विनय संकोचीHealth : 'शहतूत' (Mulberry) एक फल है जो बहुत ही मुलायम स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक है। आयुर्वेद में शहतूत को अच्छा खासा सम्मान प्राप्त है। शहतूत चीन का देशज बताया जाता है। इसे संस्कृत, फारसी, आर्मेनि और अज़रबैजानी भाषाओं में 'तूत' कहा जाता है। वैसे तो कहा यह जाता है कि रेशम के कीड़ों को खिलाने के लिए सफेद शहतूत की खेती की जाती है, लेकिन लाल, काले, नीले रंग में कीड़े जैसा दिखने वाला यह फल स्वाद और सेहत के लिए भी खूब खाया जाता है। इतना ही नहीं इसे औषधि के रूप में भी सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है।
एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants) गुणों से भरपूर शहतूत को अंग्रेजी में 'मोरस अल्बा' कहते हैं। इसमें सोडियम(Sodium), पोटेशियम(Potassium,), कार्बोहाइड्रेट(Carbohydrate), डाइटरी फाइबर(Dietary Fiber), शर्करा(Sugar), प्रोटीन(Protein), विटामिन-सी(Vitamin-C), विटामिन-ए(Vitamin-A), विटामिन-के(Vitamin-K), विटामिन-बी6(Vitamin-B-6), कैल्शियम(Calcium), आयरन(Iron), मैग्नीशियम (Magnesium) आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं। भारत में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में शहतूत की अच्छी खेती होती है। आइए जानते हैं शहतूत फल और इसकी पत्तियों के गुण व उपयोग के बारे में-
• रोग प्रतिरोधक क्षमता मतलब इम्यूनिटी कम होने से तरह-तरह की बीमारियां हमलावर हो जाती हैं। शहतूत में पाए जाने वाले विटामिन-सी, विटामिन-ए और एंटीऑक्सीडेंट इम्यूनिटी बूस्टर का काम करते हैं, जिससे अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। इस मामले में शहतूत का जूस लाभदायक होता है।
• शहतूत के सेवन से कमजोर हड्डियों के कारण होने वाली परेशानी से बचाव होता है। शहतूत में कैल्शियम, आयरन और विटामिन-के के साथ फास्फोरस और मैग्नीशियम पाया जाता है, जो कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायता करते हैं।
• शहतूत में डाइटरी फाइबर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इसी की वजह से यह पाचन क्रिया में सुधार करने में सहायक है। शहतूत का नियमित रूप से सेवन करने से कब्ज और उदर की ऐंठन की समस्या कम हो सकती है।
• शहतूत के नियमित सेवन से न केवल रक्त कोशिकाओं को आराम मिलता है बल्कि रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है और खून के थक्के नहीं जमते हैं, जिससे स्ट्रोक और हृदयाघात की संभावना काफी कम हो जाती है।
• शहतूत के सेवन से टॉन्सिल के रोग में काफी लाभ मिलता है। शहतूत के शरबत का उपयोग टॉन्सिल से छुटकारा पाने के लिए किया जा सकता है।
• मधुमेह रोगियों के लिए भी शहतूत का सेवन लाभदायक हो सकता है। टाइप-टू डायबिटीज होने की आशंका हो तो शहतूत के सेवन की सलाह दी जाती है। कारण यह है कि शहतूत में मौजूद प्लाजमा ग्लूकोस को बढ़ाता है जो इंसुलिन प्रतिरोध को कम कर देता है।
• शहतूत एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है, जिसका सीधा लाभ हमारी आंखों को भी मिलता है। शहतूत के नियमित सेवन से रेटिना को होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। इसी के साथ मोतियाबिंद जैसी बीमारी में भी शहतूत फायदा पहुंचाता है।
• शहतूत के सेवन से जहां तनाव से मुक्ति मिलती है, वहीं इस चमत्कारी फल में पाया जाने वाला ग्लाईफॉसेट दिमाग को दुरुस्त रखकर याददाश्त बढ़ाता है। वृद्धावस्था में स्लो हो जाने वाले मस्तिष्क को शहतूत सक्रिय रखता है।
• शहतूत की पत्तियां दिल की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं। इन पत्तियों में मौजूद फेनोलिक्स और फ्लेवोनॉयड नामक तत्व दिल की बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं। शहतूत की पत्तियों में जो एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, वे कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर दिल को बीमार नहीं होने देते हैं।
• शहतूत की पत्तियों के सेवन से खून साफ रहता है, जिससे त्वचा संबंधित तमाम समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। शहतूत की पत्तियों की बनी चाय के सेवन से शरीर का रक्त शुद्ध हो सकता है। इस चाय से लीवर भी स्वस्थ रहता है।
• शहतूत की पत्तियों का अर्क पीने से वजन घटाने में सहायक मिलती है।
• शहतूत की पत्तियों को पीसकर निकाले गए रस को शरीर के किसी भी अंग में आई सूजन वाले हिस्से में लगाने से राहत मिलती है।
• निषेध : गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को, लीवर की समस्या वाले रोगियों को, एलर्जी से पीड़ितों को, कीमोथेरेपी के तहत उपचार रत रोगियों को, लो डायबिटीज पीड़ितों को, किडनी की बीमारी से ग्रस्त रोगियों को शहतूत के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए। शहतूत सेवन का एक कुप्रभाव त्वचा कैंसर के रूप में भी प्रकट हो सकता है।
विशेष : यहां शहतूत के गुण व उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है, जिसकी सफलता का हम दावा नहीं करते हैं। शहतूत को रोग विशेष में औषधि रूप में प्रयोग/ उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य करें, अन्यथा लाभ के स्थान पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। सामान्य जानकारी कभी भी चिकित्सकीय परामर्श की बराबरी नहीं कर सकती।