विनय संकोची
Health : खाने की शौकीन अनेक व्यंजनों में 'करी पत्ता'('Curry leaf') के उपयोग और महत्व के बारे में, ज्यादा नहीं तो थोड़ा बहुत जरूर जानते हैं। करी पत्ता का पेड़ हिमालय को छोड़कर पूरे भारत में पाया जाता है। करी पत्ता का पौधा नीबू वंश सिट्रस का सदस्य है। इसमें छोटे सुगंधित सफेद फूल आते हैं, जो छोटे काले बेर जैसे फल बन जाते हैं। करी पत्ता का फल तो खाया जा सकता है, लेकिन इसका बीज जहरीला होता है। वैसे तो करी पत्ता का उपयोग ताजा ही किया जाता है, लेकिन उनको सुखाकर भी रखा जा सकता है। ताजा पत्तों में जितनी सुगंध होती है, उतनी सूखे पत्तों में नहीं होती। परंतु ताजा और सूखे करी पत्तों के गुण में कोई विशेष अंतर नहीं होता है।
करी पत्ता दक्षिण भारत की रसोई का अभिन्न हिस्सा है। करी पत्ता स्वाद का ही नहीं स्वास्थ्य का भी खजाना है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। करी पत्ते में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन बी1, विटामिन बी2, विटामिन सी, विटामिन ए, कैरोटीन, निकोटिनिक एसिड, फास्फोरस आदि पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त करी पत्ता में एंटीमाइक्रोबियल, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी डायबिटिक गुण मौजूद होते हैं। आइए जानते हैं करी पत्ता के गुण और उपयोग के बारे में, जिसे मीठी नीम भी कहा जाता है।
• करी पत्ता आंखों की रोशनी तेज करता है और मोतियाबिंद होने के जोखिम को कम करता है। ऐसा करी पत्ते में प्रचुर मात्रा में मौजूद विटामिन ए के कारण होता है।
• करी पत्ता के दो-तीन ताजा पत्ते सुबह एक खजूर के साथ खाने से एनीमिया अर्थात शरीर में खून की कमी से छुटकारा मिल सकता है। करी पत्ता में मौजूद आयरन और फोलिक एसिड रक्त अल्पता के विकार को दूर करने में सहायक हैं।
• रोज सुबह करी पत्ता के आठ-दस पत्ते चबाकर खाने अथवा उनका रस निकालकर खाली पेट पीने से ब्लड शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है। करी पत्ता में पाए जाने वाले विटामिन बीटा-कैरोटीन और फाइबर आदि टाइप-2 डायबिटीज की संभावना को कम करते हैं।
• ताजा करी पत्तों का रस कीमोथेरेपी से होने वाले बुरे प्रभाव को कम करने में सहायता करता है।
• करी पत्ता में पाई जाने वाली टैनिन और कार्बाजोल अल्क्लॉयड लीवर की कार्य क्षमता को बढ़ाने के साथ इससे संबंधित हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
• करी पत्ते के सेवन से हृदय रोगों से बचाव हो सकता है। हृदय संबंधी रोगों के उपचार में करी पत्ते का उपयोग आयुर्वेदिक औषधि के रूप में होता रहा है। करी पत्ता कोलेस्ट्रॉल को कम करता है, इसलिए भी यह दिल की सेहत के लिए उपयोगी है।
• करी पत्ते में एंटीऑक्सीडेटिव प्रभाव होता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाने का काम करता है।
• करी पत्ते में एंटी इंफ्लेमेटरी अर्थात सूजन को कम करने का विशेष गुण पाया जाता है। अतः सूजन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए भी करी पत्ते का उपयोग किया जा सकता है।
• करी पत्ता त्वचा को स्वस्थ रखने में भी कारगर होता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण खुश्क त्वचा को स्निग्ध और कोमल बनाने के साथ-साथ रंगत में भी सुधार करते हैं। इसके इन्हीं गुणों के कारण इसका कई सौन्दर्य उत्पादों में उपयोग किया जाता है।
• ताजे करी पत्ते को नारियल के तेल में उबालकर बालों की जड़ों सहित सिर पर लगाने से बालों की रंगत और विकास में सुधार हो सकता है।
• करी पत्ते के तेल में पाए जाने वाले एंटीबायोटिक और एंटी फंगल गुण संक्रमण के जोखिम से बचाव करते हैं।
• जरूरी बात : करी पत्ते के अधिक मात्रा में सेवन से सामान्य ब्लड शुगर वालों को लो ब्लड शुगर की समस्या हो सकती है। करी पत्ते का तेल का पेस्ट लगाने से जलन की शिकायत हो सकती है। अधिक मात्रा में सेवन से बाल भी झड़ सकते हैं। कुछ लोगों में करी पत्ते से एलर्जी की शिकायत देखी गई है।
( विशेष : यहां करी पत्ते के गुण और उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है। परंतु सामान्य जानकारी चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प कदापि नहीं है। इसलिए हम किसी उपाय अथवा जानकारी की सफलता का दावा नहीं करते हैं। रोग विशेष के उपचार में करी पत्ते को औषधि रूप में अपनाने से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य / आहार विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है।)