विनय संकोचीHealth : 'राजमा'(Kidney Beans) का उत्पत्ति स्थल तो अमेरिका है लेकिन जिन तमाम देशों में इसे बड़े शौक से खाया जाता है, उसमें अपना देश भारत भी है। राजमा का वैज्ञानिक नाम है, फैजियोलस बल्गेरिस है और इसका बीज अधिकतर गुर्दे के आकार का होता है। भारत में राजमा उत्तराखंड के पर्वतीय स्थल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में उगाया जाता है। भारतीयों को राजमा चावल बहुत पसंद होते हैं, संभवत इसका कारण यह है कि यह स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक है।
कोलस्ट्रोल रहित राजमा में प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, शर्करा, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम, जिंक, विटामिन सी, थायमिन, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी6, फोलेट, विटामिन के, विटामिन ई, फैटी एसिड टोटल मोनोसैचुरेटेड, फैटी एसिड पॉलीअनसैचुरेटेड, फैटी एसिड टोटल ट्रांस जैसे पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं, जो राजमा को सेहत का रखवाला बनाते हैं। राजमा काला, गहरा लाल, हल्का लाल, गुलाबी और सफेद रंगों में मिलता है। सफेद राजमा जिसे नॉर्दर्न बीन्स के नाम से जाना जाता है, इसका उपयोग सर्वाधिक फ्रांस में होता है।
यह तो हुआ राजमा का संक्षिप्त परिचय, अब जानते हैं इसके गुण व उपयोग के बारे में -
• आजकल युवाओं में शरीर सौष्ठव के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है। आकर्षक मजबूत शरीर बनाने में राजमा मददगार हो सकता है। बॉडी बिल्डिंग के लिए प्रोटीन की शरीर को बहुत आवश्यकता होती है। इस जरूरत को राजमा पूरी कर सकता है। राजमा में तो प्रचुर मात्रा में प्रोटीन के साथ फाइबर और आयरन भी अच्छी मात्रा में होते हैं, जो सुडौल शरीर बनाने में सहायक होते हैं।
• कब्ज़ अनेक बीमारियों की जड़ है। राजमा में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो भोजन को पचाने में सहायक है और भोजन का ठीक से पच जाना मतलब कब्ज़ से छुटकारा।
• राजमा दिल का भी दोस्त है। राजमा के सेवन से दो बड़े लाभ हैं। पहला यह कि राजमा एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और दूसरा इसमें मौजूद मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर को कम करता है। यह दोनों ही स्थितियां हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हैं।
• कैंसर एक बेहद गंभीर रोग है। राजमा कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है। राजमा के सेवन से शरीर में बायोएक्टिव यौगिक की भरपाई होती है, जो कैंसर से बचाने में सहायता करती है।
• मधुमेह एक ऐसी खतरनाक समस्या है, जो शरीर में अन्य अनेक जानलेवा बीमारियों को जन्म देती है। राजमा के सेवन से मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। राजमा में मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स मधुमेह को कंट्रोल करता है।
• राजमा में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है, जिसके कारण शरीर में मौजूद गुड कोलस्ट्रोल तो प्रभावित नहीं होता है, परंतु बैड कोलेस्ट्रॉल घटता है। राजमा में मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।
• राजमा मस्तिष्क के प्रारंभिक विकास में सहायक है और नर्वस सिस्टम को भी नियंत्रित करता है। राजमा में पाया जाने वाला कोलीन नामक तत्व मस्तिष्क के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में सहायता करता है।
• राजमा में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का गुण भी होता है। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए शरीर को विटामिन बी6, जिंक, आयरन, फोलिक और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्वों की जरूरत होती है,ये सभी राजमा से मिल सकते हैं।
• राजमा को अपनी खुराक में शामिल कर रक्तचाप को भी नियंत्रित रखा जा सकता है।
• राजमा के सेवन से हड्डियों को भी मजबूती मिलती है। हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक कैल्शियम और मैग्नीशियम जरूरी तत्व को राजमा को आहार में शामिल कर प्राप्त किए जा सकते हैं।
जरूरी बात : राजमा के जरूरत से ज्यादा सेवन से मांसपेशियों से जुड़ी समस्या, पेट में गैस और सूजन हो सकती है। ज्यादा राजमा खाने से इसमें मौजूद फोलिक एसिड की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ज्यादा मात्रा में राजमा खाना उल्टी, पेट दर्द और कब्ज़ का कारण बन सकता है।विशेष : यहां राजमा के गुण और उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है। यह सामान्य जानकारी चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। इसलिए हम किसी उपाय अथवा जानकारी की सफलता का दावा नहीं करते हैं। रोग विशेष के उपचार में राजमा को औषधि रूप में अपनाने से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य/चिकित्सक/आहार विशेषज्ञ से परामर्श जरूरी है।