विनय संकोची
Health: 'टिंडा' (Apple Gourd) एक ऐसी सब्जी है, जो बहुत से लोगों को पसंद ही नहीं आती है। टिंडा खाना तो दूर इसका नाम सुनते ही बहुत से लोगों के मुंह का जायका बिगड़ जाता है। मूड खराब हो जाता है। हल्के हरे रंग का रोयेंदार टिंडा भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ही विशेष रूप से उगाया जाता है। वैसे अब इस गुणकारी सब्जी को कुछ अफ्रीकी देशों में भी उगाया जाने लगा है। हल्के हरे आवरण वाला टिंडा अंदर से सफेद होता है और इसमें बीज भी होते हैं। अंग्रेजी में ऐपल गार्ड कहे जाने वाले टिंडे को संस्कृत में रोमशफल, डिंडिश, चित्तगोडुंबा मराठी में ढेमसे, मलयालम में दिंडशी और सिंधी में दिलपसंद कहा जाता है।
टिंडे को आयुर्वेद स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद और अनेक बीमारियों को रोकने में उपयोगी मानता है। शून्य कोलेस्ट्रॉल (Zero Cholesterol) और अधिक पानी वाले टिंडे में प्रोटीन (Protein), फैट(Fat), कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate), फाइबर (Fiber), कैल्शियम(Calcium), पोटेशियम (Potassium) , विटामिन ए (Vitamin-A), विटामिन सी(Vitamin-C) , विटामिन बी6( Vitamin-B 6), विटामिन ई (Vitamin-E) जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त टिंडे में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण भी मिलते हैं। खीरे के परिवार के सदस्य टिंडे की तासीर ठंडी होती है। अपने पोषक तत्वों और गुणों के कारण टिंडा सुपर फूड की श्रेणी में आता है।
आइए जानते हैं टिंडे के गुण और उपयोग के बारे में, जिन्हें जानकर आप टिंडे को अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहेंगे।
• कैलोरी बहुत कम होने के कारण टिंडा मधुमेह रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। टिंडे के सेवन से ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। टिंडे के छिलके में मौजूद फोटोकेमिकल ब्लड शुगर को कम कर सकता है।
• सप्ताह में दो-तीन बार टिंडे का नियमित सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि हो सकती है। टिंडे के बीजों के सेवन से भी इम्युनिटी बढ़ती है। टिंडे का सेवन आए दिन होने वाले रोगों के हमलों को रोकने में मददगार हो सकता है।
• टिंडा दिल का दोस्त होता है। टिंडे के नियमित सेवन से शरीर में रक्त प्रवाह निर्बाध रहता है और हृदय की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। हृदय रोगियों को टिंडे के सेवन से परहेज नहीं करना चाहिए।
• टिंडे के सेवन से छाती और गले में जमा हुआ बलगम आसानी से पिघलकर निकलने लगता है। टिंडा श्वसन तंत्र को भी मजबूती प्रदान करता है।
• टिंडे में 94% पानी होता है और इसमें फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। यदि टिंडे को अपने आहार में ठीक से शामिल कर लिया जाए, तो वजन बढ़ने के जोखिम से बचा जा सकता है। और यदि वजन बढ़ ही गया है, तो टिंडे के सेवन से उसे कम भी किया जा सकता है।
• टिंडा पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है इसके सेवन से गैस डायरिया और डिहाइड्रेशन जैसी समस्या भी नहीं होती है।
• टिंडे के सेवन से त्वचा को भी स्वस्थ और सुंदर बनाए रखा जा सकता है। टिंडे में मौजूद विटामिन-ई नर्म और मॉइश्चराइज करने में मदद करती है। टिंडा त्वचा को एलर्जी और फंगल इंफेक्शन से भी बचाता है।
• टिंडा खून को साफ करने में सहायक है, जिससे दूषित रक्त से होने वाले विकारों के जोखिम से बचा जा सकता है।
• टिंडे की कम मसाले वाली सब्जी के सेवन से पीलिया और मधुमेह में फायदा होता है।
• ताजे कोमल टिंडे के 10-15 मिलीलीटर रस में 80 मिलीग्राम यवक्षार मिलाकर पीने से पथरी टूट-टूट कर निकल सकती है।
• टिंडे के नियमित सेवन से मूत्राशय की सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है।
• टिंडे का रस निकालकर मिश्री मिलाकर सेवन करने से प्रदर यानी ल्युकोरिया के उपचार में सहायता मिल सकती है।
जरूरी बात : टिंडे के अत्यधिक मात्रा में सेवन से पेट-दर्द, पेट में ऐठन की शिकायत हो सकती है। ज्यादा टिंडे खाने से डायरिया हो सकता है। गर्भवती महिलाओं को टिंडे के सेवन से बचना चाहिए। विशेष : यहां टिंडे के गुण और उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है। यह सामान्य जानकारी चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। इसलिए हम किसी उपाय अथवा जानकारी की सफलता का दावा नहीं करते हैं। रोग विशेष के उपचार में टिंडे को औषधि रूप में अपनाने से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य/चिकित्सक/आहार विशेषज्ञ से परामर्श जरूरी है।