विनय संकोचीHealth : मूली (Raddish) का अपना रंग तो सफेद है, लेकिन यह शरीर को लालिमा प्रदान करती है। भोजन के साथ या भोजन के बाद मूली खाना विशेष रूप से लाभदायक है। मूली और इसके पत्ते भोजन को ठीक प्रकार से पचाने में सहायता करते हैं। कच्ची मूली सबसे अधिक लाभकारी होती है। भोजन के साथ प्रतिदिन एक मूली खा लेने से व्यक्ति अनेक बीमारियों से मुक्त रह सकता है। मूली शरीर से विषैली कार्बन डाइऑक्साइड को निकालकर ऑक्सीजन प्रदान करती है। मूली में प्रोटीन, कैल्शियम, गंधक, आयोडीन तथा लौह तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं। मूली से विटामिन-ए, विटामिन-बी, विटामिन-सी प्राप्त होते हैं।
जिसे हम मूली के रूप में जानते हैं, वह धरती के नीचे पौधे की जड़ होती है। अनुमानतः प्रति 100 ग्राम मूली में मिलने वाले पोषक तत्वों में प्रोटीन 7 ग्राम(Protein), कार्बोहाइड्रेट 3.4 ग्राम(Carbohydrate ), वसा (Fat) 1 ग्राम, खनिज(Mineral) 6 ग्राम, कैल्शियम (Calcium )35 मिलीग्राम, फाइबर(Fiber) 8 ग्राम, फास्फोरस(Phosphorus) 22 मिलीग्राम, नायोसन(Neosan) 5 मिलीग्राम, विटामिन-सी 15(Vitamin C-15) मिलीग्राम, आयरन (Iron )4 मिलीग्राम, कैरोटीन(Carotene) 3 मिलीग्राम और पानी (Water) 94.4 ग्राम पाया जाता है।
मूली को खाकर उसके पत्ते फेंक देना गलत है। मूली के साथ पत्तों का सेवन भी करना चाहिए। मूली के पौधे में आने वाली फलियां 'मोगर' भी समान रूप से स्वास्थ्यवर्धक हैं। अधिक स्वादिष्ट होने के कारण लोग मोटी मूली पसंद करते हैं। मगर छोटी, पतली और चरपरी मूली त्रिदोष वात पित्त और कफ नाशक होती है। इसके विपरीत मोटी और पकी मूली त्रिदोष कारक मानी जाती है। मूली के बारे में यह धारणा है कि यह ठंडी तासीर की है और खांसी बढ़ाती है। परंतु यह धारणा गलत है। यदि सूखी मूली का काढ़ा बनाकर जीरे और नमक के साथ सेवन किया जाए तो यह न केवल खांसी बल्कि दमे के रोग में भी लाभ पहुंचाती है। पेट संबंधी रोगों में यदि मूली के रस में अदरक का रस और नींबू मिलाकर नियम से पिया जाए तो भूख बढ़ती है और विशेष लाभ होता है।
मूली हड्डियों को शक्ति प्रदान करती है। मूली से थकान मिटती और अच्छी नींद आती है। मूली खाने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं। मूली उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करती है तथा बाबासीर और हृदय रोग को शांत करती है। इसका ताजा रस पीने से मूत्र संबंधी रोगों में राहत मिलती है। पीलिया रोग में भी मूली अत्यंत लाभदायक है। अफारे में मूली के पत्तों का रस विशेष रूप से उपयोगी होता है।
मूली में जहां पर्याप्त मात्रा में फाइबर मौजूद होता है, वहीं इसमें मौजूद तत्व इंसुलिन को नियंत्रित करने का काम करते हैं। मूली से शुगर लेवल बढ़ता नहीं है, जिससे इसकी वजह से यह मधुमेह पीड़ितों के लिए बड़ी अच्छी होती है। मूली के पत्तों में लौह तत्व भी काफी मात्रा में रहता है, इसलिए इसका सेवन खून को साफ करता है और इससे शरीर की त्वचा भी मुलायम होती है। मूली के रस से थोड़ा नमक और नींबू का रस मिलाकर नियमित रूप से पीने से मोटापा कम होता है और शरीर सुडौल बनता है। मूली उच्च रक्तचाप बवासीर की तकलीफ में लाभकारी है। मूली के रस में समान मात्रा में अनार का रस मिलाकर पीने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है।
दांतों पर पीलापन हो तो मूली के टुकड़े पर नींबू का रस लगाकर दांतों पर धीरे-धीरे मलने से दांत साफ हो जाते हैं। पायरिया की परेशानी में मूली के रस से दिन में दो-तीन बार कुल्ले करने और इसका रस पीने से लाभ होता है। मूली के रस के कुल्ले करना मसूड़ों-दातों पर मलना और पीना, दांतों के लिए बहुत लाभकारी है। मुंह से गंध आती हो तो मूली के पत्तों पर सेंधा नमक लगाकर रोज सवेरे-सवेरे खाने से लाभ होता है, दुर्गंध नष्ट हो जाती है। मूली को चबा चबाकर खाना दांतों व मसूड़ों को निरोग बनाता है। मूली पर नींबू नमक लगाकर सवेरे खाने से कब्ज में लाभ होता है। सुबह शाम मूली का रस पीने से पुरानी कब्ज में भी फायदा होता है।
मूली में फोलिक एसिड, विटामिन-सी और
एंथोकाइनिन की भरमार होती है। यह तत्व शरीर को कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं। यह माना जाता है कि मुंह, पेट, आंत और किडनी के कैंसर से लड़ने में यह बहुत सहायक होती है।
मूली से खुद हजम नहीं होती है, लेकिन अन्य भोज्य पदार्थों को पचा देती है। भोजन के बाद यदि गुड की 10 ग्राम मात्रा का सेवन किया जाए तो मूली हजम हो जाती है।