तेजपात (Tejpat)को आयुर्वेद(Ayurveda) में अनेक रूप में इस्तेमाल किया जाता है। भोजन को स्वादिष्ट बनाने वाला तेजपाल सेहत के लिए भी लाभदायक है। बुढ़ापे(Old Age) की प्रक्रिया को धीमा करने, शरीर को बैक्टीरियल संक्रमण से बचाने, मधुमेह का समुचित प्रबंधन करने, ह्रदय के स्वास्थ्य को सुधारने, घाव को शीघ्र भरने, सूजन को घटाने, प्रसन्न समस्याओं पर नियंत्रण करने, पाचन का अनुकूलन करने और कुछ प्रकार के कैंसर को रोकने में तेजपात काफी लाभदायक पाया गया है।
मध्य युग में तेजपात को गर्भपात कराने वाला और कई जादुई गुणों वाला माना जाता था। एक रोचक तथ्य यह भी है कि रोमन लोग सेंट वैलेंटाइन दिवस (Valentines Day) पर अपने तकिए के नीचे एक सूखा तेजपात रखते हैं। धारणा यह है कि इस पत्ते के कारण स्वप्न में उपयोगकर्ता की मुलाकात उनके भावी पति या पत्नी से होती है। जानते हैं तेजपात के विभिन्न रोग निवारक गुणों के बारे में।
हृदय संबंधी अनेक समस्याओं में तेजपात लाभप्रद होता है। इसके सेवन से दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम होता है। टाइप टू प्रकार की डायबिटीज के उपचार में तेजपात का प्रयोग बहुत उपयोगी साबित होता है। यह रक्त शर्करा को नियंत्रित रखता है और मधुमेह के कुप्रभाव को प्रभावों पर अंकुश लगाता है। तेजपात को पीसकर बनाए गए बहुत बारीक चूर्ण की एक चम्मच दिन में तीन बार पानी के साथ फंकी लेने से मधुमेह रोगी को शीघ्र लाभ होता है। इसी प्रकार रात को एक चम्मच तेजपात का बारीक चूर्ण कांच के गिलास में डालकर, तीन चौथाई गिलास पानी से भरकर चम्मच से अच्छी तरह मिलाएं और ढककर रख दें। सुबह गिलास के पानी पर जमी जेली जैसी परत को हटा कर फेंक दें और उस पानी को मलमल के कपड़े में छानकर पी लें। आधा घंटा कुछ भी ना खाएं-पीएं, मधुमेह नियंत्रण में रहेगा।
जिन लोगों को हकलाने की आदत हो, यदि वे तेजपात के पत्तों को प्रतिदिन नियम से चूसें, हकलाने की समस्या से मुक्ति पा सकते हैं। आंखों की कमजोरी को दूर करने के लिए और आंखों की सफाई के लिए तेजपात के चूर्ण का सुरमा लगाना फायदेमंद बताया जाता है, तेजपात दृष्टि को तेज भी बनाता है।
तेजपात किडनी में होने वाली समस्या को दूर करने में भी सहायक है, पाचन तंत्र को मजबूत करता है और इसीलिए इसके सेवन से अनेक प्रकार के पाचन संबंधी विकार ठीक हो जाते हैं। आज बड़ी संख्या में लोग दांतों के विभिन्न रोगों से पीड़ित रहते हैं। तेजपात दांतों के स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी है। सप्ताह में तीन दिन तेजपात के बारीक चूर्ण से मंजन करने से दांत चमकदार व मजबूत होते हैं। दांतों में कीड़ा नहीं लगता है। तेजपात, पीपल, अदरक, मिश्री सभी को बराबर मात्रा में पीसकर बनाई गई चटनी 40 दिनों तक एक चम्मच प्रतिदिन नियम पूर्वक खाने से दमा रोग में सुनिश्चित लाभ मिलता है।
बालों को नरम, मुलायम और चमकदार बनाए रखने में तेजपात का उपयोग बहुत असर कारक होता है। इसे तेल में डालकर उस तेल को बालों की जड़ों में लगाया जा सकता है या फिर उसके पानी से बालों को धो सकते हैं। सर्दी जनित रोगों के उपचार में तेजपात का प्रयोग लाभकारी है। 10 ग्राम तेजपात कूट कर तवे पर सेक कर रख लें, इसका एक भाग दो कप पानी में स्वादानुसार दूध-चीनी मिलाकर चाय की तरह उबालकर छानकर नित्य तीन बार पीने से सर्दी के कारण शरीर दर्द, नाक से पानी गिरना, सिर में भारीपन, जलन, गला बैठना, तालु छिलना आदि में बहुत आराम मिलता है।
इसके अतिरिक्त भी तेजपात में असंख्य गुण पाए जाते हैं। तेजपात का उपयोग किसी भी बीमारी में किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श के उपरांत ही करना चाहिए।