विनय संकोची
आयुर्वेद(Ayurveda) में हल्दी (Turmeric) को एक महत्वपूर्ण औषधि कहा गया है और इस भारतीय वनस्पति को आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही एक चमत्कारिक द्रव्य के रूप में मान्यता प्राप्त है। औषधीय ग्रंथों में इसे हल्दी के अतिरिक्त हरिद्रा, कुरकुमा लोंगा, वरवर्णिनी, गोरी, कृमिघ्ना, योशितप्रिया, हट्टविलासिनी, हरदल आदि नाम दिए गए हैं। भारतीय रसोई में इसका महत्वपूर्ण स्थान है और धार्मिक रूप से इसको बहुत शुभ समझा जाता है। विवाह में तो हल्दी की रस्म का अपना एक विशेष महत्व है।
• शोध से पता चलता है कि हल्दी कोलेस्ट्रोल को कम करती है, जिससे हृदय संबंधी रोग होने का खतरा कम होता है।
• दूध में कैल्शियम और हल्दी में एंटी ऑक्सीडेंट की मौजूदगी के कारण हल्दी वाला दूध पीने से हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। हल्दी वाले दूध को पीने से हड्डियों में होने वाले नुकसान और ओस्टियोपोरेसिस की समस्या में कमी आती है।
• खाली पेट हल्दी का सेवन शरीर की सफाई के लिए बहुत प्रभावशाली है। हल्दी पूरी तरह से एंटीबायोटिक है, इसलिए इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और बीमारी होने की संभावना कम होती है।
• हल्दी में उड़नशील तेल, प्रोटीन, खनिज पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट आदि के साथ कुर्कुमिन नामक एक महत्वपूर्ण रसायन के अलावा विटामिन भी पाए जाते हैं। हल्दी मोटापा घटाने में सहायक होती है। हल्दी में मौजूद कुर्कुमिन शरीर में जल्दी घुल जाता है। यह शरीर में वसा वाले ऊतकों के निर्माण को रोकता है।
• शरीर के बाहरी अथवा गुम चोट लगने पर हल्दी वाला दूध उसे जल्द से जल्द ठीक करने में मदद करता है, क्योंकि हल्दी अपने एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण बैक्टीरिया को पनपने नहीं देती है। शरीर के दर्द में भी हल्दी वाला दूध आराम पहुंचाता है। हाथ-पैर में, शरीर के अन्य भागों में दर्द की शिकायत होने पर रात को सोने से पहले हल्दी वाले दूध का सेवन बहुत लाभदायक होता है।
• हल्दी शरीर में ऊर्जा देने के साथ शरीर में खून को साफ रखती है। हल्दी में बढ़ती उम्र को रोकने की क्षमता है यह बढ़ती उम्र के प्रभाव को पता नहीं लगने देती है। हल्दी वाला दूध पीने से त्वचा में प्राकृतिक चमक पैदा होती है।दूध के साथ हल्दी का सेवन एंटीबैक्टीरियल होने के कारण त्वचा की समस्याओं जैसे - इन्फेक्शन, खुजली, मुहासे आदि के बैक्टीरिया को धीरे-धीरे खत्म कर देता है। इससे त्वचा साफ - स्वस्थ और चमकदार दिखाई देती है।
• सर्दी-जुकाम में कफ होने पर हल्दी वाले दूध का सेवन अत्यधिक लाभकारी साबित होता है। इससे सर्दी-जुकाम तो ठीक होता ही है, साथ ही गर्म दूध के सेवन से फेफड़ों में जमा हुआ कफ भी निकल जाता है।
• किसी भी कारण से नींद नहीं आने पर हल्दी वाला दूध सबसे अच्छा घरेलू नुस्खा है। रात को भोजन के बाद सोने के आधे घंटे पहले हल्दी वाला दूध पीने से बढ़िया नींद आती है।
• हल्दी वाला दूध आंतों को स्वस्थ रखकर पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। पेट के अल्सर, डायरिया, अपच, कोलाइटिस एवं बवासीर जैसी समस्याओं में भी हल्दी वाला दूध बेहद फायदेमंद होता है। हल्दी वाले दूध का प्रतिदिन सेवन, गठिया-बाय, जकड़न को दूर करता है, साथ ही जोड़ों मांसपेशियों को लचीला बनाता है।
• एक शोध के अनुसार हल्दी मधुमेह की रोकथाम में भी कारगर साबित होती है। कुछ वर्ष पूर्व कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चूहों के दो समूहों पर हल्दी के प्रभाव को जानने के लिए प्रयोग किए। जिन चूहों का इलाज हल्दी से किया गया, उनमें टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना कम पाई गई। खून में शर्करा की मात्रा अधिक हो जाने पर हल्दी वाले दूध का सेवन ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है। लेकिन अत्यधिक सेवन शुगर को ज्यादा कम कर सकता है, इसलिए सावधानी आवश्यक है। वायरल संक्रमण में आए बदलाव एवं अन्य कारणों से होने वाले वायरल संक्रमण में हल्दी वाला दूध सबसे बेहतर उपाय है, जो संक्रमण से बचाव करता है।
• जिन लोगों का लीवर बढ़ा हुआ है या फिर लीवर से संबंधित अन्य समस्याएं हैं, उन्हें हल्दी का सेवन नहीं करना चाहिए। हल्दी में मौजूद तत्व लीवर की समस्या को बढ़ा सकते हैं। एनीमिया की शिकायत है, तो हल्दी का सेवन कम कर देना बेहतर रहेगा। ज्यादा हल्दी खाने से पेट में गैस की समस्या होती है। इससे डायरिया और कब्ज भी हो सकता है।
विशेष : हल्दी का किसी भी रोग विशेष में औषधि के रूप में प्रयोग, योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श के उपरांत ही करना उचित रहता है।