विनय संकोचीHealth: 'खस' को आमतौर पर 'खसखस'('Poppy Seed') के नाम से जाना जाता है। इसे कन्नड़ में मुडिवाल, तमिल में उशीरम, बांग्ला में वेणर मूल, अंग्रेजी में वेटियर ग्रास कहा जाता है और इसका वानस्पतिक नाम वेटेवेरिया ज़िज़िनियोइडिस होता है। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में खसखस के गुण व उपयोग का वर्णन मिलता मिलना इसके औषधीय महत्व को दर्शाता है। खसखस में एंटी बैक्टीरियल (Anti Bacterial),एंटी ऑक्सीडेंट(Anti Oxidant) , एंटी इन्फ्लेमेटरी(Anti Inflammatory), एंटी फंगल(Anti Fungal), एनाल्जेसिक(Analgesic), संधिशोध(Rheumatoid Arthritis) जैसे अपरिमित औषधीय गुण पाए जाते हैं। ओमेगा6(Omega-6) फैटी एसिड(Fatty Acids) , प्रोटीन(Protein) , फाइबर (Fiber) से भरपूर खसखस में विटामिन-बी(Vitamin-B), कैल्शियम(Calcium), मैग्नीशियम(Magnesium), जिंक (Zinc)आदि पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जिनके चलते यह अनेक रोगों में रामबाण औषधि की तरह काम करता है।
आइए जानते हैं खसखस के औषधीय गुण व रोगोपचार में इसके उपयोग के बारे में -
• खसखस का उपयोग दर्द निवारक औषधि के रूप में भी किया जाता है। खसखस में फास्फोरस, जिंक, मैग्नीज और कैल्शियम अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसी के चलते मान्यता है कि यह जोड़ों के दर्द में विशेष लाभकारी हो सकता है। इसकी चाय का उचित मात्रा में सेवन दर्द से छुटकारा दिलाता है। खसखस के तेल का इस्तेमाल भी दर्द से राहत दिलाता है।
• जो लोग अनिद्रा की बीमारी से परेशान हैं, खसखस उनकी मदद कर सकता है। सोने से पहले पानी में खसखस के तेल की 8-10 बूंदें डालकर नहाने से अच्छी नींद आती है। इससे शरीर को ठंडक मिलती है और इसकी महक मन को शांत करती है, जिससे अनिंद्रा दूर होती है।
• खसखस में प्रचुर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है, जो कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाने में सहायता करता है। खसखस को पीसकर भोजन से पहले इसका सेवन करना कब्ज़ से मुक्त करा सकता है।
• अत्यधिक गर्मी के कारण मुंह में अल्सर की समस्या होना आम बात है। खसखस को पीसकर और इसमें थोड़ी सी चीनी मिलाकर सेवन करने से अल्सर में तत्काल राहत मिल सकती है।
• खसखस के सेवन से हृदय को बीमारियों से बचाया जा सकता है। खसखस में मौजूद फैटी एसिड जैसे कि लिनोलिक एसिड शरीर में रक्त कोलस्ट्रोल के बढ़ते स्तर को कम करते हैं। यही नहीं यह फैटी एसिड दिल की बीमारियों व दिल के दौरों को भी रोकने में सहायक होते हैं। दिल को स्वस्थ रखने के लिए भोजन में मिलाकर खसखस का सेवन लाभकारी है।
• खसखस खुजली और अन्य त्वचा संक्रमण के उपचार में फायदेमंद है। खसखस में नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर बनाए गए गाढ़े लेप को खुजली अथवा संक्रमण वाले हिस्से में लगाने से तत्काल लाभ मिलता है।
• खसखस मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं की सामान्य वृद्धि और विकास में भी उपयोगी है। इसका कारण खसखस में पाए जाने वाले कैल्शियम, आयरन, कॉपर जैसे खनिज हैं, जो मस्तिष्क के रसायनों को सक्रिय रखने में मददगार हैं। न्यूरोट्रांसमीटर की सक्रियता से मस्तिष्क सचेत और स्वस्थ रहता है।
• खसखस इम्यूनिटी बूस्टर की तरह भी काम करता है। शरीर में जिंक की कमी के चलते रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट आती है। खसखस ज़िंक का एक समृद्ध स्रोत है। इसके नियमित सेवन से इम्यूनिटी में कमी नहीं आने पाती है।
• अस्थमा तथा सांस की अन्य बीमारियों में भी खसखस का उपयोग काफी लाभदायक पाया गया है। खसखस को सर्दी खांसी की दवा के तौर पर सदियों से प्रयोग किया जाता है। इसके सेवन से वायुमार्ग, कंठमार्ग अवरुद्ध नहीं होता है।
• खसखस के नियमित सेवन से शरीर से विषाक्त तत्वों को निकाल बाहर किया जा सकता है, जो शरीर में बने रहकर अनेक बीमारियों को जन्म देते हैं।
• खसखस में मौजूद सेलेनियम थायराइड फंक्शन को बेहतर बनाता है। खसखस के सेवन से हाइपो और हाइपर थायराइड के लक्षणों से बचाव हो सकता है।
• खसखस त्वचा का भी मित्र है। दो चम्मच खसखस के बीजों को, चार चम्मच दही में अच्छी तरह मिलाकर चेहरे व गर्दन पर धीरे-धीरे 10 मिनट तक रगड़ कर ठंडे पानी से धोने से त्वचा में निखार आता है।
विशेष : खसखस नि:संदेह एक बेहद गुणकारी खाद्य पदार्थ है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग से एलर्जी, सुस्ती, मतली और कब्ज आदि समस्याओं से दो-चार होना पड़ सकता है। यहां खसखस के गुण व उपयोग के बारे में सामान्य जानकारी दी गई है, जिसकी सफलता का हम दावा नहीं करते हैं। खसखस के औषधीय गुणों का पूरा फायदा लेने के लिए रोग विशेष में खसखस की उचित मात्रा, सेवन विधि व आवृति के संबंध में योग्य चिकित्सा विशेषज्ञ/आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य करें। सामान्य जानकारी डॉक्टर या वैद्य का स्थान नहीं ले सकती है।