Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है बल्कि यह प्रेम, समर्पण और प्रकृति से जुड़ा त्योहार भी है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, मेहंदी लगाती हैं, झूले झूलती हैं और पारंपरिक गीतों के साथ इस पर्व को उत्साह से मनाती हैं।

Hariyali Teej: सावन का महीना आते ही देशभर में त्योहारों की रौनक बढ़ जाती है। चारों तरफ हरियाली, बारिश की फुहारें और धार्मिक उत्साह के बीच आने वाला हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। हरियाली तीज केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है बल्कि यह प्रेम, समर्पण और प्रकृति से जुड़ा त्योहार भी है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, मेहंदी लगाती हैं, झूले झूलती हैं और पारंपरिक गीतों के साथ इस पर्व को उत्साह से मनाती हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, हरियाली तीज का त्योहार हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में हरियाली तीज का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा। इस शुभ दिन पर महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी वजह से हरियाली तीज के दिन महिलाएं माता पार्वती की पूजा करती हैं और उनसे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए इस व्रत को रखती हैं।
हरियाली तीज की पूजा में श्रद्धा और नियमों का विशेष महत्व होता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी की जाती है। कई महिलाएं इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनती हैं, क्योंकि हरा रंग हरियाली, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें फूल, फल, अक्षत और पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। महिलाएं माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और अन्य श्रृंगार सामग्री चढ़ाती हैं। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, धतूरा और जल अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद हरियाली तीज की व्रत कथा सुनी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कथा सुनने के बाद ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
हरियाली तीज के दिन मेहंदी लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। महिलाएं हाथों में सुंदर मेहंदी रचाती हैं और इसे सौभाग्य का प्रतीक मानती हैं। मान्यता है कि मेहंदी का रंग जितना गहरा होता है, पति-पत्नी के बीच प्रेम और रिश्ते की मजबूती उतनी ही अधिक होती है। इस दिन महिलाएं सज-धजकर झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और परिवार व दोस्तों के साथ त्योहार की खुशियां बांटती हैं। कई जगहों पर घेवर, मालपुआ और अन्य पारंपरिक पकवान भी बनाए जाते हैं।
हरियाली तीज के दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने की परंपरा है। महिलाएं पूजा-पाठ के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करती हैं। इस दिन जरूरतमंद लोगों को दान करना, बड़ों का आशीर्वाद लेना और घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखना शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाओं को मन में अच्छे विचार रखने और श्रद्धा के साथ पूजा करने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज के दिन क्रोध, नकारात्मक विचार और किसी के प्रति द्वेष रखने से बचना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन का पालन करने और तामसिक भोजन से दूरी रखने की परंपरा है। कई मान्यताओं में इस दिन काले या गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचने की बात कही जाती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में त्योहार मनाने की परंपराएं अलग हो सकती हैं।
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