Health : गर्मियों में 'खरबूजा' है स्वाद के साथ साथ सेहत का भी खज़ाना !
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:03 AM
विनय संकोचीHealth : 'खरबूजा'('Muskmelon') गर्मियों का एक लोकप्रिय फल है। तमाम लोग हैं जो खरबूजे के स्वाद का आनंद लेने के लिए गर्मियों के आने का इंतजार करते हैं। आयुर्वेद में खरबूजे को और ठंडा, मीठा, पौष्टिक और बलकारक बताया गया है। खरबूजे का वानस्पतिक नाम कुकुमिस है। खरबूजे को संस्कृत में मधुपाक, कन्नड़ में षड़भुजा, गुजराती में शकरातेती या चिबड़ु, तेलुगु में
पेड्डाकाई, तमिल में बेल्लरीकाई, बांग्ला में खरमुज, मराठी में चिबुंडा कहा जाता है। खरबूजा सोडियम (Sodium), पोटेशियम (Potassium,), कार्बोहाइड्रेट्स(Carbohydrates), डाइटरी फाइबर(Dietary Fiber), शर्करा(Sugar), प्रोटीन(Protein), फोलिक एसिड(Folic Acid) , विटामिन-सी(Vitamin-C), आयरन(Iron), विटामिन बी6(Vitamin - B6), मैग्नीशियम (Magnesium) का उत्तम स्रोत होने के कारण विभिन्न रोगों के निवारण में उपयोगी माना गया है। खरबूजे के बीजों की गिरी का उपयोग पकवान तथा अन्य मिठाइयों में मेवे के रूप में किया जाता है।
आइए जानते हैं रसीले खरबूजे के गुण और उपयोग के बारे में -
• खरबूजे में फोलिक एसिड(Folic Acid) पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो रक्त वाहिकाओं में रक्त के थक्के जमने से रोकने का काम बखूबी करता है। खरबूजे के नियमित सेवन से दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे से बचने में सहायता मिल सकती है और दिल को स्वस्थ रखा जा सकता है।
• खरबूजे में पाया जाने वाला विटामिन-ए(Vitamin-A) बीटा कैरोटिन(Beta Carotene) मोतियाबिंद (Cataracts)के खतरे को कम करने में मदद करता है। साथ ही नेत्र-ज्योति भी बढ़ाता है।
• सोरायिसिस (Psoriasis) एक बहुत कष्टदायक त्वचा रोग है। इस बीमारी में खरबूजे के फल को पीसकर लगाने से लाभ होता है। खरबूजे का सेवन अंदरूनी तौर पर त्वचा रोग से छुटकारे में मदद करता है और इसका बाहरी लेप रोग से होने वाली जलन को शांत करता है।
• खरबूजा गुर्दे की पथरी को गलाने का गुण भी रखता है। खरबूजे के 1 तोला बीज की गिरी को पीसकर पानी में मिलाकर नियमित सेवन करने से गुर्दे के दर्द में आराम मिलता है और पथरी भी गल जाती है। खरबूजा किडनी की सफाई का काम भी बखूबी करता है।
• खरबूजे के बीजों का काढ़ा बनाकर गरारे करने से गले की जलन में राहत मिलती है।
• मूत्र रोगों से छुटकारा दिलाने में खरबूजा मदद कर सकता है। खरबूजे के बीज की गिरी में मिश्री और काली मिर्च मिलाकर खाने से मूत्र विकार खत्म हो जाते हैं। खरबूजा फल का सेवन करने से भी मूत्र संस्थान की समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
• खरबूजे में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है जो कब्ज की समस्या में राहत दिलाता है।
• खरबूजे का सेवन करने से वायरस, बैक्टीरियल इनफेक्शन आदि दूर रहते हैं। इसमें मौजूद विटामिन-सी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और मजबूत बनाने का काम करता है।
• सीमित मात्रा में खरबूजे का सेवन मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं।
• खरबूजे में पाए जाने वाले विटामिन-बी6 और मैग्नीशियम तनाव से मुक्ति दिलाने में सहायक हो सकते हैं।
• फैट और कोलेस्ट्रॉल से मुक्त खरबूजा वजन घटाने में भी सहायता करता है। इसमें सोडियम कम होता है। वहीं इससे काफी कम कैलोरी मिलती है। खरबूजे की प्राकृतिक मिठास अधिक कैलोरी वाली मिठाइयों से दूर रहने में मदद करती है। जिससे वजन नियंत्रित होता है।
• अच्छी नींद ना आना भी अनेक बीमारियों को निमंत्रित करता है। खरबूजे के सेवन से अनिद्रा को दूर करने में सहायता मिलती है। इसमें प्रचुर मात्रा में मिलने वाला मैग्नीशियम तनाव मुक्त कर अच्छी नींद लाने में सहायक बनता है।
• खरबूजे में नींबू मिलाकर सेवन करने से गठिया की बीमारी दूर हो सकती है।
• खरबूजे में बड़ी मात्रा में पाया जाने वाला ऑर्गेनिक पिगमेंट केयर केरोटेन्वाइड फेफड़ों के कैंसर की संभावना को कम करता है। खरबूजा शरीर में पल रही कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने का गुण रखता है।
जरूरी बात : जिनकी पाचन क्रिया कमजोर हो या बहुत ज्यादा खांसी जुकाम रहता हो, उन्हें खरबूजा खाने से बचना चाहिए। खरबूजा खाने के बाद पानी और दूध का सेवन वर्जित है। खाली पेट या भोजन पूर्व खरबूजा खाने से एसिडिटी हो सकती है। खरबूजे को भोजन के थोड़ी देर बाद ही खाना चाहिए। खरबूजा खाने के बाद शक्कर का शरबत पीना लाभदायक होता है। विशेष : यहां खरबूजे के गुण व उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है। हम किसी उपाय की सफलता का दावा बिल्कुल नहीं करते हैं। सामान्य जानकारी चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। रोगोपचार में खरबूजे के उपयोग से पूर्व चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक व अनिवार्य है।