विनय संकोची
Health : कांच की रंगीन गोलियों जैसा ही खट्टा मीठा फल होता है 'रसभरी', जो सचमुच रस से भरी होती है। रसभरी का वैज्ञानिक नाम फाइसेलिस पेरयूवियाना है और यह टमाटर और बैंगन परिवार के ज्यादा निकट का रिश्तेदार लगता है। पोषक तत्वों से भरपूर रसभरी को मकाओ, तेपारियो, पोपटी, रसपरी, चिरबोट, फोपती, बुसरताया, भोलां, टंकारी, तंकासी, कुंतली और तिपारी आदि नामों से हमारे अपने देश में जाना जाता है। रंग में पीली या नारंगी और छोटे से टमाटर की तरह दिखने वाले फलों के ऊपर एक झीना सा आवरण होता है। रसभरी का पंचांग अर्थात् फल, फूल, पत्ते, तना और मूल का औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। जानकर आश्चर्य होगा की रसभरी में नींबू से दोगुना विटामिन-सी पाया जाता है। रसभरी में बहुत सारे पोषक तत्व पॉलीफिनॉल, केरिटिनॉयडस, विटामिन-ए, कैल्शियम, फोस्फोरस, फाइटोकैमिकल्स, एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं और रसभरी की पत्तियों में कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, विटामिन ए, विटामिन-सी, कैरोटिन आदि भी पाया जाता है। रसभरी चित्त को प्रसन्न करती है और इसका स्वाद जुबान पर काफी देर तक बना रहता है।
आइए जानते हैं रसभरी के गुण व उपयोग के बारे में-
• रसभरी दिल के स्वास्थ्य की रक्षक है। कमजोर हृदय वाले रसभरी का सेवन कर दिल को मजबूत बना सकते हैं। रसभरी में मौजूद फाइटोकेमिकल्स हृदय के स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होते हैं। रसभरी के पंचांग के काढ़े का सेवन कर कम हो गई ह्रदय की गति को संतुलित किया जा सकता है।
• रसभरी हड्डियों से जुड़ी समस्या से छुटकारा दिलाने में सहायता कर सकती है। इसमें पाया जाने वाला पेक्टिन नामक तत्व शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस की मात्रा को बनाए रखने का काम करता है, जिससे हड्डियां कमजोर नहीं होती है।
• रसभरी के प्रतिदिन नियमित सेवन से जोड़ों के दर्द और सूजन से छुटकारा पाया जा सकता है। रसभरी गठिया पीड़ितों को राहत पहुंचाने में सहायता करती है।
• रसभरी की पत्तियों का रस निकालकर तीन चम्मच मात्रा को पानी में मिलाकर पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
• रसभरी के पौधे की जड़ को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से अनिद्रा की समस्या से निजात मिल सकती है। काढ़े को थोड़ा सा गुड़ अथवा चीनी मिलाकर पीया जा सकता है।
• एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर रसभरी के सेवन से सर्दी-जुकाम और फ्लू के प्रकोप से खुद को बचाए रखा जा सकता है। इसमें मौजूद औषधीय गुण बंद नाक को बड़ी आसानी से खोलते हैं और इसे खाने से खांसी में भी आराम आता है।
• रसभरी में मौजूद विटामिन-सी और विटामिन-के आंखों की रोशनी को बढ़ाने में सहायक है। इसमें मौजूद आयरन भी आंखों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। रसभरी के सेवन से बढ़ती उम्र से संबंधित मैक्युलर डिजनरेशन से संबंधित और मोतियाबिंद की समस्या से बचा जा सकता है।
• रसभरी में मौजूद ओलिक और लिनोलिक एसिड शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) की मात्रा को कम करते हैं। रसभरी के सेवन से हृदय के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक गुड कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) की वृद्धि व संतुलन में सहायता मिल सकती है।
• रसभरी पाचन प्रक्रिया को सामान्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह कब्ज़ से भी राहत दिलाती है।
• पेशाब को उत्तेजित कर के विषाक्त पदार्थों को समाप्त कर और लिम्फेटिक प्रणाली से अतिरिक्त वसा, नमक व अन्य विषाक्त पदार्थों को निकाल बाहर कर किडनी को स्वस्थ बनाए रखने में सहायता करती है।
• रसभरी का सेवन टाइप-2 डायबिटीज में भी बहुत ही अच्छा घरेलू उपचार है।
• रसभरी में पाए जाने वाले एनालॉयड्स पूरे शरीर में कैंसर कोशिकाओं के प्रसार की गति को कम करने में सहायता कर सकते हैं।
जरूरी बात : कच्ची रसभरी नहीं खानी चाहिए क्योंकि यह विषाक्त हो सकती है। जंगली रसभरी से भी दूरी बना कर रखना ही उचित है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अपने डॉक्टर से पूछ कर ही रसभरी का सेवन करना चाहिए। विशेष : यहां रसभरी के गुण और उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है। यह सामान्य जानकारी चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। इसलिए हम किसी उपाय अथवा जानकारी की सफलता का दावा नहीं करते हैं। रोग विशेष के उपचार में रसभरी को औषधि रूप में अपनाने से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य/चिकित्सक/आहार विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है।