विनय संकोची
Health Care :प्रकृति ( Nature) ने कृपा पूर्वक हमें वृक्षों, लताओं, पल्लवों, पुष्पों, जड़ों, बीजों आदि के रूप में विभिन्न प्रकार के ऐसे उपहार दिए हैं, जो हमारी तमाम बीमारियों में उपचारक की भूमिका निभाते हैं, हमें स्वस्थ रखते हैं। ऐसे ही एक कृपालु उपयोगी वृक्ष का नाम है 'अमलतास', जो हमारी सेहत के लिए है बहुत ही खास। अमलतास-वृक्ष को पहचानने और ना पहचानने वाले, उसके औषधीय गुणों से संभवत कम ही परिचित होंगे।
अमलतास उर्दू का शब्द है और संस्कृत में इसे व्याधिघात, नृप्रदुम, आग्यवध, कार्णिकार और लैटिन में कैसिया फिस्चुला कहते हैं, जो इसका वैज्ञानिक नाम है। पीले फूलों वाले शोभाकर अमलतास के फल, फूल, तने, जड़, छाल अर्थात संपूर्ण वृक्ष का आयुर्वेद में औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसे यूं भी कह सकते हैं कि अमलतास हर मर्ज की दवा है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि अमलतास वृक्ष के सभी अंग एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर हैं। आइए जानते हैं अमलतास के कुछ गुणों के बारे में...
• अमलतास (Amaltas) की पत्तियों को रोजाना खाने से जोड़ों के दर्द और सूजन की परेशानी में आराम मिलता है। जिससे गठिया की समस्या में भी कमी आती है।
• अमलतास के पत्तों को गाय के दूध के साथ पीसकर लेप करने से नवजात शिशु के शरीर पर होने वाली फुंसी और छाले दूर हो जाते हैं। अमलतास के पत्ते और छाल को पीसकर लगाने से नाक की छोटी-छोटी फुंसियां ठीक हो जाती है।
• अमलतास, चमेली और करंज के पत्तों को गोमूत्र के साथ पीसकर लगाने से पुराने से पुराना घाव ठीक हो जाता है। अमलतास के 2-3 पत्तों में नमक और मिर्च लगाकर खाने से पेट साफ होता है और उदर रोग से मुक्ति मिलती है।
• 10 ग्राम अमलतास के पत्तों को 400 मिलीलीटर पानी में पकाएं, जब काढ़ा एक चौथाई रह जाए तो इसका सेवन करें। मधुमेह में लाभ होगा।
• अमलतास के 10-15 पत्तों को गर्म करके उनकी पट्टी बांधने से लकवा रोग में फायदा होता है। इसके अतिरिक्त अमलतास के पत्तों के रस को पिलाने से भी चेहरे के लकवे में लाभ होता है।
• अमलतास के पत्ते को पीसकर लेप करने से कुष्ठ रोग में फायदा होता है। अमलतास के पत्तों का लेप बनाकर फटी एड़ियों में लगाने से जल्दी आराम आता है।
• अमलतास की जड़ की छाल (10 ग्राम) को थोड़े से पानी में पकाकर उसकी बूंद-बूंद मुंह में डालने से टॉन्सिल में आराम मिलता है। अमलतास फल के गूदे का काढ़ा बनाकर पीने से दमा रोग में लाभ होता है।
• अमलतास के फूलों का गुलकंद सेवन करने से आंत के विकारों में फायदा होता है। अमलतास के फूलों का गुलकंद कब्ज से मुक्ति दिलाता है। इसके अतिरिक्त 15-20 ग्राम अमलतास फल के गूदे को मुनक्के के साथ सेवन करने से भी कब्ज की परेशानी दूर होती है।
• अमलतास के फल का गूदा और आंवले का रस बराबर मात्रा में दिन में 2 बार सेवन करने से पीलिया रोग में लाभ होता है। अमलताज की फलियों को अच्छी तरह पीसकर दाद अथवा खुजली वाले अंग पर अच्छे नियमित रूप से लेप लगाने से दाद, खाज, खुजली और जलन में बहुत जल्दी राहत मिलती है।
• पोषक तत्वों से भरपूर अमलतास का फूल त्वचा की खूबसूरती को निखारने का काम भी करता है। इसके फूल को बारीक पीसकर उसका लेप चेहरे पर लगाने से चेहरा खिल उठता है। यह लेप चेहरे पर मौजूद दाग धब्बे और मुहांसों को भी खत्म करने का काम करता है।
• अमलतास की छाल और फल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। छाल और फल के काढ़े से रोग प्रतिरोधक क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि होती है। अमलतास के फल और छाल को लेकर साफ पानी में धोकर थोड़े पानी में तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। ठंडा होने पर उसका दिन में दो बार सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।
• बुखार से लड़ने के लिए अमलतास का अर्क उपयोगी होता है डायरिया और खसरा में अमलतास का प्रयोग वर्जित कहा गया है।
• अमलतास के महत्व का आयुर्वेद में वर्णन है। यह निश्चित ही गुणकारी है, लेकिन उपचार के लिए अमलतास का उपयोग औषधि के रूप में योग्य चिकित्सक के परामर्श के बिना ना करें।