सनातन धर्म में गुरु और भगवान दोनों का स्थान अत्यंत पूजनीय माना गया है। लेकिन सदियों से एक प्रश्न लोगों के मन में उठता रहा है कि गुरु और भगवान में कौन बड़ा है? कबीरदास से लेकर उपनिषदों और गुरु परंपरा तक इस विषय पर अनेक विचार मिलते हैं।

Guru Purnima 2026: सनातन धर्म में गुरु और भगवान दोनों का स्थान अत्यंत पूजनीय माना गया है। लेकिन सदियों से एक प्रश्न लोगों के मन में उठता रहा है कि गुरु और भगवान में कौन बड़ा है? कबीरदास से लेकर उपनिषदों और गुरु परंपरा तक इस विषय पर अनेक विचार मिलते हैं। शास्त्रों का निष्कर्ष यह है कि भगवान सर्वोच्च सत्ता हैं, लेकिन मनुष्य के जीवन में भगवान तक पहुंचने का मार्ग गुरु ही दिखाते हैं। इसी कारण गुरु को अत्यंत उच्च स्थान दिया गया है। गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि ज्ञान के बिना जीवन अधूरा है और ज्ञान का सबसे बड़ा स्रोत गुरु हैं। Guru Purnima 2026
उपनिषदों में स्पष्ट कहा गया है कि बिना गुरु के आत्मज्ञान प्राप्त करना अत्यंत कठिन है। मुंडक उपनिषद में कहा गया है कि जो व्यक्ति परम सत्य को जानना चाहता है, उसे ज्ञानी और अनुभवी गुरु की शरण में जाना चाहिए। Guru Purnima 2026
तैत्तिरीय उपनिषद का प्रसिद्ध वाक्य है
"आचार्य देवो भवः"
अर्थात अपने आचार्य या गुरु को देवतुल्य मानो।
यह शिक्षा केवल सम्मान का संदेश नहीं देती, बल्कि यह बताती है कि गुरु ही वह माध्यम हैं जो अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश तक पहुंचाते हैं।
कबीरदास ने गुरु को भगवान से बड़ा क्यों कहा?
संत कबीर का प्रसिद्ध दोहा आज भी सबसे अधिक उद्धृत किया जाता है
"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।"
इस दोहे का अर्थ यह नहीं है कि गुरु भगवान से बड़े हैं, बल्कि इसका भाव यह है कि यदि गुरु न होते तो भगवान का साक्षात्कार भी संभव नहीं होता। गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं, इसलिए उनके प्रति पहले कृतज्ञ होना चाहिए। Guru Purnima 2026
भगवद्गीता क्या कहती है?
भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा
"तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः।।" (गीता 4.34)
अर्थात ज्ञान प्राप्त करने के लिए विनम्रता से ज्ञानी गुरु के पास जाओ। वे तुम्हें सत्य का ज्ञान देंगे।यह श्लोक बताता है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी ज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु की आवश्यकता को स्वीकार करते हैं। Guru Purnima 2026
सनातन धर्म का उत्तर संतुलित है। भगवान सृष्टि के पालनहार और सर्वोच्च शक्ति हैं। गुरु स्वयं भगवान नहीं होते, लेकिन वे भगवान तक पहुंचने का मार्ग दिखाने वाले प्रकाश स्तंभ होते हैं।
इसलिए कहा जाता है कि—
भारतीय परंपरा में गुरु और भगवान को विरोधी नहीं बल्कि एक-दूसरे के पूरक माना गया है। गुरु का कार्य मनुष्य को धर्म, सत्य, सदाचार और ईश्वर की ओर ले जाना है। यदि गुरु स्वयं शास्त्रों के अनुसार आचरण करने वाले, ज्ञानी और सदाचारी हों तो उनका सम्मान भगवान के समान किया जाता है। Guru Purnima 2026
गुरु पूर्णिमा केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर भी है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन में माता-पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु और वे सभी व्यक्ति जिन्होंने हमें सही मार्ग दिखाया, उनके प्रति सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए। सनातन धर्म का सार यही है कि भगवान सर्वोच्च हैं, लेकिन भगवान तक पहुंचने का सबसे सुरक्षित और पवित्र मार्ग गुरु के माध्यम से ही प्रशस्त होता है। इसलिए भारतीय संस्कृति में गुरु को देवतुल्य माना गया है और उनका स्थान अत्यंत ऊंचा बताया गया है। Guru Purnima 2026
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