विनय संकोची
Health & Nature : प्रकृति परमेश्वर की परम शक्ति का भौतिक स्वरूप है। प्रकृति मानव की सच्ची मित्र है। उसके मित्र-भाव को जो लोग आत्मसात करते हैं, सुखी और स्वस्थ रहते हैं। प्रकृति ने वनस्पतियों के रूप में मानव को अनगिनत उपहार दिए हैं। एक-एक वनस्पति में स्वास्थ्य का अनमोल खजाना छिपा हुआ है। जो इस खजाने को पहचान पाया, इस खजाने तक पहुंच पाया, उसे मिली निरोगी काया और जीवन जीने का उत्साह। प्रकृति का एक बहुत ही प्यारा उपहार है - 'पुदीना'(Mint) जिसमें स्वास्थ्य का अमृत समाहित है।
• वायु विकारों (Air Disorders)को नष्ट करने वाले पुदीने के 5 मिलीलीटर रस में नीबू (Lemon ) का समभाग रस और 7-8 ग्राम शुद्ध शहद(Honey ) मिलाकर सेवन करने से उदर रोगों से मुक्ति मिल जाती है।
• यदि किसी को भोजन में अरुचि हो गई है, भूख नहीं लगती है, तो पुदीना, हरा धनिया, काली मिर्च, अंगूर या अनार की चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस मिलाकर खाने से पाचन क्रिया तेज होती है और भूख लगने लगती है।
• पुदीना रस को शहद के साथ मिलाकर 15 दिनों तक नियमित सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है। पुदीने की चटनी भोजन के साथ नित्य प्रति खाने से भी पीलिया रोग में फायदा होता है।
• जिन्हें निम्न रक्तचाप ने घेर लिया है, वे 50 ग्राम पुदीने को पीसकर उसमें स्वाद के अनुसार सेंधा नमक, हरा धनिया और काली मिर्च डालकर चटनी के रूप में सेवन करें। निम्न रक्तचाप सामान्य की दिशा में बढ़ चलेगा।
• गठिया रोगी को पुदीने का काढ़ा बनाकर पिलाने से गठिया रोग में लाभ होता है।
• पेट दर्द में पुदीना रामबाण का काम करता है। दो चम्मच पुदीने के पत्तों का सूखा चूर्ण और एक चम्मच मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेट दर्द में तुरंत आराम मिलता है। पुदीने के सात पत्ते और छोटी इलायची का एक दाना पान के पत्ते के साथ खाने से उदर शूल से मुक्ति मिलती है। पुदीना सौंफ, सौंठ और गुलकंद को अच्छी तरह पीसकर पानी में उबालकर दिन में तीन बार रोजाना खुराक के रूप में पीने से पेट दर्द तो ठीक होता ही है, कब्ज़ से भी मुक्ति मिल जाती है।
• जो लोग पेट गैस से परेशान रहते हैं, उन्हें चाहिए कि सुबह खाली पेट एक गिलास पानी में 25 मिलीलीटर पुदीना रस और 25 ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर सेवन करें। गैस से मुक्ति मिलेगी।
• पुदीने के रस में, नींबू का रस मिलाकर पानी में डालकर पीने से यकृत वृद्धि में बहुत अधिक लाभ होता है अर्थात लीवर का बढ़ना रुक जाता है।
• एक कप पानी में पुदीने की चटनी बनाकर थोड़ी सी चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त-एसिडिटी के कारण पेट में होने वाली जलन शांत होती है।
• आधा कप पुदीने का रस दिन में दो बार नियमित रूप से सेवन करने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं। पुदीने की 10 पत्तियों के साथ पांच मुनक्का सुबह-शाम खाने के बाद नियमित रूप से चबाते रहने से बदहजमी में आराम मिलता है।
• चौथाई कप पुदीने का रस, उतने ही पानी में मिलाकर प्रतिदिन तीन बार पीने से खांसी, जुकाम, कफ, दमा और मंदाग्नि में लाभ होता है।
• चोट लग जाने से रक्त जमा हो जाने पर पुदीने का अर्क पीने से रक्त का थक्का पिघल जाता है, जमा हुआ खून टूट कर बिखर जाता है। पुदीने के पत्तों को पीसकर पोटली बनाकर बांधने से घाव के कीड़े मर जाते हैं।
• पुदीने के पत्तों को चूसने और पत्तों को नारियल के साथ चबाकर खाने से हिचकियां बंद हो जाती हैं। पुदीने के पत्ते को मिश्री के साथ खाने से भी हिचकी मिट जाती है।
• हैजा होने पर पुदीना, प्याज और नींबू का रस मिलाकर रोगी को देने से बड़ा लाभ होता है। आंतों की बीमारी से पीड़ित रोगियों के लिए पुदीने के ताजा रस का सेवन करना बहुत लाभकारी है।
• पुदीना और अदरक का काढ़ा पीने से शीत ज्वर मिट जाता है। उससे पसीना निकल जाता है और हर प्रकार का ज्वार मिट जाता है।
• पुदीना, राम तुलसी छोटे और हरे पत्तों वाली और श्याम तुलसी काले पत्तों वाली का रस निकालकर उसमें थोड़ी सी मिश्री डालकर सेवन करने से टाइफाइड के रोग में लाभ होता है।
• पुदीने का ताजा रस शहद के साथ मिलाकर हर एक घंटे के बाद पीने से निमोनिया से होने वाले अनेक विकारों की रोकथाम होती है और ज्वर समाप्त हो जाता है।
• पुदीने के रस को मुल्तानी मिट्टी में मिला कर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की झाइयां समाप्त हो जाती हैं। चेहरे की त्वचा अधिक तैलीय होने पर पुदीना रस को रुई से चेहरे पर लगाने से तैलीयपन समाप्त हो जाता है।
• इसके अतिरिक्त भी पुदीने के बहुत सारे गुण हैं, जिनका लाभ हम ले सकते हैं। यहां पुदीने के रोगनाशी गुणों की सामान्य जानकारी दी गई है।
रोग विशेष में औषधि के रूप में पुदीने के प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य कर लें।