन पहले शुरू होता है। यही वजह है कि कुछ सालों में रमज़ान साल में दो बार पड़ सकता है।
साल 2030 में दो बार आएगा रमज़ान
साल 2030 में पहला रमज़ान 05 जनवरी से शुरू होगा। इसके बाद चंद्र कैलेंडर के हिसाब से दूसरा रमज़ान 26 दिसंबर 2030 से शुरू होगा। इस तरह 2030 में रमज़ान का पाक महीना दो बार मनाया जाएगा। यह घटना बहुत ही खास है और इसे इस्लामी कैलेंडर की विशेषता माना जाता है।
पहले भी दो बार आ चुका है रमज़ान
इस साल से पहले 1997 में भी रमज़ान दो बार आया था। उस साल पहला रमज़ान 10 जनवरी से शुरू हुआ और दूसरा 31 दिसंबर से। इससे पहले साल 1965 में भी ऐसा हुआ था। ये घटनाएं इस्लामी कैलेंडर की लचीली और चंद्र आधारित प्रकृति की वजह से संभव हुई हैं।रमज़ान केवल रोज़ा रखने का महीना नहीं है। यह महीने लोगों को अपने अंदर संयम, दया और आध्यात्मिक शुद्धि का अनुभव कराता है। मुस्लिम समुदाय इस समय पैगंबर मुहम्मद पर अवतरित कुरान की पहली आयतों को याद करता है। दो बार रमज़ान आने से भी लोगों के लिए यह महीना और भी खास बन जाता है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी इस्लामिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।











