विनय संकोची
नीम (Neem) तेजी से बढ़ने वाला भारतीय मूल का सदाबहार वृक्ष है। नीम भारतीय पर्यावरण के अनुकूल है। इसे ग्रामीण औषधालय का नाम भी दिया गया है। यह पेड़ बीमारियां वगैरह से आजाद होता है और उस पर कोई कीड़ा-मकोड़ा नहीं लगता है, इसलिए नीम को आजाद पेड़ कहा जाता है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों में नीम के गुणों का उल्लेख मिलता है। आयुर्वेद में नीम को बहुत ही उपयोगी पेड़ माना गया है। नीम की पत्तियां अवश्य कड़वी होती है लेकिन इसके फायदे अनेक और बहुत प्रभावशाली हैं। विदेशों में नीम को एक ऐसे पेड़ के रूप में पेश किया जा रहा है, जो मधुमेह के रोग से लेकर एड्स, कैंसर और न जाने किस-किस तरह की बीमारियों का इलाज कर सकता है।
नीम का वृक्ष अपने औषधीय गुणों के कारण पारंपारिक इलाज में बहुत उपयोगी सिद्ध होता आ रहा है। नीम के बारे में कहा जाता है कि एक नीम और सौ हकीम दोनों बराबर हैं। इसमें कई तरह के कड़वे, परंतु स्वास्थ्यवर्धक पदार्थ होते हैं। नीम सर्वरोगहारी गुणों से भरा पड़ा है। नीम का हर्बल, ऑर्गेनिक, पेस्टिसाइड, साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, दातुन, मधुमेह नाशक चूर्ण, कॉस्मेटिक आदि के रूप में प्रयोग किया जाता है। भारत में नीम का पेड़ ग्रामीण जीवन का अभिन्न अंग रहा है। लोग इसकी छाया में बैठने का सुख तो उठाते ही हैं, साथ ही इसके पत्तों, निबोलियों, डंडियों और छाल को विभिन्न बीमारियां दूर करने के लिए प्रयोग करते हैं।
• आयुर्वेदिक ग्रंथ में नीम के गुण के बारे में चर्चा इस तरह से है - "नीम शीतल, हल्का, ग्राही, पाक में चरपरा, हृदय को प्रिय, अग्नि, परिश्रम, तृषा, अरुचि, क्रीमी, व्रण, कफ, वमन, कोढ़ और विभिन्न प्रमेह को नष्ट करता है।"
• नीम की छाल का लेप सभी प्रकार के चर्म-रोगों और घावों के निवारण में सहायक है। नीम की पत्तियां चबाने से रक्त शोधन होता है और त्वचा विकार रहित और कांतिवान बनती है। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर नहाने से चर्म विकार दूर होते हैं।
• नीम विशेषरूप से चेचक के उपचार में सहायक है और उसके विषाणु को फैलने न देने में सहायक है। निबोली और पत्तियों से निकले निकाले गए तेल से मालिश की जाए तो शरीर के लिए अच्छा रहता है। नीम के द्वारा बनाया गया लेप बालों में लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और कम झड़ते हैं।
• नीम के तेल की 5-10 बूंदों को सोते समय दूध में डालकर पीने से ज्यादा पसीना आने और जलन होने संबंधी विकारों में बहुत फायदा होता है। नीम के बीजों के चूर्ण को खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लेने से बवासीर में काफी लाभ होता है।
• नीम की छाल के काढ़े में धनिया और सोंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से मलेरिया रोग में जल्दी फायदा होता है। नीम मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को दूर रखने में अत्यंत सहायक है। जिस वातावरण में नीम के पेड़ रहते हैं, वहां मलेरिया नहीं फैलता है। नीम के पत्ते जलाकर रात को धुआं करने से मच्छर नष्ट हो जाते हैं और मलेरिया से बचाव होता है।