Gyanvapi- अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, ज्ञानवापी से पहले मूर्ति हटाने को लेकर आ चुके हैं चर्चा में
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
भारत
चेतना मंच
04 Jun 2022 06:28 PM
Varanasi- उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) में कथित तौर पर शिवलिंग मिलने की बात सामने आने के बाद से ही जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद मस्जिद के अंदर शिवलिंग की पूजा करने के लिए अड़े हुए हैं।
गौरतलब है कि शनिवार को वाराणसी पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद के मठ को नजरबंद कर लिया था। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshvaranand) का कहना है कि पूजा उनका अधिकार है और यह अधिकार उनसे कोई नहीं छीन सकता है। ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर कथित तौर पर मिले शिवलिंग की पूजा करने पर अड़े हुए हैं। इनका कहना है कि जब तक इन्हें ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर शिवलिंग की पूजा नहीं करने दी जाएगी तब तक यह अन्न व जल ग्रहण नहीं करेंगे और अनशन पर मठ के दरवाजे पर ही बैठे रहेंगे।
छिंदवाड़ा के राम मंदिर को लेकर पहले भी आ चुके हैं चर्चा में -
ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) को लेकर चर्चा में छाए हुए अविमुक्तेश्वरानंद इससे पहले भी चर्चा का विषय बन चुके हैं। इससे पहले मध्य प्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिले में स्थित श्रीराम (Ram Mandir, Chhindwara Madhya Pradesh) मंदिर में साईं बाबा की प्रतिमा को देखकर यह भड़क गए थे। उनका कहना था कि जब तक श्री राम मंदिर से साईं जी की मूर्ति को हटाया नहीं जाएगा वह मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे। साईं जी की मूर्ति को लेकर उन्होंने कहा था कि यदि आपको साईं की ही पूजा करनी है तो फिर राम और कृष्ण की क्या जरूरत है इसके साथ ही दर्शन के लिए बुलाने वाले शिष्य को इन्होंने आड़े हाथों भी लिया था। बाद में इनकी जिद्द के आगे मंदिर परिसर से साईं जी की मूर्ति हटाई गई तब जाकर इन्होंने मंदिर में प्रवेश किया।
इसके अलावा और मुक्तेश्वर आनंद वाराणसी में मंदिर के तोड़े जाने का भी विरोध कर चुके हैं इसके अलावा इन्होंने छत्तीसगढ़ के कवर्धा में सनातन धर्म के ध्वज को हटाने का विरोध करने के साथ-साथ एक बड़ी रैली निकालकर ध्वज को स्थापित भी किया था।
अब एक बार फिर अविमुक्तेश्वरानंद ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) में पूजा करने की जिद को लेकर चर्चा में आए हुए हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। इनका मूल नाम उमाशंकर है प्राथमिक शिक्षा प्रतापगढ़ में ही पूरी करने के बाद यह गुजरात चले गए थे जहां से इन्होंने संस्कृत की शिक्षा ली। शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत ये पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य के शरण में चले गए, और उनके शिष्य बन गए।