विनय संकोचीHealth : फालसा (Phalsa) एक बहुत छोटा सा फल है, जो हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। मटर के दाने जैसा दिखने वाला फालसा कच्चा होने पर हरा रहता है और पक जाने पर बैंगनी, लाल और गहरे बैंगनी रंग का हो जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम 'ग्रेविया एशियाटिक' है और इसमें विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त फालसे में आयरन(Iron), कार्बोहाइड्रेट(Carbohydrate) , मैग्निशियम(Magnesium), कैलशियम(Calcium), फास्फोरस(Phosphorus), सोडियम(Sodium) , पोटैशियम(Potassium), फाइबर(Fibre), विटामिन-बी1(Vitamin-B1), विटामिन-बी2(Vitamin-B2), विटामिन-बी3(Vitamin-B3), विटामिन-ए(Vitamin-A) तथा प्रोटीन(Protein) भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। स्वाद में खट्टा-मीठा और रसीला फालसा गर्मियों में आता है और तमाम रोगों से लड़ने और बचने में सहायता करता है।
आइए जानते हैं गर्मियों में सेहत के साथी फालसा के गुण और उपयोग के बारे में -
• फालसा दिल का दोस्त है। 50 मिलीलीटर फालसा रस में एक चुटकी काली मिर्च चूर्ण और थोड़ा-सा नमक मिलाकर दिन में 2-3 बार पीने से हृदय को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।
• मूत्र संबंधी रोगों से छुटकारा दिलाने में फालसा सहायक है। पेशाब करते समय दर्द और जलन होने जैसी समस्या हो तो फालसे की 5 ग्राम जड़ को 50 मिलीलीटर पानी में रात को भिगोकर रखें तथा सुबह जड़ को पानी में मसलकर छानकर पी लें। इस प्रक्रिया को दोहराते रहने से मूत्र विकारों में राहत मिल सकती है।
• जो लोग दुबले और कमजोर हैं, उनके लिए फालसा बहुत काम की चीज है। फालसे की छाल के 2 ग्राम चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर, गाय के दूध के साथ सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है।
• फालसा की छाल का काढ़ा बनाकर 10 से 15 मिलीलीटर मात्रा लेने से बुखार में आराम मिलता है।
• जोड़ों का दर्द और सूजन की शिकायत आम है। फालसा जोड़ों के दर्द और सूजन कम करने में सहायता करता है। इसके सेवन से गठिया के उपचार में भी मदद मिल सकती है।
• फालसा फल ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में प्रभावी होता है। इसमें पाया जाने वाला ग्लाइसेमिक इंडेक्स मधुमेह (Glycemic Index Diabetes)के नियंत्रण में सहायता करता है।
• अस्थमा (Asthma)सांस से जुड़ी एक खतरनाक बीमारी है। फालसे में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और खनिज होते हैं, जिनसे अस्थमा में सुधार होता है।
• शरीर में आयरन(Iron) की कमी होने से एनीमिया की शिकायत होती है। ऐसे में चिकित्सक लौह तत्व युक्त पदार्थ सेवन की सलाह देते हैं। फालसा में आयरन अच्छी मात्रा में मौजूद होता है, इसलिए फालसा के सेवन से एनीमिया का जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
• डायरिया कहने को एक साधारण रोग है, लेकिन इसका समुचित उपचार न करने से यह जानलेवा भी हो जाता है। डायरिया से निजात दिलाने में फालसा उपयोगी हो सकता है।
फालसे में मौजूद अनेक यौगिक एवम् गुण डायरिया को हराने में सक्षम हैं।
• फालसे में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, इसलिए फालसा हड्डियों को मजबूत करने में काफी लाभकारी है। फालसा हड्डियों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ हड्डियों के घनत्व को बढ़ाने में भी मदद करता है।
• फालसा की पत्तियों का उपयोग घावों और एग्जिमा को ठीक करने में सहायक हो सकता है।
जरूरी जानकारी : जरुरत से ज्यादा फालसे खाने से पेट में समस्या हो सकती है। फालसे का सेवन कभी भी खाली पेट नहीं करना चाहिए, नुकसान हो सकता है। यदि फलों से एलर्जी है तो फालसा भी ना खाएं। विशेष : यहां फालसे के गुण व उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है, जिसकी सफलता का हम दावा नहीं करते हैं। फालसे को रोग विशेष में औषधि रूप में प्रयोग / उपयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक / आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य करें, अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि उठानी पड़ सकती है। सामान्य जानकारी को चिकित्सकीय परामर्श न समझें।