किशमिश (Raisin)अंगूर (Grapes)को सुखाकर तैयार किया जाता है। मानव ने किशमिश का आविष्कार तब किया जब अंगूर को बल पर ही सूखते हुए देखा। 1490 बी.सी. से ही यह निश्चित हुआ कि धूप में अंगूर सूखने पर किशमिश बनता है। किशमिश के सेवन से रस, रक्त, शुक्र आदि धातुओं तथा ओज की मात्रा बढ़ती है। जीवनी शक्ति कमजोर करने वाली ऋतु गर्मी और बारिश में यह वरदान है। किशमिश का स्वाद मधुर है, परिणाम शीतल है, वायु-पित्त और कफ इन तीनों दोषों को सहन करने की शक्ति इसमें है। इसमें दूध के सारे गुण हैं, लेकिन वायु का दोष नहीं है। किशमिश में अधिक मात्रा में आयरन(Iron), पोटेशियम(Potassium), कैल्शियम(Calcium), मैग्नीशियम(Magnesium) और फाइबर(Fiber) पाया जाता है जो कि सेहत के लिए फायदेमंद है। किशमिश का इस्तेमाल मुख्य रूप से मिठाई, खीर और दूसरी मीठी चीजों को सजाने या स्वाद के लिए किया जाता है। बेहतरीन स्वाद के अलावा इसमें सेहत का भी खजाना है। किशमिश खाना स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
किशमिश में भारी मात्रा में आयरन होता है, जो कि सीधे एनीमिया (Anemia)से लड़ने की शक्ति रखता है। खून को बनाने के लिए विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स की जरूरत को भी यही किशमिश पूरा करती है। कॉपर भी खून में लाल रक्त कोशिका को बनाने का काम करता है। किशमिश में बोरोन नामक माइक्रोन्यूट्रिएंट पाया जाता है जो कि हड्डी को कैल्शियम सोखने में मदद करता है। बोरोन वजह से ओस्टियोपोरोसिस से बड़ी राहत मिलती है। साथ ही किशमिश खाने से घुटनों की भी समस्या पैदा नहीं होती।
किशमिश पूरी तरह से कोलेस्ट्रॉल(Cholesterol) मुक्त होता है। किशमिश में घुलनशील फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है, यह घुलनशील फाइबर बुरे कोलस्ट्रोल का विरोध करता है। प्रतिदिन किशमिश का सेवन करने से हाजमा ठीक रहता है और पाचन तंत्र भी सुचारू रूप से कार्य करता है। यह पेट में जाकर पानी को सोखती है, जिसके फलस्वरूप कब्ज़ से राहत मिलती है। किशमिश में विटामिन-ए, ए-बीटा कैरोटीन आदि होते हैं, जो कि आंखों के लिए अच्छे हैं। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट प्रॉपर्टी पाई जाती है, जो कि आंखों की फ्री रेडिकल से लड़ने में मदद करती है। इससे मोतियाबिंद, उम्र बढ़ने की वजह से आंखों की कमजोरी नहीं होती है। अगर किसी का वजन बहुत कम है और वह वजन बढ़ाने के लिए को लेकर फिक्रमंद है, तो किशमिश के सेवन से फायदा होगा।
ज्यादा मानसिक तनाव, क्षमता से ज्यादा शारीरिक काम करने से अक्सर कम रक्तचाप की शिकायत होने लगती है, आयुर्वेद में इसे कंट्रोल करने के लिए किशमिश का सेवन कारगर इलाज है। एक चीनी के बाउल में पानी में किशमिश डालकर रात भर भिगो दें, सुबह उठकर खाली पेट 11 किशमिश को खूब चबा- चबाकर खाएं। पूरे फायदे के लिए हर किशमिश को 32 बार चबाकर खाएं। नियमित 32 दिन तक इस प्रयोग करने से लो ब्लड प्रेशर की शिकायत नहीं होगी।
किशमिश में मौजूद फिनॉलिक पायथोन्यूट्रेंट जो कि जर्मीसाइडल एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंट तत्वों की वजह से जाने जाते हैं, वो वायरल तथा बैक्टीरियल इंफेक्शन से लड़कर बुखार को जल्द से जल्द ठीक कर देते हैं।
किशमिश की मदद से शराब से छुटकारा पाया जा सकता है। शराब पीने की इच्छा होने पर शराब की जगह 10 से 12 ग्राम किशमिश को चबा-चबा कर खाएं या किशमिश का शरबत पिएं। यह प्रयोग लगातार करने से कुछ ही दिनों में शराब छूट जाती है।
जब खून में एसिड बढ़ जाता है तो फोड़े-फुंसियां, गठिया, गाउट गुर्दे की पथरी, बाल झड़ने, ह्रदय रोग, ट्यूमर और यहां तक कि कैंसर होने की संभावना पैदा हो जाती है। किशमिश में अच्छी मात्रा में पोटेशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है, जिसको खाने से रक्त की परेशानी दूर हो जाती है। इसमें केटाचिन, फिनॉलिक एंटीऑक्सीडेंट मौजूद रहता है, जो ट्यूमर और कोलोन कैंसर को रोकने में मदद करता है। इसमें जो फाइबर रहता है वह कोलोस्ट्रोल को जलाने और स्वास्थ्य को अच्छा करने में मदद करता है।