Health : 'जामुन' की जड़ से लेकर गुठली तक सब हैं सेहत के साथी!
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 10:14 PM
विनय संकोचीHealth : भारत (India) फलों के मामले में विविधता प्रधान देश है। यहां जामुन (Blackberry) का फल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ 'चरक संहिता' में कहा गया है कि जामुन का सर्वांग अर्थात् छाल, पत्ते, फल, गुठलियां, जड़ आदि सभी आयुर्वेदिक औषधियां बनाने में काम आते हैं। खट्टे-मीठे गहरे बैंगनी रंग वाले जामुन का वानस्पतिक नाम शायजियम क्यूमिनी है और इसे आयुर्वेद में जंबुल कहा गया है। स्वाद में जामुन को कसैला और खट्टा-मीठा बताया गया है। आयुर्वेद जामुन को पचाने में हल्का और सूखा बताता है। संस्कृत में सुरभिपत्रा, महाफला के नाम से पहचाना जाने वाला जामुन अनेक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें आयरन(Iron ), कैल्शियम(calcium), फास्फोरस(Phosphorus), सोडियम(Sodium), मैग्नीशियम(magnesium), फाइबर(Fibre), विटामिन-सी(Vitamin-C) और विटामिन-बी(Vitamin-B), जैसे-राइबोफ्लेविन(Riboflavin), थियामिन(thiamin), फोलिक एसिड(Folic Acid), नियासिन(Niacin), विटामिन-बी6(Vitamin-B 6) आदि पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। 100 ग्राम जामुन में मात्र 62 कैलोरी होती है। जामुन में एंटी एजिंग गुण भी पाए जाते हैं।
आइए जानते हैं, इसके गुण व उपयोग के बारे में थोड़ा विस्तार से -
• एनीमिया(Anemia) यानी रक्त की कमी से जूझ रहे लोगों को जामुन का सेवन फायदेमंद हो सकता है। जामुन में प्रचुर मात्रा में मौजूद आयरन रक्त को शुद्ध करने, लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने और हीमोग्लोबिन की संख्या में वृद्धि करने में सहायता करता है। इतना ही नहीं यह शरीर को थकान और कमजोरी से भी उबारता है।
• फाइबर से भरपूर जामुन रोगों के आक्रमण को रोकता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। जामुन का सेवन करने से कब्ज घबराहट तथा अनेक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।
• काफी कम कैलोरी और भरपूर फाइबर वाला जामुन वजन घटाने में भी सहायक है। जामुन भूख को कम करते हैं और तृप्ति का अनुभव कराते हैं।
• जामुन एक बेहतरीन इम्यूनिटी बूस्टर है। यह सामान्य खांसी, सर्दी, अस्थमा तथा अनेक श्वसन संक्रमण को रोकने का काम करता है। जामुन का यह गुण इसमें प्रचुर मात्रा में मौजूद विटामिन-सी के कारण होता है।
• जामुन के सेवन से मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। जामुन की गुठली में
जैम्बोसाइन और जैम्बोलिन नाम के ऐसे सक्रिय तत्व होते हैं जो शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ाते हैं और शुगर की दर को घटाते हैं। जामुन मधुमेह के कारण बार-बार पेशाब आने की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है। जामुन की गुठली को सुखाकर उसका चूर्ण बनाकर दिन में तीन बार लेने से मधुमेह में लाभ होता है। 250 ग्राम जामुन के पके फलों को आधा लीटर पानी में डालकर कुछ देर तक उबालें, ठंडा होने पर फलों को मसलकर कपड़े में छान लें और रोजाना दिन में तीन बार नियम से सेवन करें। शुगर का स्तर सुधर जाएगा।
• सिफलिस जैसे गंभीर रोग में जामुन के पत्ते औषधि का काम करते हैं। जामुन के पत्तों को डालकर पकाए हुए तेल को सिफलिस प्रभावित अंग पर लगाने से आराम मिल सकता है।
• जामुन की जड़ को उबाल, पीसकर जोड़ों पर रगड़ने से गठिया के दर्द में काफी आराम मिलता है।
• जामुन के पेड़ की छाल को बारीक पीसकर छिड़कने से घाव बहुत जल्दी भर जाता है। जामुन के पत्तों को पीसकर लगाने से घावों का मवाद बाहर निकल आता है।
• रात में एक गिलास पानी में भिगोकर रखी गई एक चम्मच जामुन के वृक्ष की छाल को सुबह मसलकर छान लें। इस जल में शहद मिलाकर पीने से रक्त पित्त में फायदा हो सकता है।
• गुर्दे की पथरी होने पर जामुन का सेवन बहुत लाभकारी होता है। पकी जामुन खाने से पथरी गल कर बाहर निकल जाती है। जामुन के 10 मिलीलीटर रस में 250 मिलीग्राम सेंधा नमक मिलाकर कुछ दिनों तक दिन में 3 बार पीने से मूत्राशय की पथरी टूटकर निकल जाती है।
• जामुन दिल से संबंधित रोगों को दूर रखने में सहायक है। जामुन में प्रचुर मात्रा में पोटेशियम होता है। इसके सेवन से धमनियों के सख्त होने की आशंका कम हो जाती है। यह उच्च रक्तचाप के लक्षणों को भी कम करता है। इसके इन्हीं गुणों के चलते हृदय स्वस्थ रह सकता है।
• जरूरी बात : पकी जामुन का जरूरत से ज्यादा सेवन पेट और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। चूंकि जामुन देर से पचता है और कब्ज़ को बढ़ाता है, इसी से यह फेफड़ों के विकार का कारण बन सकता है। ज्यादा जामुन खाने वाला ज्वर से ग्रस्त हो सकता है। जामुन को नमक के साथ खाना उचित माना गया है।
( विशेष : यहां जामुन के गुण और उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है। यह सामान्य जानकारी चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प कदापि नहीं है। इसलिए हम किसी उपाय अथवा जानकारी की सफलता का दावा नहीं करते हैं। रोग विशेष के उपचार में जामुन को औषधि के रूप में इस्तेमाल करने से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य/आहार विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है।)