विनय संकोची
अपने सौंदर्य, स्वाद और स्वास्थ्यवर्धक गुणों के लिए पहचाना जाने वाला फल अंजीर (Fig) विश्व के ऐसे पुराने फलों में है, जिसकी जानकारी मिस्र की प्राचीन जातियों को भी थी। प्राचीन यूनान में तो अंजीर व्यापारिक दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण था कि उसके निर्यात पर कड़ी पाबंदी थी। रोम वासी इस वृक्ष को भविष्य की समृद्धि का चिन्ह मानकर उसका आदर करते थे। अंजीर सोडियम(Sodium) , पोटेशियम(potassium,), कैल्शियम(Calcium) , विटामिन-ए, बी और सी (Vitamin-A,B,C)से युक्त होता है। अंजीर में 83 प्रतिशत चीनी है, इसलिए यह संसार का सबसे मीठा फल माना जाता है। लेकिन बावजूद इसके डायबिटीज के रोगियों को दूसरे फलों की तुलना में अंजीर का सेवन विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है। यह फल ताजा और सूखा दोनों स्थितियों में सेहत का खजाना होता है।
अंजीर पोटेशियम का बहुत अच्छा स्रोत है जो रक्तचाप और रक्त शर्करा, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। अंजीर के रेशे मोटापे को कम करने, वजन को संतुलित रखने में सहायक होते हैं। स्तन कैंसर की तकलीफ को भी अंजीर कम करता है और सूखे अंजीर में फेनोल, ओमेगा-3, ओमेगा-6 होता है और यह फैटी एसिड, कोरोनरी हार्ट डिजीज के खतरे को कम करने में मदद करता है। अंजीर में कैल्शियम की बड़ी मात्रा होती है, जिसके कारण इसके सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं। अंजीर से अनेक रोगों का उपचार किया जा सकता है। प्रस्तुत है विभिन्न रोगों में अंजीर के उपयोग की जानकारी।
• अंजीर के चार दाने रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें और सुबह उन दानों को थोड़ा सा मसल कर जल पीने से अस्थमा में बहुत लाभ होता है तथा कब्ज की शिकायत भी दूर होती है।
• तीन-चार अंजीर खाकर 10 ग्राम काले तिल चबाने से पेशाब का अधिक आना बंद हो जाता है। पके अंजीर को बराबर की मात्रा में सौंफ के साथ चबा चबाकर सेवन नियमित रूप से 40 दिनों तक करने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है।
• अंजीर को दूध में उबालकर उबला हुआ अंजीर खाकर दूध पीने से खून की कमी दूर कमी दूर हो जाती है। 5 अंजीर और 10 मुनक्के 200 मिलीलीटर दूध में उबालकर खाने और वही दूध पी लेने से रक्त वृद्धि के साथ-साथ रक्त विकारों से भी मुक्ति मिलती है।
• ताजे अंजीर कूटकर फोड़े आदि पर बांधने से शीघ्र आराम मिलता है। क्षय रोग में भी दो से चार अंजीर प्रतिदिन खाने से अप्रत्याशित लाभ प्राप्त होता है। अंजीर के पेड़ की छाल को पानी के साथ पीसकर उसमें चार गुना घी डालकर गर्म करके हरताल की भस्म के साथ सेवन करने से श्वेत कुष्ठ, सफेद दाग में चमत्कारी लाभ होता है। अंजीर के कच्चे फलों में से दूध निकालकर सफेद दागों पर लगातार 5 महीने लगाने से बहुत लाभ होता है। अंजीर को घिसकर नींबू के रस में मिलाकर लगाने से सफेद दागों में विशेष लाभ होता है। अंजीर का दूध लगाने से दाद ठीक हो जाते हैं।
• अंजीर और गोरख इमली, जंगली जलेबी 5-5 ग्राम में एकत्र कर प्रतिदिन प्रात:काल सेवन करने से हृदय अवरोध और श्वास रोग के कष्ट से मुक्ति मिलती है।
• अंजीर को पानी में उबालकर गुनगुने पानी से दिन में दो बार कुल्ला करने से मसूड़ों से खून आना बंद होता है और मुंह की दुर्गंध भी समाप्त होती है।
• सूखे अंजीर के तीन-चार दाने शाम के समय जल में भिगोकर, सुबह उन अंजीरों को मसलकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करने से अर्श रोग दूर हो जाता है। अंजीर को सिरके में भिगोकर खाने से भूख न लगना और अफारा दूर होता है।
• प्रसव के समय 15-20 दिन तक रोजाना दो अंजीर दूध के साथ खाने से प्रसव के समय की पीड़ा में राहत मिलती है। किसी प्रकार का बाह्य पदार्थ यदि पेट में चला जाए तो उसे निकालने के लिए अंजीर का अधिक मात्रा में सेवन लाभकारी होता है। किसी भी प्रकार के बुखार में अंजीर का सेवन लाभ पहुंचाता है।
• अंजीर में पोटेशियम अधिक और सोडियम कम होता है इसलिए यह उच्च रक्तचाप से बचाता है। अंजीर को गुलकंद के साथ रोज सुबह खाली पेट खाने से पेट अच्छी तरह साफ होता है और कब्ज नहीं रहता है।
• एक सूखा अंजीर और 7 बादाम दूध में डालकर उबालने के बाद, थोड़ी चीनी मिलाकर प्रतिदिन सुबह सेवन करने से पेट की गर्मी शांत होती है और शरीर स्वस्थ एवं बलवान बनता है। सूखे अंजीर को उबाल कर अच्छी तरह पीसकर यदि गले की सूजन या गांठ पर बांधी जाए तो शीघ्र आराम होता है।
गुणकारी अंजीर के गुणों का अधिकतम एवम् सुरक्षित लाभ लेने के लिए योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श आवश्यक है।