विनय संकोची
Health : पांच कोण के तारे जैसी आकृति का एक खट्टा फल होता है 'कमरख', जो भारत, श्रीलंका, बंगलादेश, फिलीपींस, मलेशिया और इंडोनेशिया में पैदा होता है। आयुर्वेद के ग्रंथों में कमरख का वर्णन कर्मरंग नाम से मिलता है, जिसे कफ, वात, पित्त विकार नाशक बताया गया है। 'कमरख' की एक प्रजाति मीठी भी होती है। यह फल कच्चे रहने पर हरे और पकने पर पीले रंग के होते हैं। औकजैलिडेसी कुल के इस फल के पौधे का वानस्पतिक नाम ऐवेरोआ कैरेम्बोला है। कमरख को अंग्रेजी में कैरेम्बोला एप्पल, गूसबेरी और स्टार फ्रूट कहते हैं। इस फल को संस्कृत में कर्मरंगम, शुक्र प्रियम, असमी में कारदई, कन्नड़ में दारेहुलि, तेलुगु में करमोंगा, तमरता, बांग्ला में कमरंगा, मलयालम में पुलिंजी और मराठी में कमलर या कर्मर कहा जाता है।
कमरख पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, डाइटरी फाइबर, शर्करा जैसे पोषक तत्वों के साथ पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन और सोडियम जैसे खनिज भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कमरख विटामिन सी और विटामिन ए का अच्छा स्रोत है। कमरख के सर्वांग यानी जड़, पत्ते, फल, फूल, बीज, तने के ऊपर की लताएं सभी औषधि के रूप में प्रयोग किए जाते हैं।
आइए जानते हैं करिश्माई कमरख के गुण व उपयोग के बारे में-
• कमरख एक स्वादिष्ट इम्यूनिटी बूस्टर है, इसमें बीटा कैरोटीन की उच्च मात्रा पाई जाती है और हमारा शरीर इस तत्व को विटामिन ए में बदल देता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
• जो लोग वजन बढ़ने से परेशान हैं, उन्हें कमरख का प्रयोग करना चाहिए। कमरख फल में फाइबर तो प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है लेकिन इसमें कैलोरी बहुत कम होती है। यही कारण है कि एक उचित मात्रा में कमरख का सेवन कर वजन कम किया जा सकता है।
• कमरख में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो श्वसन तंत्र से जुड़ी अस्थमा जैसी समस्या से छुटकारा दिलाने में सहायता करते हैं। श्वांस रोगियों को दिन में एक कमरख का सेवन करना लाभ पहुंचा सकता है।
• कमरख में मौजूद पोषक तत्व बुखार जैसी परेशानियों को दूर रखने में सहायक होते हैं। साथ ही शरीर में किसी भी कारण से आने वाली कमजोरी को दूर करने में भी यह फल सक्षम है।
• बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों की समस्या भी बढ़ती है। कमरख में पाए जाने वाले कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और जिंक जैसे सभी तत्व हड्डियों की सेहत का पूरा ध्यान रख सकते हैं। कमरख जोड़ों के दर्द में भी उपयोगी होती है।
• गर्मियों में अक्सर खाना ठीक से नहीं पचता है। कब्ज की शिकायत हो जाती है, पेट संबंधी अन्य विकार उत्पन्न हो जाते हैं। कमरख का सेवन इन सभी समस्याओं का उपचार है। क्योंकि कमरख में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने का काम करता है।
• कमरख कष्टदायक बवासीर की परेशानी में भी राहत देने वाला फल है। साथ ही यह उल्टी, दस्त, पेचिश की समस्या में भी कारगर है।
• कमरख में मौजूद बीटा कैरोटीन एंटी ऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं। बीटा कैरोटीन के उचित मात्रा में नियमित सेवन से कैंसर के जोखिम को कम कर सकते हैं।
• कमरख के पौधे के पत्तों से निकलने वाले अर्क सीरम ग्लूकोज के स्तर को सुधार सकते हैं। इसके सेवन से मधुमेह से होने वाले जोखिम को कम किया जा सकता है।
• कमरख के सेवन से हृदय रोग के कारण होने वाले खतरे को कम करने में सहायता मिल सकती है। कमरख में मौजूद विटामिन बी9 हृदय रोगों से शरीर को होने वाले जोखिम से दूर रखने में सहायता करता है। इसके अलावा यह स्ट्रोक के खतरे को भी कम कर सकता है।
• कमरख शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है।
• कमरख रक्तचाप को कंट्रोल में रखने का भी काम करता है।
जरूरी बात : कमरख में सोडियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जिस कारण कमरख के अधिक सेवन से उच्च रक्तचाप की समस्या से परेशानी हो सकती है। कमरख के जरूरत से ज्यादा सेवन करने से पेट फूलने, पेट में ऐंठन और सूजन की समस्या भी हो सकती है। विशेष : यहां कमरख के गुण और उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है। यह सामान्य जानकारी चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। इसलिए हम किसी उपाय अथवा जानकारी की सफलता का दावा नहीं करते हैं। रोग विशेष के उपचार में कमरख को औषधि रूप में अपनाने से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य/चिकित्सक/आहार विशेषज्ञ से परामर्श जरूरी है।