Health : खट्टी मीठी इमली कई रोगों के उपचार में उपयोगी है!
भारत
चेतना मंच
11 Apr 2022 03:48 PM
विनय संकोचीHealth : इमली (Tamarind) का नाम आते ही मुंह में पानी आ जाता है। इमली का कच्चा फल हरा होता है, जो पकने के बाद लाल रंग का हो जाता है। पकी इमली का स्वाद खट्टा मीठा होता है। इमली के बीज काले चमकदार और बहुत सख्त होते हैं, जिसे 'चिया' भी कहा जाता है। पकी इमली का उपयोग व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है। कच्ची या कम पकी के मुकाबले पकी और पुरानी इमली में गुण ज्यादा होते हैं। इमली के पत्ते भी खट्टे होते हैं, जिनका उपयोग आयुर्वेद में किया जाता है। इमली के फूल भी औषधीय उपयोग में लाए जाते हैं। इमली की छाल की भस्म गुणकारी होती है और कफ व वात दोष में संतुलन बनाने का काम करती है, पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है।
आयुर्वेद के अनुसार इमली के लाभ अनेक और आश्चर्यचकित करने वाले होते हैं। इमली व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी अत्यधिक लाभकारी है। आयुर्वेद कच्ची इमली को वातनाशक तथा कफ, पित्तकारक व आमकारक जैसे रोगों को समाप्त करने में सहायक मानता है। इमली के सेवन से उदर रोग तथा अतिसार जैसे रोगों से छुटकारा मिलता है, ऐसा आयुर्वेद का कथन है।
मराठी में चिंच, कन्नड़ में हंस, गुजराती में अम्ली, तेलुगु में चिंतपांडु, बंगाली में टेटुल, मलयालम में वालानपुली कही जाने वाली इमली का वैज्ञानिक नाम टैमरिंड है। इमली कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें विटामिन-सी और विटामिन-ए के अतिरिक्त कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, पोटेशियम मैंगनीज और फाइबर जैसे खनिज तत्वों की अच्छी खासी मात्रा होती है। ये तमाम पोषक तत्व आंखों की समस्या, सर्दी-जुकाम, पीलिया के साथ वजन कम करने में भी सहायक होते हैं। आइए जानते हैं खट्टी-मीठी इमली के गुण व उपयोग के बारे में।
• इमली पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायक है। जिन लोगों को भूख न लगने की बीमारी हो उन्हें इमली के रस में काली मिर्च का चूर्ण डालकर थोड़ी-थोड़ी देर में एक से दो चम्मच पीना चाहिए। ऐसा करने से भूख खुलकर लगने लगेगी।
• इमली के सेवन से शरीर में रक्त संचार सुचारू होने लगता है। इतना ही नहीं इमली के प्रयोग से लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता मिलती है, जिससे कमजोरी ही दूर नहीं होती बल्कि याददाश्त भी बढ़ती है।
• इमली शरीर से हानिकारक बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करती है। इमली में मौजूद पोटैशियम उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायता करता है। इमली के इन गुणों के चलते हृदय रोगों से बचाव हो सकता है।
• इमली में सूजन को कम करने के गुण होते हैं। यही कारण है कि सदियों से इमली का जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए उपयोग किया जा रहा है। इमली के बीजों को पीसकर बनाए गए चूर्ण को नियंत्रित मात्रा में खाने या किसी
पेय पदार्थ में मिलाकर पीने से जोड़ों के दर्द व सूजन में आराम आता है।
• गेहूं के आटे में इमली के पत्ते और इमली के रस को मिलाकर चुटकी भर नमक डालकर उबालकर बनाए गए पेस्ट को घाव पर लगाने से दर्द व सूजन में चमत्कारी राहत मिलती है। घाव जल्दी ठीक हो जाता है।
• इमली के वृक्ष की छाल को जलाकर बनाई गई भस्म को गाय के घी में मिलाकर लगाने से जलने से पड़ गए छाले और घाव ठीक हो जाते हैं।
• इमली के वृक्ष की छाल की भस्म (10 ग्राम) बकरी के दूध के साथ मिलाकर नियम पूर्वक सेवन करने से पीलिया में बहुत अधिक आराम मिलता है।
• इमली का गूदा (5 ग्राम) रात को थोड़े से जल में भिगोकर प्रात:काल उसके छिलके निकालकर दूध के साथ छानकर पीने से सभी प्रकार के मूत्र विकार में आराम आता है।
• टीबी की खांसी में जब कफ के साथ में थोड़ा रक्त आ रहा हो, तब इमली के बीजों को तवे पर सेंक कर उनके ऊपर के छिलके निकालकर पीसकर और कपड़े में छानकर बनाए गए बारीक चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा गाय के घी या शहद के साथ दिन में तीन-चार बार लेने से खासी के वेग में लाभ होता है। कफ सरलता से निकलने लगता है और रक्त आना भी बंद हो जाता है।
• पकी इमली का रस मिश्री के साथ पीने से हृदय की जलन कम हो सकती है।
• इमली के बीजों को पत्थर पर पानी के साथ घिस कर बनाए गए लेप को गुहेरी पर लगाने से तत्काल ठंडक मिलती है।
• इमली के पत्तों का रस निकालकर पीने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
• 10 ग्राम इमली को 1 लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो उसमें थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर छान लें। इससे कुल्ला और गरारे करने से गले की सूजन खत्म हो जाएगी।
इमली से होने वाले नुकसान:
• गर्भवती महिलाओं को इमली के अधिक सेवन से दुष्परिणाम का सामना करना पड़ सकता है। जिन्हें इमली से एलर्जी है, इमली खाने से उनकी त्वचा पर चकत्ते पड़ सकते हैं, खुजली हो सकती है। उल्टी और चक्कर जैसी शिकायत भी हो सकती है। खून को पतला करने वाली दवा का सेवन करने वालों को इमली का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इमली में खून को पतला करने के गुण होते है। डायबिटीज़ के जो मरीज इंसुलिन या शुगर की दवा लेते हैं, उन्हें इमली का उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए। जिन्हें लो ब्लड प्रेशर की शिकायत हो उन्हें इमली के सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इमली ब्लड प्रेशर को कम करती है।
सावधानी : इमली गुणकारी है लेकिन इसको खाने से रोग विशेष और परिस्थिति विशेष में नुकसान भी हो सकता है। अतः योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श से पूर्व औषधि के रूप में इमली के उपयोग से बचना चाहिए। यहां इमली के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है और सामान्य जानकारी को उपचार मान लेना हानिकारक हो सकता है। हम इन उपायों की सफल होने का दावा बिल्कुल नहीं करते हैं।